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कोरोना वायरस : मांसाहार से दूरी के चलते जिले में 70 हजार से अधिक मुर्गो को नष्ट किया

मंदसौर. कोरोना वायरस के सक्रमण को लेकर तरह तरह की अफवाहें चल रही है। जिसमें एक बात यह भी फेली है कि मांसाहार खासकर चिकन से ये फैलता है। हकीकत जो भी है लेकिन इस अफवाह ने पोल्ट्रीफार्म के कारोबार को ठप कर दिया है। पोल्ट्री फार्म संचालकों की हालत यह कि उनके पास मुर्गियों को खिलाने के दाने तक के पैसों का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है। इसके चलते वे या तो मुर्गियों को खेतों में छोड़ रहे हैं या उन्हें जिंदा दफना रहे हैं।

जेसीबी से गडढे खोदकर जिंदा दफना रहे
क्षेत्र में अधिकांश पोल्ट्री फार्म संचालकों ने सारी मुर्गियों को जेसीबी से गडढा खोदकर दफना दिया है। इसके पिछे फार्म संचालक कारण यह बता रह हैें कि उनका अधिकांश कारोबार रोड पर बने ढाबों के भरोसे चलते थे। जो कि लॉक डाउन के चलते पूरी तरह से बंद है। इसके अलावा सीमाएं पूरी तरह से सील हो चुकी है। जिससे मुर्गियों का निर्यात भी नहीं किया जा रहा है। इसके चलते पोल्ट्री फार्म संचालकों के पास मुर्गियों का भारी भंडारण हो गया है। अब इस भंडारण के चलते फार्म संचालकों की मुसिबत और अधिक बढ़ गई है। गरोठ के फार्म संचालक नासिर कुरैशी ने बताया उन्होंने तीन हजार मुर्गे सोमवार को ही उन्होंने जिंदा दफन कर दिए।

जिले में 70 हजार से अधिक मुर्गो को नष्ट किया
नष्टीकरण का यह काम पूरे जिले में हो रहा है। पोल्ट्री फार्म संचालक मुर्गों को इसी तरह नष्ट कर रहे हैं। विगत दिनों गरोठ के बोलिया क्षेत्र में भी करीब 30 हजार मुर्गों को इसी तरह से नष्ट किया गया है। और यह प्रक्रिया जारी है। जिले में 70 हजार से अधिक मुर्गो को नष्ट किया जा चुका है क्योंकि मुर्गों की संख्या फार्म पर लगातार बढृ रही है और बिक्री हो नहीं रही है। इसके चलते फार्म संचालकों को उन्हें दाना खिलाना पड़ रहा है। छोटे से छोटे किसान को भी करीब तीन हजार रुपए तक मुर्गों के दानापानी पर खर्च करना पड़ रहा है।

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