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‘प्रेस’ के समक्ष कई चुनौतियों की आहट.? – राधेश्याम मारू

देश के लोकतंत्र मे चौथे स्तंभ को सबसे भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन आज ‘प्रेस जगत’ पर खतरा मंडराने लगा है क्योकि प्रेस के स्वामी को प्रबंधक के अनुसार अपने संस्थान को संचालित करना पड़ रहा है और संस्थान मे आम आदमी की आवाज को प्रमुख खबर बनाने का दायित्व निभाने वाला पद संपादक केवल नाम का पद रह गया है। न्युज लेटेस्ट अपडेट के साथ पर कई टीवी चेनल्स सनसनी खबरो के पिछे अपनी टीआरपी बढ़ाने मे व्यस्त है तो वही समाचार पत्रो मे राजनैतिक विज्ञापनो से अर्थ प्राप्ति के चलते आम आदमी की आवाज को समाचार संस्थानो मे प्रमुखता मिल पाना अब दिव्य सपना सा लगने लगा है। इस दौर की पत्रकारिता मे अक्सर यह देखने मे आ रहा है की आम आदमी की आवाज को दबाकर पुंजीवाद के चलते एकाधिकार और जन समस्या, भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को एनकेन प्रकरेण कमजोर बनाने मे कोई गुप्त ताकते योजनाबद्ध तरीके से हावी होती नजर आ रही है। समाचार संस्थानो मे संपादक नाम मात्र के पद रह गये उसी के चलते कार्यरत पत्रकार भी खबरो के लिए स्वतंत्र नही रहे। वर्तमान दौर मे कई पत्रकार खबरो से ज्यादा विज्ञापनो के लिए अपने समाचार संस्थानो मे सेवा दे रहे है। पत्रकार भी विज्ञापनो की उठापटक वाले इस दौर मे अपनी आजिविका के लिए नित्य नये हथकण्डे अपना कर रोजमर्रा की जिन्दगी मे खर्च वहन कर रहे है तो अब सवाल यह है की ऐसी स्थति मे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ‘प्रेस’ स्वतंत्र और मजबुत कैसे .? देखा यह जा रहा है की इन सब उठपटक के बावजुद समाचार संस्थान को ईमानदारी से संचालित करने वाले स्वामी, संपादक, प्रबंधक, पत्रकार कही ना कही मजबुरी के दोराहे पर खड़े है।

सच्चे मौलिख पत्रकारो की लेखनी दबती जा रही है क्यो.?
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के पिपल्यामंण्डी मे एक स्थानिय दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार की हत्या फिर देश के ख्यातनाम पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या निंदनीय है, दिल्ली भोपाल की तहर आज मंदसौर मे भी अलग अलग संगठनो मे बंटता पत्रकारों का आपसी सरोकार तो और ज्यादा दुखद है। 8 सितम्बर को भोपाल में छपे अखबारों को देख कोई भी इस बात का अंदाज लगा सकता है, भोपाल में पत्रकारों के आपसी रिश्ते छीजते जा रहे हैं। गौरी लंकेश को श्रद्धांजली देने का समाचार, प्रमुख अखबार होने का दावा करने वाले अखबारों से गायब था। भोपाल के अखबारों ने इस विषयक जिस समाचार को 8 सितम्बर को जगह दी थी वो समाचार राजधानी में हुए कार्यक्रम का न होकर अंचल में दिए गये इस विषयक ज्ञापन का था या बंगलुरु से जारी इस मुद्दे पर लेख थे। ऐसा लगा कि देश के खांचों में बंटती पत्रकारिता भोपाल आ गई है और वहां से मंदसौर या कोई ऐसा दबाव था जिसने इस विषय पर हुई शोक के बदले पत्रकार एकता खण्ड खण्ड नजर आई, सोशल मीडिया पर 80 प्रतिशत स्वार्थी जन्तु पत्रकारीता को बदनाम कर रहे है वही सच्चे मौलिख पत्रकारो की लेखनी दबती जा रही है क्यो.?। पत्रकार बिरादरी के लिए यह एक विचारणीय बिंदु है। इस पर सोचना जरूरी है। प्रेस क्लब आफ इण्डिया, नई दिल्ली में इस विषय को लेकर जो हुआ, और कहीं ना हो ऐसी कोशिश भी जरूरी है। आज के दौर मे पत्रकारीता किस स्थति मे है यह बात भी आम आदमी से छुपी हुई नही है। लेकिन देश के लोकलंत्र मे चौथा स्तंभ माने जाने वाला मीडिया जगत अभिव्यक्ति के लिए आज भी स्वतंत्र है। निस्वार्थ निष्पक्ष पत्रकारीता जगत मे सेवारत पत्रकारहितो के लिए पत्रकार एकता, पत्रकार संरक्षण कानुन समय की मांग है।

मंदसौर जिले मे सक्रिय कार्यरत पत्रकार संगठन
जिला प्रेस क्लब – अध्यक्ष श्री नरेन्द्र अग्रवाल,
दशपुर प्रेस क्लब – अध्यक्ष श्री विजय शर्मा,
युथ प्रेस क्लब – श्री आकाश चौहान,
जिला पत्रकार एसोसिएशन – अध्यक्ष श्री दिलीप सेठिया,
जिला प्रेस फोटोग्राफर संघ- अध्यक्ष श्री विपिन चौहान गोलु,
म.प्र. श्रमजीवी पत्रकार संघ – अध्यक्ष श्री प्रितिपालसिह राणा,
मालवा श्रमजीवी संघ – अध्यक्ष श्री एहमद नुर अगवान,
एम.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट युनियन – अध्यक्ष श्री राजेश पाठक,
संपादक संघ – श्री औकांरसिह,
आईसना – अध्यक्ष श्री उमेश नेक्स,
राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा – अध्यक्ष श्री रमेश मरेठा,
लघु एवं मध्यम समाचार मंच (लमसम) – अध्यक्ष श्री मिर्जा आबिद बेग,
जिला प्रेस फोरम – अध्यक्ष श्री राधेश्याम बैरागी,

राधेश्याम मारू : लेखक पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता है
मंदसौर म.प्र. सम्पर्क सुत्र-9770027700

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