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अपने घर के मकान का लम्बा होता इंतजार नपा में फिर रूके नामांतरण प्रकरण

 

मंदसौर। एक वर्ष से ज्यादा से मंदसौर नगर पालिका सुचारू रूप से नहीं चल पाई थी। भाजपा के नपाध्यक्ष राम कोटवानी के निर्वाचित होने के बाद उम्मीद लग रही थी कि नपा के सभी पेडिंग पड़े जरूरी काम जल्द पूरे हो जायेंगे। लेकिन कोरोना ने एक फिर सब कामों को रोक दिया और नपा के सारे जरूरी काम ठप्प हो गए।

उल्लेखनीय है कि नपा में सबसे ज्यादा नामांतरणों के प्रकरण लम्बित पड़े है। अभी 2019 के प्रकरणों का ही निराकरण नहीं हो पाया है। लोग परेशान हो रहे है लेकिन क्या करें कोई हल भी तो नहीं है। नगर के कई लोगो ने प्लाट खरीद रखे है जिनपर पर वे अपना मकान बनाना चाहते है। लेकिन नामांतरण नहीं होने के कारण लोगों को लोन नहीं मिल रहा है जिसके कारण अपने खुद के आशियाने का इंतजार लम्बा होता चला जा रहा है। वहीं नामांतरण के अभाव में कई लोगों की प्रधानमंत्री आवास की फाइलें भी लम्बित पडी हुई है। श्री कोटवानी ने जब पदभार ग्रहण किया था तब उन्होने सबसे पहले नामांतरणों के प्रकरण निपटाने की बात कही थी और वे इस दिशा में काम भी कर रहे थे। लेकिन कोरोना ने सबकुछ एक बार फिर रोक दिया।

एक वर्ष तक चला ये घटनाक्रम, इसलिए रूक गये सभी जरूरी काम
17 जनवरी 2019 नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की मृत्यु के बाद नपाध्यक्ष मंदसौर की सीट खाली हो गई। उनके मरने के बाद नपा के सभी जरूरी काम रूक गए। तब शासन ने वेतन संबंधी और अन्य आर्थिक कामों की पूर्ति करने के लिए तत्कालीन अपर कलेक्टर रणजीतसिंह को नपाध्यक्ष का चार्ज सौंपा था। लेकिन वे भी सिर्फ बहुत जरूरी और आर्थिक कामों को ही निपटा रहे थे। उसके बाद सीएमओ सविता प्रधान गौड़ का स्थानांनतरण हो गया और नए सीएमओं श्री मिश्रा आ गए। इस दरमियान दो माह तक नपा मंे काम नहीं हुआ। नपाध्यक्ष की कुर्सी खाली होने से नामांतरण के मामलों पर तो कोई ध्यान नहीं दे रहा था। लेकिन लोगों के नामांतरण प्रकरण रोज बढ़ रहे थे। छ माह बार नपा को मो हनीफ शेख के रूप में नया अध्यक्ष मिला तो लोगों को उम्मीदें जगी। लेकिन फिर सीएमओ मिश्रा और सीएमओ प्रधान का कुर्सी को लेकर झगढ़ा चालू हो गया। एक माह तक यह ड्रामा चला। फिर न्यायालय के आदेश के बाद सीएमओं प्रधान तय हुई। फिर लोगों को उम्मीद जगी की अब सब सुजारू रूप से चालू हो जायेगा। लेकिन इसी बीच भ्रष्टाचार के आरोपों में सीएमओ प्रधान को लगभग एक माह तक फरारी काटना पड़ी। नपा के जरूरी काम फिर अटक गए। सीएमओं मैडम आई इतने नपाध्यक्ष शेख की जाने की तैयारी हो गई और उच्च न्यायालय के आदेश के बाद चुनावों की घोषणा हो गई। नपा में आचार संहिता लग गई। सब काम फिर से रूक गए। अंत में उपचुनाव में भाजपा के राम कोटवानी नपाध्यक्ष बनें और उन्होने सबसे पहले नामांतरणों के प्रकरणों को निपटाने की बात कही थी और वे इस दिशा में आगे बढ़ ही रहे थे कि कोरोना आ गया और उसके एक फिर नपा के सभी काम रोक दिए।

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