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अयोध्या केस: इस्माइल फारूकी केस में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया 2-1 के बहुमत से फैसला, जस्टिस नजीर का था अलग रुख

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद से जुड़े 1994 के इस्माइल फारूकी केस में गुरुवार को अहम फैसला सुनाया। दो-एक के बहुमत से सुनाए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को वृहद पीठ के पास नहीं भेजेगा और उसके इस फैसले का असर मुख्य विवाद टाइटिल सूट पर नहीं होगा। कोर्ट ने 1994 के अपने फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने अपने इस फैसले में कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। मुस्लिम पक्षकारों ने कोर्ट से अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी।

  1. 1994 के इस्माइल फारूकी केस में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की संवैधानिक पीठ ने दो-एक के बहुमत से अपना फैसला सुनाया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस भूषण ने अपने फैसले में कहा कि इस केस को वृहद पीठ के पास नहीं भेजा जाएगा। जबकि जस्टिस एस नजीर ने दोनों जजों से अलग रुख रखते हुए अपने फैसले में कहा कि इसे वृहद पीठ के समक्ष भेजा जाना चाहिए।
  2. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्य मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि वह 29 अक्टूबर से अयोध्या मामले की सुनवाई विषय के गुण एवं दोष के आधार पर करेगा। कोर्ट का आज का फैसला मुस्लिम समुदाय के लिए एक झटका है क्योंकि कोर्ट ने 1994 के अपने फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में कहा था कि ‘नमाज मस्जिद का हिस्सा नहीं है।’
  3. हालांकि जस्टिस नजीर ने बहुमत के फैसले से हटकर अपनी अलग राय रखी। जस्टिस नजीर ने कहा कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है कि नहीं इस पर निर्णय धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए और इस पर व्यापक रूप से विचार करने की जरूरत है।
  4. सुप्रीम कोर्ट यदि 1994 के अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए यदि वृहद पीठ के समक्ष भेज देता तो मुख्य मामले टाइटिल सूट यानी राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई लंबे समय तक अटक जाती लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्य मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
  5. कोर्ट के इस फैसले का विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण से जुड़ी एक बड़ी बाधा समाप्त हो गई है। अब यह साफ है कि बिना किसी तकनीकी पेंच के इस मामले की सुनवाई अदालत में होगी।
  6. मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कहा कि बहुमत का फैसला बहुमत को खुश करेगा। अगर यही फैसला अल्पमत के पक्ष में होता तो वे खुश होते लेकिन एक बड़ी समस्या जो सामने है उसका समाधान नहीं किया गया है।
  7. भाजपा नेता विनय कटियार ने कहा अदालत के फैसले से साफ है कि कुछ लोग जान-बूझकर राम मंदिर की राह में रोड़ा बने हुए हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले ही साफ कर दिया था कि अयोध्या में रामलला विराजते हैं और हम उस फैसले की तस्दीक करते हैं। उन्होंने अदालत से टाइटिल सूट मामले में जल्द से जल्द न्याय करने की अपील की।

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