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अनंंत चतुर्दशी पर्व पर निकली आकर्षक झांकियां

अनंत चतुदर्शी पर्व पर को बड़े ही हर्षोउल्‍लास के साथ मनाया गया रात्री को अनेक गणेश ग्रुप द्वारा मनमोहक, आकर्षक विघुत साज सज्जा से अलंकृत झांकी निकाली गयी। इन झांकियों को मंदसौर नगर व उसके आसपास की जाग्ररुक धर्मालुर्जनो ने काफी सराहा। झांकी को देखने के लिये लोग दूर- दूर से आये तथा उसे देखने के बाद खुब सराहना की। झांकी के साथ व्यायाम शाला के पहलवानो ने भी अपनी उत्कृष्ट व्यायाम कला का प्रदर्शन किया। झांकी व अखाडे के प्रदर्शन को खुब सराहा गया। इस झांकी व अखाडा नई आबादी स्थित जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सामने से प्रारंभ हुआ तथा नगर क मुख्य मार्गाे व चैराहो पर प्रदर्शन के उपरांत शिवना नदी के तट पर पहुंचकर समापन की ओर अग्रसर हुआ। सायंकाल से लेकर अगले दिन प्रातः काल तक झांकी व अखाडो के प्रदर्शन को हजारो लोगो ने देखा और उसे सराहा।
अखाडे के माध्यम से व्यक्ति अपनी शरारिक क्शमता तो बढता ही है साथ ही सनातन धर्म की संस्कृति से भी परिचित होता है या यू कहे कि अखाडो में संस्कृति एवं कला दोनो का समावेश है. वर्तमान में युवा वर्ग अखाडो की ओर आर्कशित हो रहे है। इस पुरानी परम्परा को जिन उस्तादो ने चला रखा है वे प्रशंसा के पात्र है। क्योकि विकट परिस्थिति में अखाडो का संचालन करना बेहद कठिन होता है। शस्त्रकला का प्रदर्शन ल्लेखनीय है कि अनंत चतुदर्शी पर्व पर झांकीयो के साथ अखाडो के पहलवान भी अपनी कला का प्रदर्शन करते है।
नाचते-गाते युवक व युवतियाँ गणेशजी को लेकर तेलिया तालाब, पशुपतिनाथ व मुक्तिधाम पर शिवना नदी के किनारे पहुँचे। यहाँ विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गणेशजी का विसर्जन किया। किसी ने गणेशजी को हाथ ठैले की सवारी कराई तो किसी ने लोडिंग पर विराजित किया था। किसी ने गणपति महाराज को कार की सवारी भी कराई। बच्चे तो साइकल पर गणेशजी को लेकर विसर्जन स्थल पर पहुँचे। ढोल-ढमाके के साथ दी बप्पा को विदाई गणेशोत्सव समिति द्वारा 10 दिन तक गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया गया। अनंत चतुदर्शी पर ढोल-ढमाकों के साथ नागरिकों ने बप्पा को तेलिया तालाब में विसर्जित कर विदाई दी। वहा बप्पा को ‘अगले बरस तू जल्दी आ..’ के नारों के साथ विदाई दी गई।
प्रशासन ने किए थे पूरे इंतजाम जिला, पुलिस प्रशासन व नगर पालिका ने प्रतिमा विसर्जन स्थलों पर विशेष व्यवस्था की थी। इस बार तेलिया तालाब में पानी अधिक होने व तालाब गहरा होने के कारण रस्सियाँ बाँधी गई।

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