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अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के 13वें अधिवेशन में शामिल हुई जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती चिटनीस

समाज अवसर की बराबरी चाहता है दया की नहीं

डॉ अम्बेडकर अपनी योग्यता के दम पर आगे पहुंचे न की आरक्षण के बल पर।

मंदसौर। महिला एवं बाल विकास विभाग व जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के 13वें अधिवेशन में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान मंदसौर में शामिल हुई। अधिवेशन में जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक यशपाल सिंह सिसोदीया, विभिन्न प्रान्तों के प्रदेश अध्यक्ष एवं आमजन उपस्थित थे।

महासभा के दौरान प्रभारी मंत्री श्रीमती चिटनीस ने कहा कि आज के समय में समाज को अवसर की बराबरी की जरूरत है न की दया की। अम्बेडकर अपनी योग्यता के दम पर आगे पहुंचे न की आरक्षण के बल पर। अगर सभी को समान अवसर मिले तो सभी वर्ग देश की प्रगती में अपना अमूल्य योगदान दे सकते है। मनुजता को अखण्ड करना होगा। जाति से उपर उठकर सभी को मानवता एवं नैतिकता को पहचानना होगा। वाल्मीकि से पहले संस्कृत में रामायण जैसे महाकाव्य की रचना किसी ने भी नहीं की। अम्बेडकर ने अन्य धर्म को न अपनाकर बौद्ध धर्म को अपनाया क्योंकि वे भारत के समाज को जडो से अलग नही करना चाहते थे। चन्द्रगुप्त मौर्य स्वयं कोरी समाज से थे और उन्हे अपनी योग्यता के बल पर चाणक्य जैसा गुरू मिला वही कबीर की जाति के बारे में कोई नही जानता लेकिन कबीर स्वयं को कोरी कहते थे। 1857 की क्रांति में वाल्मीकि समाज का बहुत योगदान रहा। रानी लक्ष्मी बाई का साथ वाल्मीकि समाज की महिलाओं ने अन्त तक दिया। मीरा बाई जो कि क्षत्रिय कुल से थी जिन्होने अपने गुरू के रूप में रैदास को अपना गुरू बनाया। इन सब बातों से यही अर्थ निकलता है कि हम सब को सोच बडी करनी होगी तथा जीवन को गहरे अर्थो में समझना होगा।

जिला पंचायत अध्यक्षा ने बताया कि समाज को जागरूक होने की जरूरत है। सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार की लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही है। जिसका समाज के सभी वर्गो को भरपुर लाभ लेना चाहिए। विधायक श्री सिसौदिया ने कहा कि आज के समय में समाज के अंदर सामाजिक समरसता जरूरत है। जबतक समाज में सामाजिक समरसता नही आयेगी तब तक यह भेदवाभ की भावना मन से खत्म नहीं होगी।

आप मुझे विष दें मैं विषपान कर लूंगी
प्रभारी मंत्री चिटनीस ने अपने भाषण के दौरान इंटरनेट पर पढा संत वाल्मिकीजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए अपना उद्बोधन दिया इस पर पंजाब से आये वाल्मिकीजी समाज के दो तीन लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया तब श्रीमती चिटनीस ने सहज और सरल होकर कहा कि मेरी निष्ठा पूरी तरह संत वाल्मिकी जी के प्रति है और रहेगी मेरी ऐसी कोई भावना नहीं थी कि मेरे उद्बोधन से कोई आहत हो मैंने जो पढ़ा वह मैंने कह दिया था। वाल्मिकी जी मेरे लिये भगवान तुल्य है, उनके प्रति मेरी निष्ठा व आस्था में थोडी बहुत भी कमी दिखे तो आप मुझे विष प्रदान करदें मैं विषपान कर लूंगी।

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