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अच्छा दिखने का नहीं बल्कि अच्छा बनने का प्रयास करेा- आचार्य श्री विश्वरत्नसागर सूरिश्वरजी

मन्दसौर निप्र। एक दूसरे से अच्छा दिखने की चाहत मतं मानव का ध्यान अपना रूप व सौन्दर्य निखारने में ही लगा रहता है। कभी कौन सी हेयर स्टाईल है तो कभी कौन सी, महिलाएं अपनी ब्यूटी को निखारने में ज्यादा चिंतित नजर आती है अर्थात् बाहरी सुन्दरता को निखारने में मानव की अधिक रूचि रहती है, लेकिन यह बाहरी सुन्दरता अस्थायी है। जैसे-जैसे आयु बड़ेगी, यह सुन्दरता नष्ट होती जायेगी। इसलिये बाहरी सुन्दरता की चिंता छोड़ अपने अंतकरण (मन) की सुन्दरता की चिंता करे।
उक्त उद्गार आचार्य श्री विश्वरत्नसागरसूरिश्वरजी म.सा. ने संजय गांधी उद्यान नवरत्न धाम में आयोजित विशाल धर्मसभा में कहे। आपने बुधवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि मन अंतकरण की सुन्दरता श्रावक व श्राविकाओं के जीवन का सर्वोच्च आभूषण है, अच्छा दिखने की नहीं अच्छा बनने का प्रयास करे। क्रीम, पावडर, हेयर डाई लगाकर उम्र मत छिपाओ, बल्कि मन के जो विकार है उन्हें मिटाओ। अपने मेकअप की चिंता छोड़ो, अपनी अंतर आत्मा को परमात्मा से जोड़ो।
बाहरी दाग की नहीं मन के दोषों की चिंता करो- आचार्य श्री ने कहा कि अपनी उम्र के कारण आयी झूरिर्याें को छिपाने व शरीर के दाग धब्बों को मिटाने के लिये हम प्रतिदिन मेकअप करते है, यह मेकअप शाम होते-होते उतर जाता है क्योंकि मेकअप से दाग व झूर्रिया छिपायी जा सकती है, मिटाई जा नहीं जा सकती, लेकिन यदि हम मन के दोषों का चिन्तन करेंगे और उन्हें मिटाने का प्रयास करेंगे तो इसमें सफलता मिल सकती है।

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