तैलिया तालाब पर भू माफिया नहीं, जल ही करेगा अठखेलियां!

प्रशासन आला अधिकारी पहुंचे तैलिया तालाब किया निरीक्षण

तालाब पर हुए रसूखदारों का अतिक्रमण हटें तो बात बनें

मंदसौर। शनिवार को जिले के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ने नगर के प्रमुख पिकनिक स्पॉट और चारों ओर से रसूखदारों के कब्जे से घिरे तैलिया तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे। तेलिया तालाब की डूब क्षेत्र की जमीन और उस पर लगातार हो रहे निर्माण व भराव से जलभराव क्षेत्र लगातार कम हो रहा है। अभी भी खेतों में मिट्टी का भराव लगातार जारी है। शनिवार को कलेक्टर मनोज पुष्प, एसपी हितेश चौधरी ने नपा अमले को साथ लेकर तालाब का चारों तरफ से निरीक्षण भी किया। पिकनिक स्पॉट से कन्या महाविद्यालय के पीछे स्थित सांसद सुधीर गुप्ता के खेत पर अमला पहुंचा। वहां चल रहा भराव कार्य व सड़क व नाले की तरफ अस्थायी दीवार निर्माण भी देखा। इसके अलावा ऋषियानंद उद्यान की हालत देखकर सीएमओ को फटकार भी लगाई कि एक अच्छा-खासा बगीचा है उसे भी संभाल नहीं सकते हो।

शहर में कुछ दिनों से तस्करों व अपराधियों के भवनों पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई के बाद अब शनिवार को कलेक्टर मनोज पुष्प व एसपी हितेश चौधरी ने तेलिया तालाब की तरफ रुख किया। तालाब व नाले की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायते लगातार चल ही रही है। इसके अलावा तालाब के एमडब्ल्यूएल व एफटीएल के अंदर भी कॉलोनी निर्माण हो गया है। तालाब की जमीन को देखने के लिए पहुंचे कलेक्टर व एसपी ने तेलिया तालाब पिकनिक स्पॉट से निरीक्षण शुरू किया। पिकनिक स्पॉट पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ ही नगर पालिका की सीएमओ से भी तालाब की जानकारी चाही तो दोनों ही सही नहीं बता पाए। इसके बाद नपा के उपयंत्री बीबी गुप्ता ने तालाब के डूब क्षेत्र में आने वाली निजी व सरकारी जमीनों की जानकारी दी। वहीं यह भी बताया कि कुछ लोगों ने डूब क्षेत्र होने के बावजूद जमीनें ऊपर उठा ली है। इसके बाद अमला कन्या महाविद्यालय के पीछे स्थित खेतों में चल रहे भराव कार्य को देखने भी गया। यहां एक खेत में चारों तरफ सड़क बना दी गई है। वहीं तालाब की सीमा की तरफ पत्थर की दीवार बनाकर तार फेंसिंग भी की गई है। इसके अलावा डूब क्षेत्र में होने के बावजूद खेत को इतना ऊंचा उठा लिया गया है कि कॉलेज तरफ से आने वाला बरसात का पानी भी अब तालाब में नहीं जा पाएगा।

शनिवार को कलेक्टर मनोज पुष्प, जिला पुलिस अधीक्षक हितेश चौधरी, एसडीएम अंकिता प्रजापति, सीएमओं सविता प्रधान गौड़, राजस्व निरीक्षक विकास चौहान, नपा के इंजीनियर और अधिकारियों सभी एक साथ तैलिया तालाब के पिकनिक स्पॉट वाले स्थल पर पंहुचे है। यही पर कलेक्टर श्री पुष्प ने पूरे तालाब का नक्क्षा देखा और कहां – कहां अतिक्रमण है उन्हें चिन्हित करने की बात कही।

निरीक्षण के बाद कलेक्टर श्री पुष्प ने बताया कि तालाब की भूमि को लेकर कई समस्याएं है जिन्हें समझा जा रहा है। हमारा उद्देश्य हैं कि यह नगर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट है यहां अपार संभावनाएं है जिन्हें विकसित किया जाना है। वर्तमान में इसका एक ही छोर है हमारा प्रयास है कि तालाब के तीन से चार छोर हो ताकि ट्रेफिक की समस्या भी नहीं रहे। वहीं यहां पर साइकिल ट्रेक, अच्छे झूले की भी व्यवस्था के बारे में सोचा जा रहा है। वहीं तालाब की भूमि पर हुए अतिक्रमण की समस्या है उसे भी हल किया जाएगा।

484 बीघा में फैला था तालाब, सिमटकर रह गया 200 बीघा

नगर के 80 प्रतिशत क्षेत्रफल में भू – जलसंवर्द्धन का कार्य करने वाला जो कि 484 बीघा में फैला हुआ था। जिसमें भरी अपार जल संपदा हर किसी को आर्कषित करती थी। वहीं इस तालाब ने नगर के भू – जलस्तर को हमेशा बनाए रखा। लेकिन राजनेता, भू माफिया एवं कुछ अधिकारियों ने गठबंधन के चलते यह तैलिया तालाब सिमटकर 200 बीघा में ही रह गया है। लगभग 284 बीघा तालाब की जमीन पर इस समय जल अटखेलियां नहीं कर रहा है बल्कि भूमाफिया इस पर नृत्य कर रहे है। अनेकों बार मीडिया में यह मामला उछला हमेशा जांच की मांग कर मामले को ठंडा ही कर दिया गया। लेकिन हाल ही में कमलनाथ की सरकार के निदेश के बाद जिले के कलेक्टर एवं जिला पुलिस अधीक्षक ने जिस गति व ईमानदारी से भूमाफियाओं पर शिकंजा कसा है उससे तो यह तय हो गया है कि अब वह दिन दूर नहीं है जब तैलिया तालाब पुनः अपने स्वरूप में लौटेगा ही। तैलिया तालाब पर हुए अतिक्रमण को लेकर राजनेताओं के कब्जे की बातें भी चौक चौराहों पर होती रही है। लेकिन पिछली सरकार ने इन चर्चाओं को कोई महत्व नहीं दिया गया। शायद अब तैलिया तालाब पर निश्चित रूप से शासन – प्रशासन अपना ध्यान केन्द्रित करेगा।

तेज गति से नाले और तेलिया तालाब पर कार्रवाई क्यो नहीं?

पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा नें नूरी कॉम्पलेक्स प्रकरण में त्वरित कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी है और साथ ही सवाल किया है कि तेलिया तालाब, नाला अतिक्रमण, खनिज प्रकरणों में उस गति से कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी है। निश्चित समयावधि में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की राह पकड़ेंगें। नूरी कॉम्पलेक्स वाले मामले में जिला प्रशासन ने वर्षों पुराने उलझे हुए प्रकरण में तकनीकी मुद्दों का आंकलन कर तथा निर्णय के लिए उत्तरदायित्व ग्रहण करते हुए जिस गति से निर्णय लिया है इसका समर्थन करते है। अब तेलिया तालाब, नालों पर अतिक्रमण, खनिज रायल्टी की चोरी जैसे प्रकरणों में भी ऐसी ही प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जिला प्रशासन से जनता करती है। इन प्रकरणों का मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा से कोई संबंध नहीं है। वर्षों पूर्व पिछली सरकार द्वारा नालों की सीमांकन का आदेश दिया था। उसी सरकार में मंदसौर के जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई नहीं होने दी। परंतु विगत एक वर्ष में कोई कारण नहीं था कि कार्यवाही नहीं होती। तेलिया तालाब मंदसौर शहर की जीवन रेखा है और जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। खनिज रायल्टी की चोरी में जो दोषी व्यक्ति जेल गए प्रशासन उनके साथ खड़ा नजर आ रहा है। पिछले दिनों जिला प्रशासन द्वारा खनिज रायल्टी के पुर्नमूल्यांकन एवं चोरी रोकने हेतु कमेटी का गठन किया गया है। जो अधिकारी इस तरह के प्रकरणों में सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा इन कार्यवाहियों को संरक्षण देते रहे हैं वह किस तरह की जांच करेंगे। इसकी कल्पना की जा सकती है। जिन 14 व्यक्तियों को नियमों के विरूद्घ निर्माण करने के लिए नगर पालिका द्वारा नोटिस दिए गए थे उन पर क्या कार्रवाई हुई।

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