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कुचड़ौद के निजी स्कूल की मान्यता आठवीं तक और पढाया जा रहा 12वीं तक

शिकायत के बाद कलेक्टर ने बनाया दल लेकिन अब तक नहीं हुई जांच

मंदसौर। आज के समय में शिक्षा को शिक्षा माफियाओं द्वारा अपने स्वार्थ के चलते पूरी तरह से व्यवसाय बना दिया गया है। निजी स्कूल फीस लें, किताबों, यूनिफार्म में कमीशन ने यहां तो ठीक था क्योंकि अभिभावकों को अपनी मजबूरियां होती है। लेकिन जिले के मल्हारगढ़ तहसील के ग्राम कुचड़ोद में तो एक निजी स्कूल ने हद ही कर दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुचड़ौद के मॉडर्न पब्लिक स्कूल के संचालक के पास आठवीं तक की मान्यता ही है। लेकिन स्कूल संचालक स्कूल में कक्षा 9वीं से लेकर 12 वीं तक की कक्षाएं भी बिना मापदंड के संचालित कर रहा है। परिक्षा के लिए स्कूल संचालक अपने यहां भर्ती कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अन्य स्कूल से अनुबंध कर रखा है जो कि नियमों के विरूद्ध है। इतना ही नहीं स्कूल के पास न तो नियमानुसार खेल मैदान है ओर नहीं लायब्रेंरी फिर भी जिम्मेदारों ने स्कूल को आठवीं तक की मान्यता दे रखी है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के उदासिन रवैये के कारण स्कूल के संचालक ने अपने यहां 12 वीं तक की कक्षाएं बिना अनुमति के ही प्रारंभ कर दी। जिसकी शिकायत ग्राम के ही एक जागरूक व्यक्ति द्वारा कलेक्टर कार्यालय में की थी। जिसके बाद कलेक्टर मनोज पुष्प द्वारा 5 मार्च 2020 को एक पत्र जारी कर जांच दल का गठन किया था। जांच दल में अनुविभागीय अधिकारी मंदसौर अंकिता प्रजापति, जिला परियोजना प्रबंधक अनिल मारवी और खण्ड स्तोत्र शिक्षा समन्वयक जनपद शिक्षा केन्द्र मंदसौर विनोद शर्मा को शामिल किया गया था। जिन्हें जांच करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। लेकिन अधिकारियों की उदासिनता की वजह से आज तक जांच नहीं हो सकी है। आज अधिकारी जांच न होने का कारण कोरोना के कारण व्यवस्तता बता रहे है। लेकिन जांच दल को पत्र 5 मार्च को जारी किया गया था और लॉकडाउन 22 मार्च से प्रारंभ हुआ। जबकि जांच करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था लेकिन फिर भी जांच दल के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था।

इस संबंध मंे जिला पंचायत सीईओ रिषव गुप्ता ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच दल भी गठित हुआ हे तो जांच तो होना ही है। जब दल गठित हुआ था तब होली का माहौल चल रहा था उसके तुरंत बाद कोरोना से संबंधित बैठके चालू हो गई। पूरा प्रशासन कोरोना की रोकथा में लगा हुआ था आज भी लगा है ऐसे में जांच नहीं हो पाई। शिघ्र ही जांच संबंधित अधिकारियों से करवाकर पूर्ण की जायेगी।

इस संबंध में मॉर्डन स्कूल संचालक से भी उनका पक्ष जानना चाहा गया लेकिन उनका फोन बंद आता रहा।

चरित्रवान नहीं चरित्रहीन विद्यार्थी किए जा रहे तैयार

कुचड़ौद के मार्डन पब्लिक स्कूल जो कि नियमों के विरूद्ध स्कूल संचालित कर रहा है और जिसके विरूद्ध जांच दल भी गठित है। इस स्कूल के विद्यार्थी चरित्रहीन भी है। विगत दिनों इस स्कूल के विद्यार्थियों ने एक युवति के अश्लील फोटो वायरल कर दिए थे जिसकी पुलिस में शिकायत की गई थी पुलिस ने स्कूल के चार चरित्रहीन विद्यार्थियों को गिरफ्तार जेल भेजा था। अब समझा जा सकता है कि शिक्षा का मंदिर कहें जाने वाले विद्यालय में किस प्रकार की शिक्षा दी जा रही है।

अधिकारियों की उदासिनता के कारण बल मिलता है माफियाओं को

कुछ भी गलत या नियमों के विरूद्ध होने पर एक सिस्टम के तहत संवैधानिक तरीके से कार्यवाही होती है। जिसका अधिकार शासन ने नौकरशाहों याने की अधिकारियों को दिया है। लेकिन अधिकारियांे की उदासिनता और समय पर जांच न करना जांच में ढिलाई बरतने से माफियाओं के हौंसले बुलंद होते है। हाल ही में मंदसौर में नगर में एक पुस्तक माफिया पर लगातार शिकायत होने के बाद दिखावटी कार्यवाही की गई थी। कलेक्टर ने भी निजी स्कूलों के लिए धारा 188 लागू कर दि थी जिसकेे तहत विद्यालय अभिभावकों को पढ़ाई के कोर्स की किताबें किसी एक दुकान से लेने का दबाव नहीं बना सकते थे। लेकिन इसका भी कोई प्रभाव नहीं दिखा और आज भी नगर के कई निजी स्कूलों की किताबें सिर्फ स्टेशन रोड़ स्थित सकलेचा स्टेशनरी मार्ट पर ही मिल रही है। अभिभावकों के अनुसार जिन किताबों की किमतें एक हजार रूपये भी नहीं है वह 6 से 7 हजार रूपये तक में दि जा रही है। लेकिन प्रशासन के अधिकारी यहां भी मौन ही है।

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