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क्या मंदसौर जिले को मिलेंगे तीन मंत्री पद

भोपाल। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भले ही 14 अप्रैल तक टोटल लॉक-डाउन का ऐलान कर दिया हो लेकिन राजनीति की शतरंज तो इंडोर गेम है। सेल्फ क्वॉरेंटाइन यहां तक कि अस्पताल में आइसोलेटेड नेता भी शह और मात का खेल ही लेते हैं। मध्यप्रदेश में इन दिनों यह तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ले ली लेकिन मंत्रिमंडल का गठन होना जरूरी है। इसीलिए सभी दावेदार अपने-अपने सेफ हाउस में बैठकर अपनी सीट सुरक्षित करने में लगे हुए हैं।

मध्य प्रदेश में पहली बार 2 डिप्टी सीएम का फार्मूला

किसी भी स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है परंतु कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पहली बार दो उप मुख्यमंत्रियों का फॉर्मूला लागू होगा। एक डिप्टी सीएम बीजेपी की तरफ से आएगा जबकि दूसरे का नाम जय विलास पैलेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा फाइनल किया जाएगा। ग्वालियर का जय विलास पैलेस, पहले की तरह ग्वालियर संभाग का सचिवालय बना रहेगा।

भाजपा की तरफ से मंत्री पद के दावेदार

गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रामपाल सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, विजय शाह, अजय विश्नोई, राजेन्द्र शुक्ला, गौरीशंकर बिसेन, संजय पाठक, पारस जैन, जगदीश देवडा, विश्वास सारंग, हरिशंकर खटीक, मीना सिंह, प्रदीप लारिया, अरविंद भदौरिया, ओम प्रकाश सकलेचा, बृजेन्द्र प्रताप सिंह, रमेश मेंदोला, जालम सिंह पटेल, मालिनी गौड़, गोपीलाल जाटव, नीना वर्मा, कुंवर सिंह टेकाम, यशपाल सिंह सिसोदिया, केदार शुक्ला, रामोलावन पटेल, मोहन यादव, पंचूलाल, दिव्यराज सिंह आदि नाम शामिल है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीम से मंत्री पद के दावेदार

सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि चुनाव लड़ने से पहले इन्हें मंत्री बना दिया जाएगा। इनमें बिसाहूलाल सिंह, गोविन्द सिंह राजपूत, डा.प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, एदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग का नाम शामिल है।

सपा-बसपा और निर्दलीयों पर भी विचार

मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के बहुमत में आते ही सपा-बसपा और निर्दलीय विधायकों ने उसे समर्थन दे दिया है। रामबाई परिहार, संजीव सिंह, राजेश शुक्ला, प्रदीप जायसवाल समर्थन का ऐलान कर चुके हैं। मध्यप्रदेश में कमलनाथ का तख्तापलट करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा सभी विधायकों को मंत्री पद का वादा कर चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इनके नाम पर भी विचार कर रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष के लिए सीताशरण निर्विरोध नहीं

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से डॉ सीताशरण शर्मा विधानसभा अध्यक्ष के लिए आरक्षित नाम है परंतु इस बार वह निर्विरोध नहीं है। सीधी के वरिष्ठ विधायक श्री केदार शुक्ला उनके मुख्य प्रतिद्वंदी हैं। डॉ सीताशरण शर्मा के पास विधान सभा संचालन का अच्छा अनुभव है परंतु होशंगाबाद में डॉ सीताशरण शर्मा एक विवादित नाम भी है। केदार शुक्ला के नाम पर आम सहमति बन सकती है।

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