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बैंक की नई व्यवस्था से किसान परेशान और व्यापारियों में हड़कंप

सीतामऊ निप्र। जीरो प्रतिशत ब्याज पर मिलने वाले ऋण को लेकर किसानो के साथ व्यापारी वर्गो को भी परेशानी झेलना पड रही है जिसके चलते लग्न सराह व अन्य मांगलिक आयोजनो के लिए संबधित पक्षकारो को भारी पापड बेलने पर बाध्य होना पड रहा है।
उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा किसानो के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करने की दृष्टि से बिना ब्याज के ऋण की योजना संचालित कर रहे है इसके तहत किसानो को चालु वित्तिय वर्ष में सहकारी संस्थाओ के माध्यम से ऋण प्रदान किया जाता है जिसे वित्तिय वर्ष के समाप्ती से पुर्व जमा करवाना आवश्यक है इस योजना का लाभ नगर सहित अंचल क्षैत्र के किसान भी उठा रहे है।
इस वर्ष भी किसानो ने मार्च माह में ऋण राशी जमा करवा दी थी अप्रैल माह के पहले सप्ताह में पुनः ऋण मिलने की आस में कई किसानो ने ऋण राशी जमा करवाने हेतु व्यापारी व साहुकारो का सहयोग लिया था लेकिन इस वर्ष ऋण अदायगी के सिस्टम बदल दिए गए। जिससे किसानो के साथ व्यापारीयो को भी परेशानी झेलना पड रही है एवं मार्केट में वैशाख माह के सीजन ग्राहकी के दोर में आर्थिक खलबली का नजारा देखने को मिल रहा है इस संबध में रामेश्वर जामलिया, रमेश मालविया, भागीरथ भम्भोरिया, विजय पटेल, अशोक गिरोठिया आदि किसानो ने बताया कि पुर्व में भी सहकारी संस्थाओ के माध्यम से अप्रैल माह के पहले सप्ताह में ऋण राशी मिल जाया करती थी। इस वर्ष नगद भुगतान नही किया जाकर बैंक खाते में जमा कर दी गई। जिसकी निकासी के लिए बैंक शाखाओ में भीड उमड रही है। बैंक शाखाओ में पर्याप्त मात्रा में नोट उपलब्ध नही होने से एवं अन्य कई विसंगतियो के कारण अप्रैल माह के उतरार्ध में भी सैकडो किसानो को अब तक ऋण राशी नही मिल सकी। बैंक शाखााओ में भी सम्पुण ऋण राशी एक मुश्त आहरण नही की जा रही है जिसके दुष्परिणाम स्वरूप् व्यवसायिक गतिविधियो पर प्रतिकुल प्रभाव पड रहा है। किसानो एवं व्यापारी वर्गो को चैतरफा परेशानीयो से जुझना पड रहा है। मार्केट के आर्थिक खलबली से तमाम व्यवसाय प्रभावित हो रहे है।

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