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प्रतिबंधित होने के बाद भी नगर में खुलेआम बिक रही अमानक पॉलीथिन

मंदसौर। प्रतिबंधित होने के बावजूद व्यापरियों द्वारा नगर में अमानक पॉलीथिन का उपयोग जमकर किया जा रहा है। प्रतिबंधित पॉलीथिन का प्रयोग हर क्षेत्र में आम बात हो गई है और धंधे बाजों को इसमें खासा मुनाफा होने के कारण आसानी से इस पर रोक लगाना संभव नहीं हैं। इसका मुख्य कारण है कि स्थानीय प्रशासन के द्वारा आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि बाजार में अमानक पॉलीथिन बिकने पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश प्रदेश सरकार को दिए थे। वहीं प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन को अंकुश लगाने एवं कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। लेकिन बावजूद इसके सरेआम अमानक पॉलीथिन बिक रही है।

केंद्र सरकार ने 40 माईक्रान से कम मोटाई वाली अमानक पॉलीथिन पर प्रतिबंध तो लगा दिया है। पर शहर में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। शहर में अभी भी 15 से अधिक थोक व्यापारी प्रतिदिन 2 क्विंटल अमानक पॉलीथिन का विक्रय कर रहे हैं। पर नपा में इसके लिए बनाए गए नोडल अधिकारी ने कभी भी झांककर नहीं देख रहे हैं। नगर पालिका भी शहर को स्वच्छ करने के बजाय इसका खजाना खाली करने में ज्यादा विश्वास कर रही है। इसके चलते बाजार में लोग खुलेआम उपयोग कर रहे हैं।

अमानक पॉलीथिन के अंधाधुंध उपयोग के चलते शहर के पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है और गोवंश की जान भी जा रही है। जागरुकता के अभाव में पॉलीथिन का उपयोग बंद नहीं हो पा रहा है। दुकानों पर भी धड़ल्ले से पॉलीथिन में सामग्री बेची जा रही है। नगर पालिका ने पॉलीथिन बिक्री व इसके उपयोग करने पर रोक लगाने के के लिए नाम मात्र की मुुहिम चलाई थी जो कई माह से बंद ही है। शहर में 16 से अधिक थोक व्यापारी 40 माइक्रोन से कम मोटाई वाली अमानक पॉलीथिन को जिले भर में बेज रहे हैं। पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के लिए नगर पालिका ने कुछ माह पहले जोरशोर से अभियान की शुरूआत भी की थी। लेकिन बाद में यह मुहिम ठंडी पड़कर बंद हो गई। इसके कारण अब फिर बाजार में पहले जैसी स्थिति निर्मित हो गई है और धड़ल्ले से दुकानों पर पॉलीथिन बिक रही है। शहर में फुटकर दुकानदार, सब्जी विक्रेता और होटल व्यवसायी भी पॉलीथिन में सामान बेच रहे हैं। उनके यहां आज तक नपा के अधिकारी पहुंचे ही नहीं है। प्रतिबंध के आदेशों का पालन कराने में भी कोई रुचि नहीं ले रहा है। इस कारण आज भी खतरे वाले प्लास्टिक कैरी बेगों का उपयोग हो रहा है। विक्रेता खाद्य एवं अन्य सामग्री पॉलीथिन बेग में भरकर बेच रहे हैं। लोग पॉलीथिन में खराब सामग्री या कचरा भरकर फेंक रहे हैं। कारण 40 माइक्रान से कम मोटाई वाले पॉलीथिन कैरी बेग को हानिकारक मानते हुए प्रतिबंधित किया गया था। पॉलीथिन की थैलियों में किराना, सब्जी सहित अन्य वस्तुओं को बेचा जा रहा है। इससे नगर पालिका के स्वच्छता अभियान पर भी असर पड़ रहा है।

जिले में औसत दो क्विंटल पॉलीथिन की खपत

प्रतिबंध के बावजूद अभी शहर में प्रतिदिन औसत दो क्विटंल से अधिक अमानक पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है। प्रतिदिन इतनी मात्रा में जिले में अमानक पॉलीथिन की खपत के बाद भी नगर पालिका द्वारा गठित टीम को वह दिख नहीं रहा है। शहर में पॉलीथिन के 16 थोक व्यापारियों पर सीधे कार्रवाई से नगर पालिका भी हमेशा बचती रही है। कभी कभी सब्जी विक्रेताओं, हाथ ठेला व्यवसायियों पर कार्रवाई कर कुछ पॉलीथिन के पैकेट जब्त कर खुद की पीठ थपथपाते रहते हैं। नपा के पास शहर को पॉलीथिन मुक्त करने के लिए कोई बड़ी योजना भी अभी तक नहीं है।

10 साल में भी कार्रवाई नहीं

शहर में नपा द्वारा 2011 में 20 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया गया था। उसके बाद केंद्र सरकार ने 40 माइक्रान तक की मोटाई वाली पालीथिन प्रतिबंधित कर दी। यानी प्लास्टिक कैरीबैग खरीदने-बेचने के साथ ही इसका इस्तेमाल करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन और नपा के अधिकारियों ने आदेशों के पालन में कोई रुचि नहीं ली। बाजार से घर ले जाने के बाद पॉलीथिन को फेंक दिया जाता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही पॉलीथिन पशुओं के पेट तक पहुंच जाती है जो बेजुबान पशुओं की मौत का कारण बनती है। बाजार में विचरण करने वाली अधिकांश गायों की मौत प्लास्टिक की थैलियां खाने से ही हो रही है।

5 क्विंटल प्रतिदिन पॉलीथिन का कचरा

शहर में प्रतिदिन 5 क्विंटल पॉलीथिन का कचरा निकलता है। इस कचरे को एकत्र कर ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ले जाकर डाला जा रहा है। इसके अलावा भी नगर में पन्नियों का कचरा रह जाता है।

यह बना रखी है निरीक्षण के लिए टीम

नोडल अधिकारी सहायक यंत्री आरसी तोमर, सहायक राजस्व अधिकारी राजेश दावरे, दिनेश बघेरवाल, संजय मारोठिया, मोहन इरवाल, आरिफ हुसैन, सुधीर पंड्या, श्याम राठौर।

37 हजार रुपए वसूले

प्रतिबंधित पॉलीथिन बिक्री की शिकायत पर पिछले साल 22 दुकानों पर छापामार कार्रवाई की गई। सभी दुकानों पर कार्रवाई करते हुए 37 हजार रुपए की वसूली की गई।

प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई पॉलीथिन का उपयोग कर रहा है व बेच रहा है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के लिए हमने आठ सदस्यों की एक टीम भी बनाई है जो छापामार कार्रवाई कर रही है। – केजी उपाध्याय, स्वास्थ्य अधिकारी, नपा

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