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आंखो व स्कीन का रखें ध्यान, प्राकृतिक रंगों से खेले होली

इस तरह बना सकते है प्राकृतिक रंग
– नारंगी रंग बनाने के लिए रात भर मेहंदी की पत्तियों को पानी में डालकर छोड़ दें और सुबह उस पानी से होली खेलें।
– गहरा गुलाबी रंग (मैजेंटा) बनाने के लिए चुकंदर के कुछ टुकड़ों को एक कप पानी में उबाल लीजिए और फिर अगले दिन इससे होली खेलें।
– पीला रंग बनाने के लिए लाल रंग के फूलों को पानी में भिगो दे इससे पानी का रंग हल्के पीले रंग का हो जाएगा।
– हरा रंग बनाने के लिए पालक को पानी में भिगों दीजिए और फिर रंग हरा हो जाने पर उस पानी से होली खेलें।
– नीला रंग बनाने के लिए ब्लूबेरी के रस का इस्तेमाल कीजिए।
– केसरिया रंग बनाने के लिए पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इस केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लाएंं।
– अगर सूखे रंग से होली खेलना हो तो चावल के आटे में फूड कलर मिला लीजिए और इसमें दो छोटा चम्मच पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे सूखने के लिए छोड़ दें और फिर इसे मिक्सर में पीस लीजिए, इससे यह पाउडर बन जाएगा और इससे होली खेलें।

राशि अनुसार यूं कर सकते हैरंगो का चयन
– मेष राशि के जातक का आग से नजदीकी रिश्ता होता है। इसीलिए लाल, हरे और गुलाबी रंग का प्रयोग करना लाभकारी होगा।
– वृषभ राशि के लोग सीधे तौर पर धरती से जुड़े होते हैं। इसीलिए नीले, हरे और रोज-पिंक शेड से होली खेलते हैं तो सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।
– मिथुन राशि के जातकों की उत्पत्ति का मूल “वायु” में समाया होता है। इसीलिए पीले, सिल्वर और सफेद रंगों का इस्तेमाल लाभकारी है।
– कर्क राशि का मूल तत्व पानी होता है। इसके चलते पीला, नीला, सिल्वर, मोतिया और चमकीले सफेद रंगों का इस्तेमाल तरक्की की राह पर ले जाएगा।
– अग्नि तत्व की अधिकता वाली सिंह राशि वाले सुनहरा, चटख लाल और तांबई लाल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हल्के पीले रंग का गुलाल लगाने से गुस्से में कमी आएगी।
– कन्या राशि का भी जुड़ाव पृथ्वी से होता है। इसी लिए ब्राउन, नेवी ब्लू, पीला और हल्का गुलाबी और गहरे लाल रंग इनके लिए लाभकारी होंगे।
– तुला राशि के लोगों का मूल तत्व हवा होती है। आसमानी और ब्लू रंग से होली खेलने के बाद शरीर की तमाम व्याधियां मिट जाएगी।
– वृश्चिक राशि को भी जल तत्व मजबूती देता है। इसीलिए लाल और स्टोन ग्रे के गहरे शेड का इस्तेमाल करने से काफी लाभ होगा।
– धनु राशि के लोगों को बैंगनी, सिंदूरी बुलबुल और लाइलैक रंग का इस्तेमाल लाभकारी रहेगा। केमीकल रंग लगाने की जगह केसर का टीका करें।
– मकर राशि का धरती से नाता होता है। इसीलिए इस राशि के जातक काले रंग के साथ गहरे धूसर रंग का प्रयोग करें। इससे मन की कडवाहट दूर होगी।
– जल तत्व वाली कुंभ राशि के जातक इंद्रधनुष में आने वाले सभी रंगों का इस्तेमाल कर अपनी होली को बेहतरीन बना सकते हैं।
– मीन राशि का भी सीधा संबंध पानी से होता है। मछली से जुड़े होने के कारण समुद्री हरा और बैंगनी रंग का इस्तेमाल करें। यह आपको सकारात्मक ऊर्जा देंगे।

रंगों के प्रभाव और बचाव के उपाय
– होली खेलने के दौरान आंखों को चश्मे से ढंक कर रखे। इसके लिए बाजार में मिलने वाले किसी भी धूप चश्मे का प्रयोग किया जा सकता है।
– रंग लगवाते वक्त आंखों को बंद रखें। दूसरों से यह निवेदन करें कि आंखों के आसपास के क्षेत्र में रंग न लगाएं और स्वयं भी ऐसा ही करें।
– होली के दौरान जब कार चला रहे हों तब कार की खिड़कियां बंद कर दें। इससे बाहर से फेंके जाने वाले पानी के गुब्बारे, गीले रंगों का घोल और सामान आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।
– रंग की वजह से आंख में खुजली और दर्द की शिकायत हो सकती है। तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
– रंग से अधिक संक्रमण होने पर आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है।

चिकित्सक का कहना…
केमिकल युक्त रंगों से कईनुकसान है, यह रंग आंखों के अंदर जाने से वह ऊपर काली पुतली को जला देते हैं, वह सफेद हो जाती है। इससे मरीजों को नजर आना कम होने लगता है। गीले या सूखा कोई भी रंग हो, अंदर जाने से नुकसान और केमिकल खाल जला देता है जो कि नुकसानदायक है। अगर आंखों में रंग गिर जाए तो खुले व स्वच्छ पानी से आंखों को धोएं और तब तक अगर दर्द निरंतर बना रहता है, तो बिना देरी किए आंखों के डॉक्टर को जरूर दिखाएं। गुब्बारे मारने की परंपरा जो चल पड़ी है, उससे आंख पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सकती है। आंखों की रोशनी पूरी तरह जाने का भय बना रहता है।

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