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बापू का हत्यारा क्यो है प्रज्ञा को प्यारा?, फिर नाथूराम को बताया ‘देशभक्त’

ब्रजेश आर्य की कलम  से — अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाली प्रज्ञा ठाकुर ने इस बार महात्मा गांधी के हत्यारे को ‘देशभक्त’ बता दिया है। इस बार उन्होंने लोकसभा के संसद पटल पर बुधवार को नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ करार दिया है। उनके इस बयान का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। लोकसभा में एसपीजी संशोधन बिल पर डीएमके सांसद ए राजा अपनी राय रख रहे थे। राजा ने एसपीजी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान नकारात्मक मानसिकता को लेकर गोडसे का उदाहरण दिया। इसके विरोध में प्रज्ञा ने खड़े होकर कहा, ‘देशभक्तों का उदाहरण मत दीजिए।’ प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बयान के बाद जब विपक्ष ने विरोध जताना शुरू किया तो भाजपा सांसदों ने ही उन्हें बैठने के लिए कहा। प्रज्ञा ठाकुर के बयान को लोकसभा की कार्यवाही से हटाया गया।

भारतीय जनता पार्टी ने ‘देशभक्त’ शब्द का इतना राजनीतिक उपयोग कर लिया है की अब लगता है कि देशभक्त एक सामाजिक शब्द नहीं रहा!

देखने मे आरहा है कि निरंतर राजनीतिक दल अपने शासन काल मे अपने अपने विचारधारा से जुड़े हुए व्यक्तित्व को बढ़ावा देते हुए महान बनने कि कोशिश करते है पर सत्ता का नशा ऐसा चढ़ा है कि एक हत्यारे को देश भक्त बताना हजारो सवाल खड़े करता है! यह बात सही है कि राजनीति में अप्रत्याशित और असंभव कुछ नहीं होता, स्थाई दोस्ती या दुश्मनी जैसी कोई चीज़ नहीं होती, लेकिन विचारधारा या फिर पार्टी लाइन जैसी कोई चीज़ जरूर हुआ करती थी। कुछ समय पहले तक किसी दल या नेता की राजनैतिक धरोहर जनता की नज़र में उसकी वो छवि होती थी जो उस पार्टी की विचारधारा से बनती थी लेकिन आज की राजनीति में ऐसी बातों के लिए कोई स्थान नहीं है। लेकिन प्रज्ञा ठाकुर के बयान से सत्ता धारी पार्टी कि दोहरी विचार धारा साफ दिखाई देती है। प्रधान मंत्री जी जब भी विदेश मे भाषण देते है तो कहते है मे अहिंसा के पर्याय गांधी के देश से आया हूँ…. कुछ दिनों पूर्व ही प्रधानमंत्री जी, जिन्होंने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाई थी क्या वो दिखावा था?

प्रज्ञा पहले भी नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता चुकी हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था. प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि नाथूराम गोडसे एक देशभक्त थे, हैं और हमेशा रहेंगे। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने माफी मांग ली थी। पीएम मोदी ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि मन से उन्हें माफ नहीं कर पाएंगे। प्रज्ञा ठाकुर की तरह बयान देने वाले सोशल मीडिया पर लाखो तथाकथित देशभक्त है! मोदी जी को अब लोकतंत्र के पवित्र मंदिर संसद में इसी बयान को दोहराने पर सांसद प्रज्ञा ठाकुर को कतई माफ नहीं करना चाहिए….. लेकिन मजे की बात तो यहा है कि वे उनके प्रेरणा स्त्रोत नरेंद्र मोदी से इस बात पर इत्तफाक नहीं रखते…. इस विषय पर भक्त ओर भगवान दोनों कि विचार धारा मे अंतर है… एक महान विचार धारा ओर व्यक्तित्व के खिलाफ तथाकथित गलत बयान बाजी अपनी छिछोरी राजनीति चमकाने की गंदी मानसिकता से ज्यादा कुछ नहीं है….

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