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मोदी ने मुख्यमंत्री के लिए इस नेता के नाम पर लगाई मुहर, एमपी में चेहरा बदलना चाहती है भाजपा

भोपाल. ज्योतिरदित्य सिंधिया गुट के 22 विधायकों को तोड़कर भाजपा कमलनाथ सरकार गिराते हुए खुद सत्ता की दहलीज पर तो पहुंच गई है, लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर असमंजस बरकरार है। कोरोना वायरस के नाम पर टाली गई भाजपा विधायक दल की बैठक के पीछे एक अहम कारण केन्द्रीय नेतृत्व का आम सहमति बनाना है। मुख्यमंत्री प की रेस में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान सबसे आगे बताया जा रहे हैं।

कौन-कौन हैं दावेदार

वरिष्ठता के आधार पर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम शिवराज सिंह चौहान के बाद दूसरे नंबर पर है। तो वहीं, ऑपरेशन लोटस में रणनीतिकार की भूमिका निभाने वाले पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी केन्द्रीय संगठन की सूची में शामिल है। सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के चयन में ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी अहम रोल होगा।

मोदी ने शिवराज ने नाम पर दी सहमति
सूत्रों के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पसंद बताए जा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी चौथी बार शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश की कमान सौंपना चाहते हैं, लेकिन कुछ बड़े नेताओं का तर्क है कि चेहरा बदलना जरूरी है। शिवराज सिंह चौहान अगर मध्यप्रदेश के सीएम बनते हैं तो प्रदेश में पहली बार कोई नेता चौथी बार सीएम पद की शपथ लेगा। शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। शिवराज सिंह चौहान के बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह हैं जो 10 सालों तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं।

आज हो सकता है निर्णय
ऐसे में रविवार को केन्द्रीय नेतृत्व इस पर निर्णय ले सकता है कि एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश की कमान सौंपी जाए या फिर प्रदेश में चेहरा बदला जाए। उसके बाद ही सोमवार को भोपाल में विधायक दल की बैठक करके उसें मुख्यमंत्री के नाम का एलान किया जा सकता है।

कास्ट फैक्टर पर भी नजर
मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा जातिगत समीकरण पर भी फोकस कर रही है। शिवराज सिंह चौहान ओबीसी वर्ग से आते हैं जो की प्रदेश की लगभग आधी आबादी है। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान की दावेदारी प्रबल हो जाती है। वहीं, नरेन्द्र सिंह तोमर क्षत्रीय वर्ग से आते हैं तो नरोत्तम मिश्रा ब्राम्हण हैं। बीते विधानसभा चुनाव में सामान्य वर्ग की नाराजगी के कारण ही भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।

निर्दलीय विधायकों का भी मिला साथ
कमलनाथ के इस्तीफा देते ही वारासिवनी के निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल ने कहा कि मैं नई सरकार का समर्थन करूंगा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा- मैंने कहा था कि जब तक कमलनाथ हैं, मैं उनके साथ हूं। लेकिन मेरी जिम्मेदारी मेरे विधानसभा क्षेत्र के लिए भी है। मुझे अपने क्षेत्र के विकास और कर्मचारियों के सम्मान का ख्याल रखना है। यह बिना नेतृत्व के संभव नहीं होगा। इसलिए नई सरकार के साथ खड़े होने के अलावा मेरे पास कोई और विकल्प नहीं है। मैंने भाजपा नेतृत्व को भी यह बता दिया है। वहीं, भाजपा नेता अरविंद भदौरिया ने कहा कि बसपा, सपा और निर्दलीय विधायक भी हमारे साथ हैं।

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