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अफीम उत्पादक किसानों के लिए खबर : 6 मई से अफीम तोल

– मंदसौर जिले में 18 हजार 929 किसानों ने की खेती

मंदसौर.  मालवा क्षेत्र के अफीम काश्तकार की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। जहां पूर्व में बारिश और मौसम की मार से काश्तकार परेशान हुआ था। किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत अफीम की रखवाली करना है। मालवा क्षेत्र में नीमच, मंदसौर, रतलाम जिलों में कुल 37 हजार 324 किसानों ने अफीम की खेती की है। काले सोने के नाम से विख्यात अफीम जिले की प्रमुख फसल है। और यह भी लॉक डाउन में किसानों के घरों में ही रखी है। 

वर्ष 2019-20 में अफीम उत्पादक किसानों के लिए वह खबर आ ही गई जिसका लंबे समय से उन्हें इंतजार था । वैसे तो यह अफीम तोल अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाता है, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसकी तारीख निश्चित नहीं की जा रही थी । इसको लेकर सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा अफीम की सुरक्षा और तोल को लेकर समय-समय पर गृह राज्य मंत्री और वित्त राज्य मंत्री से वीडियो कंन्फ्रेस द्वारा और पत्र व्यवहार द्वारा अवगत कराया जाता रहा कि अफीम की सुरक्षा किसानों के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण होती है। जिस पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा नारकोटिक्स कमिश्नर ग्वालियर को निर्देशित कर दिनांक 6 मई से अफीम तोल की स्वीकृति प्रदान की गई है।

अब विभाग द्वारा संसदीय क्षेत्र के नो तोल केंद्रों पर अफीम की तुलाई प्रारंभ कर दी जाएगी जिसमें मन्दसौर के तीन खंड, नीमच के तीन खंड, जावरा के दो खंड और गरोठ के एक खंड में तुलाई का कार्य शुरू किया जाएगा। मन्दसौर के प्रथम खंड को नारकोटिक्स अधिकारी अनिल शर्मा देखेंगे व द्वितीय खंड को प्रियरंजन और तृतीय खंड को एसके सिंह देखेंगे । वहीं गरोठ में आरके आनंद तो जावरा के प्रथम खंड और द्वितीय खंड पर राजकुमार अफीम तोल के प्रभारी अधिकारी होंगे। इसी तरह नीमच प्रथम खंड पर रंजना पाठक द्वितीय खंड पर अमर सिंह और तृतीय खंड पर मुरली कृष्ण कॉल प्रभारी अधिकारी होंगे । सांसद गुप्ता ने बताया कि तुलाई के दौरान भुगतान की प्रक्रिया उसी प्रकार रहेगी जो पहले से दिशा-निर्देश पाए हैं, जिसमें ओवन टेस्टिंग प्रथम प्रक्रिया है। यह एक निर्धारित तापमान पर प्रारंभिक जांच को आधार मानकर किसान को 90 प्रतिशत का भुगतान कर दिया जाता है और शेष बचा हुआ भुगतान फाइनल टेस्टिंग के पश्चात ही किया जाता है जो कि वर्तमान में नीमच एल्को लाइट फैक्ट्री में किया जाता है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सांसद गुप्ता ने जल्द भुगतान पर टेस्टिंग को सरलीकरण की बात रखी थी। परंतु अफीम क्वालिटी में विश्वास और मानक का बड़ा प्रश्न खड़ा हो जाता है, इस कारण यह टेस्टिंग भुगतान हेतु जरूरी मानी गई। हालांकि अंतिम भुगतान के फैक्ट्री लैब में की जाने वाली अंतिम रिपोर्ट ही मान्य होती है। साथ ही सांसद गुप्ता ने वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी किसान भाइयों से यह भी अपील की है कि वह कोरोना संक्रमण को देखते हुए विभाग द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करेंगे और फिजिकल डिस्टेंसिंग का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे।

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