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जाने किसानों पर किसने चलाई थी गोलियां ?

मंदसौर। किसानों की मौत के दस दिन बाद सीआरपीएफ ने भी अब आखिरकार मान ही लिया कि हाईवे स्थित बहीपार्श्वनाथ के पास जो गोलियां किसानों पर दागी गईं थीं वे सीआरपीएफ की ही थीं। थाने के सामने वाली गोलियां पुलिस की थीं। इस घटना में बहीपार्श्वनाथ में चार और थाने के सामने एक किसान की मौत हुई थी।

एक समाचार पत्र से विशेष चर्चा में डीआईजी राजीवरंजन कुमार ने बताया कि मंदसौर में स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने सीआरपीएफ को बुलाया था। बहीपार्श्वनाथ के पास 2500 किसानों ने सीआरपीएफ जवानों को घेर लिया था। बचने के लिए जवानों ने गोलियां चला दीं। इससे पहले गृहमंत्री भूपेंद्रसिंह ने भी बड़ी मुश्किल से स्वीकार किया था कि किसानों की मौत पुलिस की गोलियो से हुई है। हालांकि मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश देकर टीम गठित की है। साथ ही यह भी कहा है कि कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। डीआईजी राजीवरंजन ने कहा सरकार न्यायिक जांच करा रही है। हम भी अपने स्तर पर जांच करवा रहे हैं। जवानों ने किसानों के हमले से बचने व रक्षा के लिए गोलियां चलाई तब तो ठीक है अन्यथा उन पर कार्रवाई की जाएगी।

गोली लगने की घटना में कुल 5 लोगों की हुई थी मौत :- बहीपार्श्वनाथ के पास जो गोलियां चली थीं उससे कन्हैयालाल पाटीदार, पूनमचंद उर्फ बबलू पाटीदार, सत्यनारायण गायरी, चैनराम पाटीदार की मौत हुई थी। थाने के सामने गोली लगने से अभिषेक पाटीदार ने दम तोड़ा था। पुलिस अभिरक्षा में घनश्याम धाकड़ की मौत हुई थी। पूरे घटनाक्रम के दौरान आठ लोग घायल हुए थे।

एक सदस्यीय आयोग करेगा जांच : घटना की जांच के लिए सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में एक-सदस्यीय आयोग गठित किया है। जो जांचकर रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे।

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