हाईकोर्ट ने दिया आदेश 4 सप्ताह में कराए मंदसौर नपा अध्यक्ष का निर्वाचन

मंदसौर. भाजपा पार्षद राम कोटवानी की याचिका पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जिस पर हाई कोर्ट ने फै सला दिया है कि चार सप्ताह में मंदसौर नपाध्यक्ष पद का निर्वाचन कराया जाए। अपनी याचिका पर पार्षद कोटवानी द्वारा स्वयं पैरवी की गई।

उल्लेखनीय है कि नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार के निधन के बाद राज्य शासन ने छह माह के पश्चात नपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस पार्षद मोहम्मद हनीफ शेख को नियुक्त कि या था।

मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की 17 जनवरी 2019 को मृत्यु होने से पद रिक्त हो गया था। भाजपा पार्षद राम कोटवानी ने बताया कि ऐसी स्थिति में नपा अधिनियम एक्ट की धारा 37 के तहत निर्वाचित पार्षदों में से कि सी एक को राज्य शासन द्वारा नाम निर्देशित कर अध्यक्ष बनाया जाना था। लेकि न मप्र कांग्रेस की सरकार द्वारा संविधान का मखौल उड़ाते हुए नियमों के विरुद्ध डिप्टी कलेक्टर की नियुक्ति कर दी गई। जिससे क्षुब्ध होकर पार्षद राम कोटवानी ने न्यायालय की शरण ली और रीट पीटिशन दाखिल कर न्यायालय से मांग की गई कि डिप्टी कलेक्टर की नियुक्ति असंवैधानिक है। तथा निर्वाचित पार्षदों में से एक पार्षद को बिठाना न्याय संगत होगा।

इस पर माननीय उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षकारों को, जिसमें मप्र शासन, राज्य निर्वाचन आयोग, कमिश्नर नगरीय विकास भोपाल, कलेक्टर मंदसौर, सीएमओ मंदसौर को नोटिस जारी कि ए। नोटिसों की तामिल हुई। राज्य शासन द्वारा उच्च न्यायालय में जबाव देने से पूर्व डिप्टी कलेक्टर को हटाकर फिर नियमों के विरुद्ध छह माह पश्चात कांग्रेस पार्षद मोहम्मद हनीफ की नियुक्ति अध्यक्ष पद पर कर दी गई। इस बीच 25 जुलाई माननीय उच्च न्यायालय ने चार सप्ताह के भीतर निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए आदेशित कि या था। लेकि न न ही राज्य शासन न ही मप्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इससे क्षुब्ध होकर पुनः राम कोटवारी द्वारा न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की गई। राम कोटवानी ने बताया इसके बाद राज्य शासन द्वारा एक अध्यादेश लाया गया। इसके बाद शासन ने एक रीड अपील डबल बेंच में दायर कर दी। इसमें उनके द्वारा 25 जुलाई 19 के आदेश को निरस्त करने, स्थगन देने एवं सरीसीमन की दलील देते हुए निर्वाचन नहीं कराए जाने की अपील प्रस्तुुत की। जैसे ही राज्य शासन ने नए नियमों के तहत गजट प्रकाशन कि या गया। उस आदेश के तहत राम कोटवानी द्वारा पुनः माननीय न्यायालय में एक ओर रीड पीटिशन दाखिल की गई। जिसमें राज्य शासन एवं निर्वाचन आयोग को उप चुनाव के लिए निर्देशित करने हेतु रीड पीटिशन में मांग की गई। इसकी सुनवाई 17 दिसंबर 19 को होना शेष थी। इस बीच राज्य शासन द्वारा लगाई गई रीड अपील पर माननीच उच्च न्यायालय द्वारा मंगलवार को अपना फै सला सुनाते हुए मप्र राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह के भीतर निर्वाचन कराए जाने हेतु निर्देशित कि या है।

सत्य परेशान हो सकता है लेकि न पराजित नहीं

मुझे न्याय के लिए राजभवन से लेकर माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। मुझे भारतीय न्याय व्यवस्था पर गर्व है कि उसमें देर जरूर हो सकती है लेकि न अंधेर नहीं। मंदसौर नपा के उपचुनाव की प्रक्रिया को लेकर आज न्याय के मंदिर से लोकतंत्र की जीत हुई है। – राम कोटवानी, भाजपा पार्षद, याचिकाकर्ता

चार सप्ताह में चुनाव के दिए निर्देश
बीजेपी पार्षद राम कोटवानी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने चार सप्ताह में चुनाव कराने के निर्देश दिए है। साथ ही चुनाव का जो नया नियम आया है। उस अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होना है। इसमें निर्वाचित पार्षद मिलकर अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।

आदेश नहीं आया है
नपाध्यक्ष हनीफ शेख ने बताया कि अभी आदेश नहीं आया है। १७ को कोटवानी की लगाई याचिका पर सुनवाई है तब पता चलेगा। जो याचिका खारिज हुई वह तो पूर्व में कोटवानी द्वारा लगाई अवमानना याचिका पर स्टे की थी जो कोटवानी की याचिका पूर्व में खारिज हो चुकी थी। उस मामले की थी।

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