फिर खुलेगी किसान आंदोलन की बंद हो चुकी फाइल

मंदसौर गोली कांड : गृहमंत्री के बयान ने फिर उम्मीद जगाई मृतकों के परिजनों को

 – गोली चली, लोग मरे, फिर भी अभी तक कोई दोषी नहीं मिला

मंदसौर। जून 2017 में हुए किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए पांच किसानों के मामले में जैन आयोग ने जांच तो पूरी कर ली है। जैसा कि सामने आ रहा है उसमें पूरी घटना को परिस्थितिजन्य बताकर मामले में किसी को दोषी नहीं बताया गया है। इधर, प्रदेश में सरकार बदलने के बाद गृहमंत्री बाला बच्चन ने बुधवार को भोपाल में बयान दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो किसान आंदोलन की फिर से जांच कराएंगे। इस बयान ने मृतकों के परिजनों व घायलों में फिर से उम्मीद की किरण जगाई है। उनका यह मानना है कि गोली चली है, लोग मरे हैं फिर भी कोई दोषी नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है। अगर इसी जगह पुलिसकर्मी मरते और सामने किसान होते तो सरकार किसानों को सजा दिला चुकी होती।

6 जून 2017 को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस व सीआरपीएफ की गोली से मारे गए पांच किसानों अभिषेक पाटीदार, बरखेड़ा पंथ, कन्हैयालाल पाटीदार चिल्लौद पिपलिया, पूनमचंद पाटीदार टकरावद, सत्यनारायण गायरी लोध, चैनराम पाटीदार नयाखेड़ा जिला नीमच की मृत्यु के दोषियांें का पता लगाने के लिए तत्कालीन प्रदेश सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस जेके जैन की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। गठन के बाद से एकल सदस्यीय जस्टिस जेके जैन आयोग ने मंदसौर में ही 9 बार कैंप कर लगभग 185 लोगों के बयान लिए थे। इनमें गोलीकांड में मारे गए पांच किसानों के परिजनों, छह घायलों, प्रत्यक्षदर्शी सहित पुलिसकर्मी व अन्य अधिकारी भी शामिल थे। इसके बाद इंदौर स्थित कार्यालय में मंदसौर जिले में पदस्थ तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह, एसपी ओपी त्रिपाठी, एएसपी अजयप्रताप सिंह, सीएसपी सांईकृष्ण थोटा, एसडीएम श्रवण भंडारी, टीआई अनिलसिंह ठाकुर सहित अन्य अधिकारियों के बयान हुए थे। वकीलों ने गवाहों के बयानों पर सवाल जवाब भी किए थे। मृतकों के परिजनों, घायलों व कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने यही बयान दिए थे कि गोली पुलिस व सीआरपीएफ जवानों ने चलाई थी। मौके पर मौजूद अधिकारियों के बयानों में भी भीड़ के बेकाबू होने व हथियार छीनने की कोशिश पर गोली चालन का जिक्र हुआ था। जून 18 में आयोग ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी पर अब तक उसे उजागर नहीं किया गया है। बताया जा रहा है आयोग की रिपोर्ट में किसी को दोषी नहीं मानकर इसे परिस्थितिजन्य बताया गया है। अब गृहमंत्री ने जरूरत पड़ने पर फिर जांच कराने की बात कर मामले को फिर गरमा दिया है।

मृतकों को एक करोड़, परिजनों को नौकरी भी दी

किसान आंदोलन में पुलिस की गोली से पांच किसानों की मौत हुई थी। एक किसान घनश्याम धाकड़ की मौत पुलिस अभिरक्षा में पिटाई से हुई थी। सरकार ने सभी के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी है। इसके अलावा एक-एक परिजन को नौकरी दी है। गोलीकांड में घायल छह किसानों को पांच-पांच लाख रुपए दिए गए थे।

100 प्रकरण दर्ज, 351 नामजद, 81 गिरफ्तार, तीन हजार अज्ञात

किसान आंदोलन में हिंसा के बाद जिले के 13 थाना क्षेत्रों में उपद्रव, तोड़फोड़ व बलवे के मामले में लगभग 100 प्रकरण दर्ज हुए थे। इनमें 351 को नामजद आरोपी बनाए थे, 81 गिरफ्तार हुए थे। व लगभग तीन हजार अज्ञात पर प्रकरण दर्ज हुए थे। अधिकांश लोग जमानत पर छूट चुके हैं। बाद में किसानों के विरोध व सीएम के सभी प्रकरण वापस लेने के मौखिक आश्वासन के बाद पुलिस ने इन सभी मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हिंसा में कुल 25 ट्रॉले, ट्रक, एक चेसिस, दो हाइड्रा मशीन, 69 बोलेरो इंजन, छह ऑटो, 21 ट्रैक्टर, 67 कार, जीप, पिकअप, एक एंबुलेंस, एक फायर बिग्रेड, 158 मोटसाइकल जलाकर लगभग 27.32 करोड़ की चल- अचल संपत्ति का नुकसान किया था।

निलंबित अधिकारी भी हो गए है बहाल

किसान आंदोलन पर ठीक से नियंत्रण नहीं करने पाने के चलते सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह, एसपी ओपी त्रिपाठी, सीएसपी साईंकृष्ण थोटा और पिपलियामंडी टीआई अनिलसिंह ठाकुर को निलंबित कर दिया था। जैन आयोग की रिपोर्ट सरकार को देने के बाद शासन ने स्वतंत्रकुमार सिंह, ओपी त्रिपाठी व साईकृष्ण थोटा को बहाल कर दिया है। इसके अलावा उस समय पदस्थ रहे अधिकांश प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को भी दूसरे जिलों में भेज दिया गया था।

क्या कह रहे हैं परिजन

– हम पहले ही कह रहे थे आयोग की कार्यशैली से लग रहा था कि किसी को सजा नहीं होगी। गोलियां चलाने वालों को सजा होना चाहिए। नौकरी से बर्खास्त करना चाहिए। हमें गृह मंत्री के बयान से फिर उम्मीद बंधी है कि दोषियों को सजा मिलेगी।

-कन्हैयालाल गायरी, लोध, मृतक सत्यनारायण के बड़े भाई। – हमें पहले ही लग रहा था कि जैन आयोग की रिपोर्ट किसानों के पक्ष में आएगी। इसलिए माथा पच्ची करने से कोई फायदा नहीं मिल रहा था तो हम चुप बैठ गए थे। पर अब फिर फाइल खुलने की आशा है।

-मधुसूदन पाटीदार, बरखेड़ा पंथ, मृतक अभिषेक पाटीदार के भाई

– हमारा तो यही कहना है कि दोषियों को सजा सुनाई जाए। अभी तक तो यही लग रहा था कि सरकार दोषियों को बचा रही है। अगर गृहमंत्री फिर से हमारी पीड़ा सुनते हैं और जांच कराते हैं तो ठीक लगेगा। गोली चलाने वालों का सजा तो मिलना चाहिए।

– बालाराम पाटीदार, टकरावद, मृतक बबलू पाटीदार के बड़े पापा क्या कहते हैं घायल

– तीन-चार बार हमारे बयान हुए हैं। हमने हमारी तरफ से तो काम पूरा कर दिया था। पर डेढ़ साल बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। पहले वाली सरकार की मंशा भी गोली चलाने वालों को बचाने की लग रही थी। अब अगर नई सरकार ने फिर से जांच कराने की बात कही है तो उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।

-मुरली मदनलाल शर्मा, बाजखेड़ी, घायल

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