Breaking News
‘शिव’ ने दिया शिवना को धोखा !

‘शिव’ ने दिया शिवना को धोखा !

मंदसौर। मन्दसौर शहर की जल आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली शिवना नदि में पिछले कई वर्षों से शुद्धिकरण अभियान शहर के अनेक सामाजिक संगठनों द्वारा अपने अपने स्तर पर चलाया जा रहा है और इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आये है। लेकिन पिछले वर्ष इस अभियान में एका एक गति आई जिसका कारण था जन अभियान परिषद के सानिध्य में शहर के समस्त धर्म, समाज, सामाजिक संगठन, राजनितिक संगठन व शासकीय विभागों का अभियान में बढ़ चढ़ कर रूची लेना। सभी ने मिलकर श्रमदान भी किया और अभियान को गति देने के हेतु आर्थिक सहयोग भी बढ़ चढ़कर दिया, जिसका परिणाम आज हमारे सामने है। कि शिवना नदि के स्वरूप में जो परिवर्तन आया है। आज गर्मी के दिन समाप्त होने वाले है ओर नदि में अभी भी अच्छी मात्रा में पानी भरा दिखाई दे रहा है। नदि के तट एक जैसे दिखाई दे रहे है। शिवना के घाटों व किनारों पर अब ना के बराबर लोग कपड़े धोते हुए दिखाई देते है। यह सब परिणाम पिछले वर्ष 2018 में 45 दिन के अभियान के स्वरूप हमें देखने को मिले है।

शिवना शुद्धिकरण अभियान की सफलता के चर्चो ने शहर, सम्भांग, मालवा से बाहर निकलकर पूरे प्रदेश में नाम कमाया। लेकिन इस नाम का राजनितिक लाभ लने की मंशा भी इस काम को देखते हुए जुड़ गई। 30 मई 2018 को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिवना शुद्धिकरण अभियान का जायजा लिया व दूसरे दिन सुबह श्रम दान भी किया। व इसी दौरान शिवना शुद्धिकरण अभियान में भाग लेते हुए नदी के लिये 12 करोड़ की राशि देने की घोषण की। इस घोषणा के 4 माह पश्चात प्रदेश में विधान सभा चुनाव को लेकर तारिखों के ऐलान के साथ आचार संहिता लागू हो गई। किंतु उनके मुख्यमंत्री रहते 12 करोड़ की घोषणा को भाषण के अलावा कोई लिखित आदेश प्रशासन को नहीं दिया गया। विधान सभा चुनाव 2018 सर पर थे तो दूसरी ओर राजनितीक लाभ लेने की मंशा से उत्साहित भाजपा नेताओं ने शिवना शुद्धिकरण के नाम पर 12 करोड़ का जमकर प्रचार-प्रसार शुरू किया, किंतु आज तक शिवना शुद्धिकरण अभियान के दोरान की गई उस घोषणा पर कोई अमल नहीं हुआ ना ही राशि मिली। इसे दुसरे शब्दों में कहा जाये तो शिव ने राजनितिक लाभ लेने के लिए शिवना के साथ धोखा किया है इस बात में काई दो राय नहीं है कि इस अभियान में भाजपा से जुड़े संगठन व उनके कार्यकर्ताओं ने जमकर मेहनत की।

शिवराज सिंह की घोषणाएं सिर्फ घोषणाएं रहती है उनकी घोषणा करने और उसको धरातल पर साकार करने में बहुत फर्क है जबकि यह घोषणा सरकारी अधिकारियों ओर सामाजिक संगठनों के सामने श्रमदान स्थल पर की गई और वह आखरी तक घोषणा बन कर ही रही और समाप्त हो गई। और अगर यह घोषणा पूर्ण भी हो जाती तो उस से शिवना नदि के शु़िद्धकरण अभियान को कोई फायदा नहीं होना था। क्योंकि उस घोषणा के पिछे जो उद्देश्य था वो कास्तकार होटल से मंदिर तक आने वाले रोड़ के आसपास का सौंदर्यीकरण करना था।

इसी सन्दर्भ में कलेक्टोरेट में आयोजित जिला प्रशासन व सामाजिक संगठनों की बैठक में राजेश उपाध्याय (नगरपालिका इंजीनियर) द्वारा यह बताया गया कि 3.5 करोड़ में एक स्टाप डेम छोटी पुल के बाद बनाकर रिवर्स आने वाले नाली के गन्दे पानी को रोका जा सकता है जिससे बदबु और गंदे पानी का मन्दिर की दिशा में आना रोका जा सकता है इस वर्ष भी शिवना शुद्धिकरण अभियान आखरी दिनों में प्रारम्भ हुआ है और अभियान को भी पिछले वर्ष जहां छोड़ा गया था मानों वहीं से चल रहा है। इस वर्ष देरी से अभियान की शुरूआत का मुख्य कारण लोकसभा चुनाव 2019 की आचार संहिता और अधिकारियों की चुनाव में व्यस्ता।

यह तो केवल घोषणा मात्र थी और जैसा कि नपा के इंजिनियर ने बताया है सड़क पर निर्माण हेतु योजना थी। -सोमिल नाहटा

इस उपरोक्त विषय पर पार्षद रूपल संचेती एवं मंडलम अध्यक्ष अशांशु संचेती ने एक संयुक्त प्रेसनोट जारी कर शिवराज सिंह चौहान पर लगाये आरोप

उन्होंने कहा कि हाल ही में एक पत्रकार वार्ता में भाजपा नेताओं द्वारा बताया गया कि नगरपालिका को प्रस्ताव बना कर राज्य शासन को भेजना होता है, जो कि नहीं भेजा गया। जबकि तथ्य यह है कि नगरपालिका द्वारा विशेष सम्मेलन बुला कर प्रस्ताव पारित कर लिए गए थे, और फाइल राज्य शासन को भेज दी गयी थी।

दिनांक 17 जून को कलेक्टोरेट में आयोजित जिला प्रशासन व सामाजिक संगठनों की बैठक में राजेश उपाध्याय (नगरपालिका इंजीनियर) द्वारा यह बताया गया कि नगरपालिका द्वारा प्रस्ताव बना कर राज्य शासन को तत्समय ही भेज दिया गया था, किंतु कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ। 12 करोड़ के प्रस्तावों में नगरपालिका द्वारा केवल शिवना किनारे कलेक्टर कार्यालय जाने वाले रोड पर रेलिंग लगाने, कियोस्क लगाने, पेवर ब्लॉक लगाने की बात बताई गई, जिसकी लागत 12 करोड़ बता दी गयी।

संचेती ने आरोप लगाया कि इस राशि मे शिवना शुद्धिकरण के नाम पर कुछ नहीं मिला, केवल ऐसे काम स्वीकृत हुए जिनके जम कर भ्रटाचार किया जा सकता था। शहर से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी व नदी किनारे वृक्षारोपण के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।

मजे की बात यह है कि इस सब मे नगरपालिका और तत्कालीन सरकार ने पूरा 1 साल बिगाड़ा, और नतीजा आज भी सिफर है। पिछले साल सामाजिक संगठनों द्वारा 45 दिन शिवना शुद्धिकरण अभियान चलाया गया, इस बार भी संगठन सक्रिय हैं। लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधियों के झूठ खत्म नहीं हो रहा है।
शहर के विधायक ने भी यह बयान दिया है कि उन्होंने शिवना के लिये 12 करोड की राशि शिवराज जी से स्वीकृत करवा ली थी, लेकिन इस संबंध में उस वक्त से लेकर अब तक सिर्फ बयान ही सामने आए हैं, कोई भी दस्तावेज कभी सार्वजनिक हुआ ही नहीं।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts

Leave a Reply