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सीएमओं सविता प्रधान की विभागीय जांच करवायी जाये- पार्षद श्रीमती संचेती

मंदसौर जब से मुख्य नपाधिकारी सविता प्रधान मंदसौर मंदसौर पदस्थ हुई तब से ही विवादो के घेरे में है। इकना नीमच कार्यकाल भी विवादास्पद रहा है। स्वच्छता के नाम पर करोडो रूपये की हेरफेरी, कभी सफाई मशीन किराये को लेकर के तो कभी रंगाई, पुताई व ड्राइंग , डस्टबीन के मामलें में आशिक कार्य कर बिल अधिक बनाय गये है। यही स्थिति सफाई कर्मचारियो के उपयोग की वस्तुये झाडु, टोकरे, किटनाशक  आदी वस्तुओ के विक्रय को लेकर के भी है। जो सामान नपा में सप्लायी नही हुआ है उनके भी बिल नपा परिषद में लगाये गये है।
यह शिकायत करते हुये कांग्रेस पार्षद श्रीमती रूपल अशांशु संचेती ने बताया कि सीएमओ ने डिवाईस वेस्ट मेनेजमेंट को अवेरनेस प्रोगाम चलाने के लिये 49 लाख का  ठेका दिया जाना अत्यंत ही संदेहास्पद है। इसमें कोई भी प्रक्रिय का पालन नही किया गया। आश्चर्य व दुखद बात यह है कि परिषद के अध्यक्ष, सभापति किसी को भी इसकी जानकारी नही है। संचालक के बयान मे भी विरोधाभास है जो साफ करता है कि नपा परिषद किसके इशारे पर चल रही है।
श्रीमती संचेती ने इस मामले को गंभीर बताते हुये कहा कि नपा में कार्यरत समस्त एनजीओं जांच के घेरे मे है। इस मामले में एनजीओ की जांच भी की जाना चाहिये कि आखिर इसके संचालक व पदाधिकारी कौन है। उन्होनें एनजीओ को दिय गये कार्य को एक बडे रेकेट का हिस्सा बताते हुये कहा कि  लंबे समय से ऐसे कार्य नपा में हो रहे है वो भी नपा पदाधिकारियो की मौन स्वीकृति के साथ।
श्रीमती संचेती ने आरोप लगाते हुये कहा कि इन्ही भ्रष्टाचार के चलते निर्माण कार्य पर पार्षदो की मांग पर ध्यान नही दिया जा रहा है। कई निर्माण कार्य के वर्क आर्डर महिनो पूर्व हो गये पर ठेकेदारो द्वारा कार्य नही किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रेत की रायल्टी बंद होने से आरसीसी निर्माण बंद पडे है जबकी जिसकी जितनी रायल्टी बनती है उतना भुगतान ठेकेदार का रोका जा सकता है। रायल्टी रसीद देने पर भुगतान करे पर सीएमओं का ध्यान निमाण पर नही है क्योकि इतने से कमीशन पर सीएमओं का पेट नही भरता।
उन्होनें नपाध्यक्ष पर सीएमओ का बचाने का आरोप लगाते हुये कहा कि नपा के 16 पार्षदो ने सीएमओं के खिलाफ अविश्वास प्रकट कर साधारण सभा में चर्चा हेतु प्रस्ताव रखा जाने का आवेदन दिया था लेकिन अध्यक्ष द्वारा सीएमओं के बचाव करते हुये सम्मेलन में इस पर कोई चर्चा नही की ओर नही प्रस्ताव को ऐजेंडे में शामिल किया जिससे नपाध्यक्ष की मिलीभगत का संदेह पैदा होता है।

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