हत्या की कहानी शहर की समझ से परे, एक और की हत्या का था प्लान!

मंदसौर। बंधवार हत्याकांड में जो खुलासा हुआ है उसके अनुसार अगर हत्या के बाद बुलेट स्टार्ट हो जाती तो आरोपित मनीष बैरागी एक पत्रकार गोपाल मंगोलिया की हत्या करने के बाद सरेंडर कर देता, पर योजना बदलने पर उसे भागना पड़ा। आरोपित मनीष बैरागी ने पुलिस कंट्रोल रूम पर कहा कि मुझे पता था कि प्रहलाद बंधवार रोज शाम को लोकेंद्र कुमावत की दुकान पर आते हैं। इसलिए वहां पास ही एक ट्रेवल्स की दुकान के बाहर खड़ा होकर उनका इंतजार करता रहा। बंधवार दुकान पर आए अंदर बैठकर चाय पी और फिर जब जाने लगे तो मैं उनके पास गया। बोला दादा जय श्रीराम और पहली गोली पेट पर मारी। इसके बाद दो गोली सिर में मारी। मुझे अपने किए पर कोई पछतावा भी नहीं है जो सही लगा वह मैंने कर दिया। मनीष को पिस्टल देने वाले अजय जाट को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मनीष ने बंधवार पर गोली चलाने से पहले गांधी नगर में जाकर झाड़ियों में देशी कट्टे से चार फायर भी किए थे।

नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की हत्या का जो कारण सामने आ रहा है वह इस जीवनशैली में बढ़ते तनाव और सहनशीलता की कमी को भी दर्शाने के लिए पर्याप्त है। आरोपित मनीष बैरागी ने चुनाव के पहले से लगा रखी उम्मीदों के पूरा नहीं होने पर शहर के एक ऐसे नेता की जान ले ली जो कई गरीबों के घर चला रहा था और आमजन के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहते थे। एसपी टीके विद्यार्थी ने बताया कि आरोपित बैरागी ने 32 बोर की पिस्टल से फायर किए थे। उसे अजय जाट ने यह पिस्टल और पांच-पांच कारतूस की दो मैगजीन दी थी। इसके अलावा चार कारतूस ट्रायल के अलग से दिए थे। बैरागी ने तीन गोली तो बंधवार को मार दी। उसके पास बचे सात कारतूस और पिस्टल पुलिस ने जब्त कर ली है।

गज्जू के पिता और गोलू भी आए मीडिया के सामने

पत्रकार वर्ता में एसपी श्री विद्यार्थी ने घटना में नाम आने वाले गज्जू साहू के पिता विनोद सम्राट और गोलू शाह को भी मीडिया के सामने पेश किया। दोनों ने स्वीकार किया कि चुनाव के दौरान मनीष बैरागी उनके साथ था और उसने डेढ़ लाख रूपये दिए थे। लेकिन बाद में गोलू और गज्जू ने उसे 50 हजार रूपये और स्वयं प्रहलाद बंधवार ने उसे 75 हजार रूपये लौटा दिए थे। 25 हजार रूपये बाकी थी।

मनीष ने कहा सबको पहंुचाया लाभ मुझे कुछ नहीं दिया

मनीष ने बताया कि चुनाव के समय प्रहलाद बंधवार का काम करने वाले सभी विशेषकर गोलू शाह और गज्जू सम्राट को आर्थिक लाभ पहंुचाया गया लेकिन मुझे कभी कुछ नहीं दिया मै भयंकर आर्थिक तंगी से परेशान था। मेरी गुमटी भी हटावाने की धमकी मुझे दि गई थी।

इस तरह दिया घटना को अंजाम

स्वयं मनीष बैरागी ने सभी तरह की अटकलों पर विराम लगाते हुए बताया कि वह दादा की हत्या के मकसद से ही गया था। उसे पता थी कि प्रहलाद दादा प्रतिदिन 6.30 बजे लोकेन्द्र कुमावत की दुकान पर आते है। उसने बताया कि वह कोठारी ट्रेवल्स पर बैठे थे उन्होन चाय पी उसके बाद मैं वहां गया और उनसे जयश्री राम कहकर तीन फायर कर दिए और वहां से भाग गया।

30 घंटे में गरोठ, भवानीमंडी, उदयपुर होते हुए प्रतापगढ़ पहुंचा

गुरुवार शाम लगभग 7.10 बजे से लेकर शुक्रवार रात 12.30 बजे प्रतापगढ़ पुलिस के हाथ लगने के बीच के 30 घंटे में आरोपित मंदसौर से सीतामऊ, गरोठ, भवानीमंडी होते हुए उदयपुर पहुंच गया और वहां से प्रतापगढ़ में आ गया। जहां जिला चिकित्सालय के सामने उसने गश्ती कर रही पुलिस को खुद को प्रहलाद बंधवार की हत्या में वांटेड बताया। उसके बाद मंदसौर पुलिस को सूचना मिली और उसे प्रतापगढ़ से लाया गया।

पिस्टल छुपाई थी अंकुर अपार्टमेंट के पास ऑफिस में

सूत्रों की मानें तो आरोपित ने बंधवार को गोली मारने के बाद अपनी बुलेट को स्टार्ट करने की कोशिश की। वह स्टार्ट नहीं हुई तो उसे वहीं छोड़कर पैदल ही सामने की तरफ भागा। फिर वह सुचित्रा टॉकीज की दीवार कूदकर पीछे के रास्ते से नई आबादी होते हुए अंकुर अपार्टमेंट के अपने ऑफिस पहुंचा। वहां दरी के नीचे पिस्टल व बाकी बचे राउंड छुपाने के बाद शुक्ला कॉलोनी होते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचा। स्टेशन से पटरी किनारे सीतामऊ फाटक तरफ गया। फिर कृषि महाविद्यालय की तरफ से होते हुए विभिन्न साधनों से सीतामऊ तरफ गया। सीतामऊ के पास ट्रक से उतरकर गांव सूरजनी में उसने भय्यू का पता भी पूछा। वह नहीं मिला तो फिर रात में चलने वाली भीलवाड़ा-भोपाल बस में बैठकर गरोठ गया। गरोठ में वह जेल में साथ रहे किसी साथी से मिला जिसने उसे भवानी मंडी तक छुड़वाया। तब तक सुबह हो चुकी थी। शुक्रवार को भवानीमंडी से उदयपुर तरफ गया और वहां से प्रतापगढ़ सरेंडर के इरादे से पहुंचा था।

लंबे समय से लिप्त है अवैध हथियारों की सप्लाय में अजय जाट

पुलिस ने बंधवार के हत्यारे मनीष बैरागी को 32 बोर की पिस्टल देने वाले अजय जाट को भी हिरासत में लिया है। शहर से सटे ग्राम भुनियाखेड़ी का निवासी अजय जाट भी लंबे समय अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त में लिप्त है। उसके खिलाफ पुलिस थानों में भी कई मामले चल रहे हैं। पुलिस बंधवार हत्याकांड में जाट को धारा 120 बी के तहत आरोपित बना रही है। वैसे भी शहर व आस-पास के गांवों में सिकलीगरों द्वारा बनाए गए अवैध हथियार आसानी से उपलब्ध है। एसपी विद्यार्थी ने इन मामलों में भी कार्रवाई करने को कहा है। अजय से मनीष ने दो पिस्टल मांगी थी। एक पिस्टल वह बाद में देने वाला था।

बैरागी की गिरफ्तारी से कई अफवाहों पर विराम लगा

आरोपित मनीष बैरागी की गिरफ्तारी से दो दिन से फैल रही कई अपवाहों पर विराम लग गया है। इसमें पहली यह थी कि बैरागी व बंधवार के बीच पांच लाख रुपए के लेन-देन को लेकर मसला उलझा था वहीं दूसरी अंकुर अपार्टमेंट के पास किसी जमीन को लेकर बताया जा रहा था। शनिवार को हुई प्रेस कॉन्फे्रंस बैरागी ने डेढ़ लाख रुपए के लेन-देन की बात कही। वही अंकुर अपार्टमेंट के पास किराये की दुकान बताई। इसके अलावा एसपी विद्यार्थी ने यह भी साफ किया कि अभी तक किसी भी भाजपा नेता या अन्य व्यक्ति का इस मामले से कोई संबंध है।

पूरा मामला नासमझी से भरा हुआ लगा

अगर पुलिस द्वारा पेश की गई कहानी पर यकीन किया जाए तो महज छोटी सी नादानी से मंदसौर ने एक जननेता को खो दिया। बैरागी व बंधवार के आस-पास के लोगों के बीच की बातों को अगर सही तरीके से बंधवार को बताया होता तो यह नौबत ही नहीं आती, क्योंकि जब बंधवार आए दिन उनके पास पहुंचने वाले गरीबों व अन्य लोगों की मदद करते ही रहते थे। लगभग पांच-दस हजार रुपए वह बांटते ही रहते थे तो मनीष के 25 हजार रुपए देने में उन्हें कोई समस्या होने जैसी बात नहीं थी।

उक्त सराहनीय कार्य मे सुंदरसिंह कनेष, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, इन्द्रजीत बाकलवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ, राकेष मोहन शुक्ला, नगर पुलिस अधीक्षक मंदसौर, भारतभूषण चौधरी, अ0अ0पु0 ग्रामीण मंदसौर, एस0एल0 बोरासी थाना प्रभारी शहर कोतवाली मंदसौर, विनोदसिंह कुषवाह, थाना प्रभारी वायडीनगर एवं सुजीत श्रीवास्तव, थाना प्रभारी नई आबादी एवं टीम की भूमिका रही।

भरोसा नहीं हो रहा

इस कहानी पर हमको भरोसा नहीं हो रहा है। कहानी बनाई भी जा सकती है। 25 हजार रुपए के पीछे एक कद्दावार नेता की हत्या करना बात समझ में नहीं आ रही हैं। पार्टी में चर्चा कर इस मामले में स्टेंड लेंगे। – यशपालसिंह सिसौदिया, विधायक मंदसौर।

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