वैध नागरिकता के फिल्टर प्लांट हैं सीएए, एनपीआर और एनआरसी

CAA, NPR And NRC

नागरिकता संशोधन विधेयक के राज्यसभा में पारित हो जाने के बाद देश भर में प्रयोजित तरीके से कराई गई हिंसा की असलियत धीरे धीरे सामने आती जा रही है और किस प्रकार से देश के विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस हिंसा की आग में घी डालने का काम किया वह भी अब देश के सामने आ रहा है। जमकर राजनैतिक रोटियॉं सेंकी जा रही हैं और नागरिकता संशोधन कानून को मुसलमानों के खिलाफ होने का दुष्प्रचार किया जा रहा है।

विगत दिनों के घटनाक्रम को देखकर यही समझ में आ रहा है कि षडयंत्रकारी मुसलमानों में इस भ्रम को फैलाने में सफल रहे कि नागरिकता संशोधन कानून उनको इस देश से निकालने के लिये बनाया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह बार बार यह की रहे हैं कि नागरिकता संशोधन कानून किसी को इस देश से निकालने के लिये नहीं बनाया गया है ये कानून सिर्फ उन लोगों को देश की नागरिकता प्रदान करने के लिये बनाया गया है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक आधार पर प्रताडित होकर भारत में आए हैं और यहॉं शरणार्थी बनकर रह रहे हैं।

इस कानून के बाद वे सभी भारत के नागरिक बन जाऐंगे और भविष्य में भी जो लोग प्रताडित किये जाऐंगे वे भारत आ सकेगे इसका दरवाजा खोला जा रहा है। इतना स्पष्ट करने के बाद भी समझ के बाहर है कि इन विपक्षी दलों की परेशानी क्या है? नागरिकता संशोधन कानून को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) से जोडकर नये विवादों को जन्म दिया जा रहा है।

केन्द्र सरकार इस सम्बन्ध में अपनी मंशा स्पष्ट कर चुकी है कि वह भारत से हर उस घुसपैठिये को निकालने के लिये प्रतिबद्ध है जो अवैध रूप से देश में आया है तो इसमें किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? और आपत्ति होना भी क्यों चाहिये? ऐसा करने वाला भारत कोई पहला और आखिरी देश तो है नहीं विश्व के सभी देश अपने यहॉं अवैध अप्रवासीयों को निकालते ही हैं और उन देशों में इस मामले में विपक्षी दल सरकार के साथ खडे दिखाई देते हैं बस हमारा भारत ही इस मामले में बिरला देश है जहॉं राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार के खिलाफ खडा हो जाता है और इतना ही नहीं ऐसे मुद्दों पर होने वाली हिंसा को भी प्रोत्साहित करता दिखाई देता है।

असदुद्दीन औवेसी ने सीएए, एनपीआर और एनसारसी के मुद्दों की दुहाई देते हुए कहा कि इन रजिस्टरों को बनाने की प्रक्रिया में मांगे जाने वाले दस्तावेज एक गरीब व्यक्ति कहॉं से लाएगा और जो दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकेगा वह एनआरसी में अवैध घोषित हो जाएगा।

क्या इस देश का कोई भी नागरिक औवेसी की बात पर सहमति जता सकता है? क्या कोई यह मानने के लिये तैयार होगा कि जो मुसलमान पिछले 70 साल से या इसके पूर्व सैंकडों सालों से इस देश के नागरिक हैं उनके पास कोई भी दस्तावेज नहीं होगा? कुल 16 दस्तावेजों में से कोई एक या दो आमतौर पर मांगे जाते हैं जो आपकी नागरिकता के बारे में वैध दस्तावेज हैं उनको प्रस्तुत करने में तो कोई आपत्ति है ही नहीं।

यह मानना बडा मुश्किल है कि कोई भी दस्तावेज किसी गरीब नागरिक के पास नहीं है। औवेसी को यह समझना होगा कि यही वो घुसपैठिया है जिसको निकालने की बात एनआरसी के अंदर हो रही हैं। दूसरी बात का जवाब भी इसी से जुडा है कि एनआरसी पूरे देश में क्यों? तो वह इसीलिये कि आसाम में एनआरसी लागू होने के बाद ये अवैध घुसपैठिये पूरे भारत में फैल गए और हकदारों का हक मारने मे लग गए और अब तो ये देश की शांति भंग करने वाली गतिविधियों में भी संलिप्त पाए जा रहे हैं तो केन्द्र सरकार के द्वारा भारत की जनता के लिये लगाए गए इन फिल्टर प्लांटों (सीएए, सिटीजन अमेंटमेंट एक्ट।

एनपीआर नेशनल पापुलेशन रजिस्टर। और एनसारसी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) में से हर नागरिक फिल्टर होकर निकलेगा और भारत में अपनी वैध नागरिकता के साथ देश की मुख्य धारा में शामिल होकर देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगा यह विश्वास किया जाना चाहिये।

– डॉ. क्षितिज पुरोहित 9425105610

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