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अनंत चतुर्दशी पर निकली मनोहक झांकिया – गणेश जी को दी विदाई

मंदसौर | सनातन या हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि संसार को चलाने वाले प्रभु कण-कण में व्याप्त हैं। ईश्वर जगत में अनंत रूप में विद्यमान हैं। दुनिया के पालनहार प्रभु की अनंतता का बोध कराने वाला एक कल्याणकारी व्रत है, जिसे ‘अनंत चतुदर्शी’ के रूप में मनाया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को ‘अनंत चतुर्दशी’ कहा जाता है। इस दिन अनंत भगवान (श्रीहरि) की पूजा करके बांह पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। भक्तों का ऐसा विश्वास है कि अनंत सूत्र धारण करने से हर तरह की मुसीबतों से रक्षा होती है। साथ ही हर तरह से साधकों का कल्याण होता है।

गौरीनंदन गणेश को विदाई देने के लिए अनंत चतुर्दशी पर मंगलवार रात झांकियों का चल समारोह निकला। इसमें पौराणिक, धार्मिक, सामाजिक बदलाव का संदेश लेकर निकलीं 17 झांकियों और 11 अखाड़ों को निहारने हजारों लोग उमड़े। 7 झांकियां श्रीकृष्ण लीला पर आधारित रहीं। इससे पहले कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव व एसपी मनोजसिंह ने द्विमुखी चिंताहरण गणेश मंदिर में पूजन किया। चित्र- नेहरू बस स्टैंड पर त्रिनेत्र ग्रुप की भगवान विष्णु की 24 अवतार की झांकी का।

गौरीनंदन की दस दिन तक पूजन करने वालों ने मंगलवार को सुख-समृद्धि की कामना के साथ बप्पा को विदाई दी। मंगलवार सुबह से ही गाजे-बाजे से विसर्जन चल समारोह निकले। दिनभर बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ… गूंजता रहा। नपा ने शिवना किनारे कैंप लगाकर नदी में मूर्तियों का विसर्जन रोका। 5 हजार से ज्यादा मूर्ति दिनभर में एकत्रित कर खदानों के जलस्रोत तक पहुंचाईं।

भगवान गणेश की आराधना के बाद विदाई को लेकर मंगलवार को दिनभर श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। शिवना तट पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था से बप्पा का पूजन कर नदी के जल में डुबकी लगवाई। उसके बाद नपाकर्मियों ने गणेश प्रतिमा लेकर नपा के वाहनों पर रखीं। इस बीच कई छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन भी श्रद्धालुओं ने नदी में कर दिया। बावजूद नपा के प्रयासों से दिनभर मूर्तियों को नदी में विसर्जन से रोका गया। प्रतिमा के विसर्जन के लिए सुबह से ही चल समारोह निकले। इसके चलते गांधी चौराहा, बीपीएल चौराहा, नाहटा चौराहा, महाराणा प्रताप चौराहा, आजाद चौक सहित अन्य स्थानों पर यातायात का भारी दबाव रहा।

खदानों में भरे जलाशय पर ले गए प्रतिमाएं – शहर के जलाशयों में मूर्ति विसर्जन रोकने के लिए नपा ने विशेष कैंप लगाए थे। पशुपतिनाथ घाट, मुक्तिधाम, तेलिया तालाब पर लगाए कैंप के माध्यम से नपा ने जलाशय में विसर्जन के पूर्व ही मूर्तियों ले लीं। राजस्व व पुलिस विभाग का अमला भी सतर्क रहा। मूर्तियों को नपा ने 3 डंपर, 14 ट्रैक्टर का उपयोग कर 5 हजार से ज्यादा मूर्तियां खदानों पर भेजीं। नपा टीम प्रभारी सुधीर जैन ने बताया इसके लिए अलग-अलग पाइंट पर 30 कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई थी।

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