सड़क पर आवारा मवेशियों का कब्जा राहगीर बन रहे हैं हादसे का शिकार

मंदसौर. आवारा मवेशियों की समस्या से शहर को निजात नहीं मिल रही है। शहर के हर प्रमुख चौराहें से लेकर सड़क व सार्वजनिक स्थानों पर स्वछंद घुमने वाले इन आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। इनके कारण ट्रैफिक की समस्या अधिक होती है। आवारा मवेशियों के सड़कों पर डेरा डालने के कारण यातायात व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। इन आवारा मवेशियों के कारण इमरजेंसी वाहनों के निकलने पर ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर से बाहर निकलने पर चारों तरफ आवारा मवेशियों का जमावड़ा सड़कों पर बना रहता है जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रहीं है। रात के समय तो वाहन चालक को यह वाहन दिखाई नहीं देते है जिसके चलते चालक इन मवेशियों से टकराकर घायल होकर अस्पताल पहुंच जाते हैं।

लंबे समय से यह समस्या चली आ रही है, लेकिन इसके समाधान के लिए नपा ने अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। कई बार न्यायालय से लेकर सरकार स्तर तक से निर्देश जारी हुए, लेकिन जमीन हकीकत अब तक नहीं बदली। आवारा मवेशियों से बदहाल होती शहर की व्यवस्था की यह सूरत लंबे समय बाद भी नहीं बदल पाई है। मंदसौर में भी मामले में जनहित याचिका न्यायालय में लगी थी। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं निकला। जनलोगपयोगी शिकायत में भी मामला लंबे समय तक चला, लेकिन हल कुछ नहीं निकला। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने एक मामले में आवारा मवेशियों की वजह से हादसा होने पर कलेक्टर-एसपी को जवाबदार मानने का फरमान सुनाया। इसके बाद भी इस समस्या के निदान के लिए अब तक कोई पहल किसी भी स्तर से नहीं हुआ है।

पशु मालिक बेपरवाह
शहर की सड़कों पर आवारा जानवरों का कब्जा होने के पीछे बहुत हद तक पशु मालिक भी जिम्मेदार हैं। मवेशियों से हित साधने के बाद इन्हें सड़कों पर आवारा घूमने के लिए इस तरह छोड़ दिया जाता है जैसे मवेशियों से उनका कोई नाता न हो। दुर्घटना में मवेशियों की मौत के बाद वे मुआवजा के लिए जानवरों पर दावा करते हैं।

हर बार चलती है मुहिम लेकिन नहीं बदली सूरत
नपा का अमला कई बार इन आवारा मवेशियों को पकडऩे के लिए मुहिम चलाता है, लेकिन इसका नतीजा अब तक निकल कर नहीं आया है। जब भी शिकायत या कोई फरमान आता है तो खानापूर्ति के लिए मुहिक चलती है और कुछ पशुओं को पकडने के बाद फिर थम जाती है। पूरा अमला व संसाधन इसमें लगने और हर माह मवेशियों को पकडऩे में नपा का व्यय भी होता है। फिर भी इस समस्या का स्थाई हल नहीं निकल पा रहा है और इन पशुपालको पर नपा सख्ती के साथ अंकुश नहीं लगा पा रहा है।

जवाबदादेही तय होतो समस्या का हो समाधान
शहर में लंबे समय से आवारा मवेशियों के विचरण करने और ट्रैफिक व्यवधान बनने की समस्या आ रही है। प्रमुख चौराहों से लेकर सड़कों पर हर जगह आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा होने के कारण यातायात अवरोध होने के साथ गंदगी भी सड़कों पर फैलती है। बावजूद नपा की और से सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है। इस कारण समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है। पशुओं की इस समस्या के समाधान के लिए जवाबदादेही तय हुए बिना समाधान नहीं हो सकता। प्रशासन व नपा के अमले को इसे गंभीरता से लेकर जवाबदेही तय करते हुए समाधान निकालना होगा।

नियम तो कई लेकिन हल अब तक नहीं निकला
वैसे तो आवारा मवेशियों व सड़कों पर पशुओं को छोडऩे वाले पशुपालको पर कार्रवाई को लेकर नियम कई है। पशुपालको पर एफआईआर तक के नियम है, लेकिन पशुपालको पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होने के कारण यह समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। और इसका खामियाजा आम-आदमी को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। नपा ने कांजी हाऊस भी बना रखा है लेकिन पशु शहर की सड़कों ही घुमते हुए दिखाई देते है।

सार्वजनिक सूचना के बाद पकड़ते है
सार्वजनिक सूचनाएं जारी की जाती है। इसके बाद नपा मुहिम चलाकर आवारा मवेशियों को पकडऩे की कार्रवाई करती है। समय-समय पर यह मुहिम चलाते है। -केजी उपाध्याय, स्वास्थ्य अधिकारी

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