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अघोषित बिजली कटौती का प्रचार-प्रसार कर बिजली विभाग को अपमानित किया जा रहा हैं

मन्दसौर। अघोषित बिजली कटौती का प्रचार-प्रसार कर बिजली विभाग को अपमानित किया जा रहा हैं, अपितु वास्तविकता इससे उलट हैं। राजनितिक पार्टियां अपनी रोटियां बिजली विभाग को अपमानित कर उसकी आग में सेकती हैं और विपक्षी पार्टियां आग में घी डालने का कार्य करती हैं हमारी लाइनों एवं उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उसके अनुपात में नियमित प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो रहीं हैं, बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों के भरोसे जैसे-तैसे बिजली देने का कार्य चल रहा हैं, तृतीय श्रेणी के उपकरण एवं सामग्री क्रय की जा रहीं हैं एवं ठेकेदारी प्रथा में कमीशन का खेल चल रहा हैं, जिससे ठेकेदार पैसे बचाने के चक्कर में तृतीय श्रेणी का कार्य कर रहें है । सरकारे आवश्यकता से अधिक बिजली का अनुबंध कर उच्च दामों में बिजली खरीदकर घोटाला कर रही है, वोट बैंक की राजनीति के कारण प्रीपैड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना में रोड़ा अटकाया जा रहा हैं, सरकारे सस्ती बिजली एवं बिल माफी की योजना तो लाती हैं, परन्तु हमारी कंपनियों को इसके बदले में पैसे ना देकर चुना लगाती हैं। हमारे पास तुरंत आये दोष को ठीक करने के लिये ही पर्याप्त विधुत अमला नहीं हैं, तो लाईनों के रखरखाव की बात छोड़ो, लोगों को 24 घण्टे बिजली चाहिए लेकिन हमारे पास 8 घण्टे की बिजली देने के लिये भी पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं, लाईनों के रखरखाव के लिये गये शटडाउन एवं आंधी, तूफान, बिजली कड़कने एवं तकनीकी कारणो से आये दोष को भी बिजली की अघोषित कटौती का नाम देकर लोगों में रोष व्याप्त किया जा रहा हैं, हम सभी समर्पित होकर जान जोखिम में डालकर भी सतत विद्युत प्रवाह में लगे हुये हैं, फिर भी उसके बदले में निलंबन जैसी कार्यवाही अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध हो रही हैं, विद्युत परिवार को प्रताडि़त किया जा रहा हैं, तनाव के कारण कार्य को शीघ्रता से समाप्त करने के चक्कर में हम लापरवाही कर बैठते है और अपने प्राणों की आहूति दे बैठते हैं।

हमारे सोने की चिडि़या वाले विभाग को राजनीतिक पार्टियों ने ही वोटबैंक की राजनीति के कारण कंगाल किया हैं। यह जानकारी विद्युत फेडरेशन के जोनल सचिव डी एस चंद्रावत व राजेंद्र चाष्टा ने दी।

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