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उपयोग बढऩे के साथ भारी होता जाएगा बिल

भोपाल. सस्ती बिजली का भार अब समय पर बिल जमा करने वाले अन्य उपभोक्ताओं पर डालने की कवायद जारी है। 2020-21 के लिए बिजली का प्रस्तावित टैरिफ में सामान्य तौर पर प्रति यूनिट 30 पैसे की बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन छुपे चार्ज बिजली की दर बढ़ा देंगे। दरअसल, बिजली कंपनी ने मप्र विद्युत नियामक आयोग को टैरिफ बढ़ाने का जो लेखा-जोखा दिया है, उसके तहत वह अपने 627 करोड़ रुपए के घाटे की पूर्ति चाहती है। बीते वित्त वर्ष में भी इसी तरह से टैरिफ बढ़ाया था। शासन की 100 यूनिट तक 100 रुपए बिल की योजना से कंपनी को काफी नुकसान हुआ। सब्सिडी की राशि मप्र शासन से उसे लेना है, लेकिन नए टैरिफ में 100 यूनिट से अधिक खपत वालों से अच्छी वसूली की तैयारी है। ऊर्जा विभाग के एसीएस मोहम्मद सुलेमान के अनुसार टैरिफ पब्लिक फोरम पर है। सुनवाई के बाद लागू करेंगे।

ऐसे बढ़ेगा बोझ
100 यूनिट से अधिक पर आधार दर 6.60 प्रति यूनिट रखी है। 125 यूनिट पर 90 रुपए फिक्सचार्ज जुड़ेंगे। ये प्रति यूनिट 72 पैसे पड़ेगा। इसके बाद हर 15 यूनिट के बाद अतिरिक्त 27 रुपए जुड़ जाएंगे। ये प्रतियूनिट 1.80 रुपए पड़ेंगे। ऐसे में 200 यूनिट खपत पर एक यूनिट पौने नौ रुपए पड़ेगी।

कंपनी का खर्च बढ़ा
मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने खर्चों में भी मोटी रकम बढ़वाई है। कंपनी की रिपोर्ट ही देखें तो दो साल में ही खर्चों में करीब साढ़े चार सौ करोड़ रुपए बढ़ा दिए हैं। 2019 में खर्चे 881.97 करोड़ रुपए थे, लेकिन 2021 के लिए ये राशि 1331 करोड़ रुपए तय की गई।

ऐसे समझें मध्य क्षेत्र कंपनी का गणित

  • 627 करोड़ रुपए का घाटा
  • 12 हजार 913 करोड रुपए की जरूरत है बिजली कंपनी को
  • 17 त्न लाइन लॉस प्रस्तावित है।
  • 1331 करोड़ रुपए कंपनी के कर्मचारियों का ही खर्च है।

मेंटेनेंस पर बड़ा खर्च
लाइन का मेंटेनेंस भी बड़ा खर्च है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 11 हजार 435 करोड़ रुपए की राशि मेंटेनेंस के लिए रखी है। इतना ही नहीं, कंपनी ने जाहिर किया है कि उसके 388 करोड़ रुपए के संसाधनों की कीमत कम हुई।

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