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अक्षय तृतीया पर अंचल में रही वैवाहीक कार्यक्रमों की धूम, आर्थिक तंगी से किसान व व्यापारी त्रस्त

वैशाख माह के द्वितीय पखवाड़े से वैवाहिक व अन्य मांगलिक कार्यों की धूम धड़ाका शुरू हो चुका है वही व्यापारी वर्ग भी सीजन की ग्राहकी में व्यस्त हैं लेकिन आर्थिक तंगी ने अभी भी अपने पांव पसार रखे हैं जिससे ग्रामीण किसान और व्यापारी वर्ग त्रस्त हैं।

उल्लेखनीय है कि खरीफ और रबी सत्र की फसलों को पाने के लिए आठ नो माह तक किसानों का परिवार कृषि कार्य में व्यस्त रहता है उन्हें पारिवारिक व मांगलिक कार्यों के लिए इस अवधि में फुर्सत नहीं मिल पाती हैं तथा आर्थिक दृष्टि से हाथ भी तंग रहता है रबी सत्र की फसल आने के बाद आषाढ़ माह तक कृषि कार्य का विराम लग जाता है यही कारण है कि वैशाख जेष्ठ माह में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में वैवाहिक व अन्य मांगलिक कार्यों का धूम-धड़ाका छाया रहता है ऐसी परंपरा अनुसार वैशाख माह द्वितीय पखवाड़े से नगर सहित अंचल में विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों का धूम धड़ाका शुरु हो चुका है जगह-जगह इन आयोजनों की छटा छाई हुई है।

अविजीत मुहूर्त पर सैकड़ों आयोजन- बुधवार को अक्षय तृतीया पर्व पर समूचे अंचल क्षेत्र में विवाह आयोजन की धूम छाई रही हैं जिससे बाजार में रौनक बढ़ गई बैंड बाजे ढोल धमाकों शहनाई की गूंजों के साथ-साथ मांगलिक गीतों का शोर शराबा गुंजायमान रहा। वृत्त स्तर पर इन आयोजना के चलते बैंड बाजे ढोल धमाकों धर्मशाला व गार्डनों की भारी पूछ-परख रही है एक माह तक इन आयोजनों की बहार अंचल क्षेत्र में छाई रहेगी पारिवारिक मिलन शायरी उल्लास व खुशियों का अद्भुत नजारा इन दिनों देखने को मिल रहा है।

बाजार हुए गुलजार- व्यापारी वर्ग वैशाख माह का बेसब्री से इंतजार करते हैं किसानों के पास रबी फसलों के कारण धन वैभव बरकरार रहने से इन दिनों पारिवारिक कार्यों में अपने हाथ खुले करते हैं वैवाहिक व अन्य मांगलिक कार्यों के चलते बाजार गुलजार दिखाई दे रहा है सभी व्यापारी वर्ग के सीजन की ग्राहकी में रात दिन एक कर रहे हैं तथा व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन में तन्मयता से लगे हुए हैं भीषण गर्मी का पारा उनके उत्साह के आगे नतमस्तक दिखाई दे रहा है।

आर्थिक तंगी ने पांव पसारे- मांगलिक कार्य व सीजन की ग्राहकी के इस दौर में आर्थिक तंगी ने अभी भी अपना पांव पसार रखे हैं जिससे ग्रामीण जन किसान व व्यापारी वर्ग परेशान है इस संबंध में व्यापारियों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से प्रारंभ होता है तथा आठ दस दिनों बाद किसानों को शुन्य ब्याज दर पर शासन द्वारा ऋण प्रदान कर दिया जाता है यहां करोड़ों रुपए की राशि सीधी मार्केट में आ जाते हैं लेकिन इस वर्ष विगत वित्तीय वर्ष की रियल राशि जमा करने की अवधि शासन द्वारा एक माह बढ़ा दिए जा कर 27 अप्रैल कर दी फलस्वरुप ग्रामीणों को अभी तक बैंकों से उक्त ऋण उन्हें नहीं मिल पाया है जिसका मार्केट पर प्रतिकूल असर प्रत्यक्ष रुप से देखा जा सकता है सीजन की ग्राहकी की श्रंखला शुरू हो चुकी है।

यातायात का बढ़ा दबदबा- इन दिनों विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के धूम-धड़ाके के कारण यातायात पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है अधिकांश यात्री बसे खचाखच भरी दौड़ रही हैं परमिट पर चल रही कई बसों को बारात लाने ले जाने में भी लगा दिया जाता है ।

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