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राम राज्याभिषेक के साथ हुआ दस दिवसीय रामलीला का समापन, महाआरती भी हुई

मन्दसौर। रामलीला मैदान (कालाखेत) में जिला धार्मिक उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय रामलीला महोत्सव का 12 नवम्बर को गरिमामय समारोह के साथ समापन हो गया। रामलीला मंचन राम-रावण युद्ध से हुआ। युद्ध में राम के बार-बार बाण मारने और दसो शिसिर-बीसों भुजाओं के काटने के बाद भी जब रावण नहीं मरा तब विभीषण द्वारा उसकी नाभी में अमृत कुण्ड होने का राज बताने पर राम का नाभी में बाण मारकर अमृत सोखने से रावण धराशायी हुआ।

रावण ने मरते समय सीता हरण का रहस्योघाटन करते हुए बताया कि पंचवटी में रावण को आभास हो गया था कि सीता जगदम्बा का अवतार है और इसलिये अपने तथा राक्षसों के उद्धार के लिये लंका ले जाकर अशोक वाटिका में निवास दिया।

रावण ब्राह्मण होकर चारो वेद अन्य शास्त्रों के साथ महान वैज्ञानिक था। मरने से पूर्व उसने सोने में सुगन्ध, धरती से अंतरिक्ष (स्वर्ग) तक सीढ़ी बनाने और आग से धुआं दूर करने की तकनीकी के अविष्कार में प्रयास कर रहा था जो अधूरा रह जाने का दुःख है परन्तु उसे आत्म संतोष है कि उसने जीते जी राम को लंका में आने नहीं दिया परन्तु राम के सामने उनके लोक को जा रहा है। यह उसकी हार नहीं जीत है। रावण आध्यात्मिक शास्त्रों के साथ ही राजनीतिक का भी परम विद्वान होने से अंतिम समय में राम ने अनुज लक्ष्मण को रावण से राजनीति का ज्ञान प्राप्त करने पर भेजने पर रावण ने सफल राजनीतिज्ञ होने के लिये साम, दाम, दण्ड, भेद चारों का कहा, किस समय प्रयोग होना चाहिए बताया। रावण ने इन चारों का क्रम से स्पष्ट करते हुए कहा कि राम इन चारों के पूर्ण ज्ञाता हैं तभी वे उसका वध कर सके।

रावण वध के पश्चात् राम का अयोध्या लोटने पर राज्याभिषेक से हुआ। यह भी एक संयोग रहा कि त्रेता में भगवान राम का राज्याभिषेक गुरूदेव वशिष्ठ द्वारा सम्पन्न हुआ था और मंदसौर में राज्याभिषेक क्षेत्र के प्रतिष्ठित श्री चैतन्य आश्रम मेनपुरिया के युवाचार्य संत  महेश चैतन्यजी महाराज जो 1 दिन पूर्व ही बाहर प्रवास से आश्रम में लोटे थे उनके द्वारा किया गया। राज्याभिषेक के पश्चात् संतश्री के आशीवर्चन भी हुए। धर्म समिति कार्यकर्ताओं तथा मैदान में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु माँ-बहनों, महानुभावों द्वारा आरती की गई।

हजारों की संख्या में उपस्थित हुए जन रामलीला में प्रतिदिन रामलीलाल में प्रतिदिन प्रारंभ से अंतिम दृश्य तक हजारों की संख्या में दर्शकों की उपस्थिति से रामलीला मैदान में आयोजित इस रामलीला के ऐतिहासिक आयोजन की  अमिट यादे दर्शकों के मानस पटल पर लम्बे समय तक बनी रहेगी। महाआरती पश्चात प्रसाद बांटा गया।

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