निर्भया के गुनहगारों के खिलाफ डेथ वारंट जारी, 22 जनवरी को दी जाएगी फांसी

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोषियों को कानून से संबंधित सभी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 7 जनवरी 2020 तक की मोहलत दी थी और निर्भया के दोषियों को नोटिस देकर ये जानने की कोशिश की थी कि क्या वह अपने अपराध के लिए दया याचिका दाखिल करेगें?
निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या के दोषियों की डेथ वारंट पर पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया है। चारों दोषियों को 22 जनवरी को सात बजे फांसी दी जाएगी। मामले में मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता को फांसी दी जानी है।

दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि मेरी बेटी को न्याय मिला है। 4 दोषियों की सजा देश की महिलाओं को सशक्त बनाएगी। इस फैसले से न्यायिक प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत होगा।

वर्ष 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड मामले के चार दोषियों को 22 जनवरी को सुबह सात बजे यहां स्थित तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। चारों दोषियों-मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) के खिलाफ मौत का फरमान जारी करने वाले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने फांसी के आदेश की घोषणा की। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने कहा कि अब किसी भी दोषी की कोई भी याचिका किसी भी अदालत या राष्ट्रपति के समक्ष लंबित नहीं है और सभी दोषियों की पुनर्विचार याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दी थी।

अदालत से मृत्यु वारंट जारी करने का आग्रह करते हुए अभियोजन ने कहा, ‘‘मृत्यु वारंट जारी करने और तामील करने के बीच दोषी सुधारात्मक याचिका दायर करना चाहते हैं तो कर सकते हैं।’’ दो दोषियों-मुकेश और विनय के वकील ने कहा कि वे उच्चतम न्यायालय में सुधारात्मक याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं। उधर, निर्भया की मां ने दोषियों की फांसी की सजा की तिथि मुकर्रर किए जाने के बाद कहा कि यह आदेश (मौत की सजा पर अमल के लिए) कानून में महिलाओं के विश्वास को बहाल करेगा। निचली अदालत ने पूर्व में तिहाड़ जेल के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे मौत की सजा का सामना कर रहे चारों दोषियों से एक सप्ताह के भीतर यह जवाब हासिल करें कि क्या वे फांसी की सजा के खिलाफ राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर रहे हैं।

अदालत निर्भया के माता-पिता और अभियोजन (दिल्ली सरकार) के आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी जिनमें दोषियों के खिलाफ मृत्यु वारंट जारी करने की मांग की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने 18 दिसंबर को अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि पुनर्विचार याचिका बार-बार अपील पर फिर से सुनवाई की तरह नहीं है।  वर्ष 2012 में 16 दिसंबर की रात दक्षिणी दिल्ली में छह लोगों ने चलती बस में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया था और उस पर बर्बर हमला किया गया था। इसके बाद उन्होंने उसे सड़क पर फेंक दिया था। लड़की की गंभीर हालत के चलते उसे सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया था जहां 29 दिसंबर 2012 को उसने दम तोड़ दिया था।

इस लड़की को काल्पनिक नाम ‘निर्भया’ से जाना गया था।  शीर्ष अदालत ने पिछले साल नौ जुलाई को मामले के अन्य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि दोषियों ने 2017 के निर्णय की समीक्षा के लिए कोई आधार नहीं दिया। दोषियों में से एक राम सिंह ने दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। मामले के दोषियों में एक नाबालिग भी था, जिसे तीन साल तक बाल सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था। दोषियों को निचली अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए मृत्युदंड को उच्चतम न्यायालय ने 2017 में अपने निर्णय में बरकरार रखा था।

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