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अनदेखी : शहर के सारे नाले बिना ट्रीटमेंट प्लांट के शिवना में बहा रही है नपा

अनदेखी : नपा व पीएचई न्यायालय में स्टॉपडेम तोड़ने की कर रहे हैं बात, शहर के सारे नाले बिना ट्रीटमेंट प्लांट के शिवना में बहा रही है नपा

मंदसौर। शिवना नदी में नगर पालिका सारा गंदा पानी डाल रही है। रामघाट से लेकर मुक्तिधाम तक सात जगहों पर बड़े नालों से सारा गंदा पानी शिवना में डालकर पशुपतिनाथ मंदिर के सामने भी उसका पानी हाथ लगाने लायक नहीं रहने दिया गया है। अब लोको उपयोगी सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालत में शिवना प्रदूषण को लेकर चल रहे मामले में नपा और पीएचई अलावदाखेड़ी क्षेत्र में शिवना पर बने 40 वर्ष पुराने स्टॉपडेम को प्रदूषण के लिए दोष दे रहे हैं जबकि स्टापडेम जनसहयोग से इसलिए बनाया गया था कि आस-पास के जलस्त्रोतों में जलस्तर बना रहे और किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी मिलता रहे।

शिवना में बढ़ रही काई को नपा अधिकारियों ने भगवान के भरोसे छोड़ दिया है। सफाई को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। महाशिवरात्रि से पहले पशुपतिनाथ मंदिर के सामने काई जमने के बाद नपा अमले ने 20 से अधिक कर्मचारियों के साथ सफाई शुरू की थी। दो दिन के बाद हवा से काई रामघाट की ओर चली गई। अधिकारियों ने पशुपतिनाथ की कृपा बताकर सफाई कार्य बंद कर दिया। अब काई दाेबारा रामघाट से पशुपतिनाथ की और बढ़कर फैल रही है। वहीं शिवना में जलकुंभी भी नजर आने लगी है जो नपा के लिए समस्या का कारण बन सकती है। नपा स्वास्थ्य अधिकारी केजी उपाध्याय का कहना है कि त्याेहार नजदीक होने के कारण नपा ने अस्थायी व्यवस्था की थी। शिवना से काई हटाने का प्लान तैयार कर लिया है। एक-दो दिन में काम शुरू कर शिवना को साफ किया जाएगा।

नगर पालिका का 2002 से लेकर अभी तक का रिकार्ड खंगाला जाए तो शिवना में नाले मिलने से रोकने के नाम पर लगभग दो करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी सभी नाले उसी जगह शिवना में मिल रहे हैं। प्रतिदिन नगर पालिका शहर का गंदा पानी अभी भी शिवना में डाल रही है। इसके बाद भी अपने दोष को वह दूसरों पर मढ़ने की तैयारी में हैं। अलावदाखेड़ी में शिवना नदी पर एक स्टॉपडेम लगभग 40-50 वर्ष पहले आस-पास के किसानों ने जनभागीदारी से बनाया था। उस समय के प्रशासन की सहमति भी थी। इससे खेतों में कुओं का जलस्तर भी बढ़ा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी मिल रहा था। पर धीरे-धीरे नगर पालिका ने इतना गंदा पानी शिवना में छो़ड़ा कि अब यहां ठहरने वाला पानी भी दूषित हो गया है। किसान अब इसे अपने खेतों में सिंचाई के लिए भी नहीं ले सकते हैं। अब जब लोकोपयोगी सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालत में पैरालीगल वालेंटियर माधुरी सोलंकी ने शिवना प्रदूषण को लेकर वाद दायर किया है तो नपा व जल संसाधन विभाग के अधिकारी सिर्फ इसी स्टॉपडेम को गंदगी का कारण बताते हुए तोड़कर गंदा पानी बहाने का प्रतिवेदन कोर्ट में पेश कर रहे हैं जबकि समस्या की जड़ रामघाट से लेकर मुक्तिधाम तक शिवना में मिल रहे सात बड़े नाले हैं।

अभी तक शिवना किनारे गड्ढे खोदना शुरू नहीं किए नपा ने

25 फरवरी को कोर्ट में लगी तारीख पर कोर्ट में पहुंचे नपा के अधिकारियों ने जवाब दिया कि शिवना को साफ करने की योजना शासन की स्वीकृति हेतु लंबित है। जब तक हम शिवना किनारे गड्ढे खोदकर गंदा पानी उसमें लेकर निस्तार करेंगे। हालांकि इस बात को एक सप्ताह पूरा होने को है और नगर पालिका ने अभी तक शिवना किनारे गंदा पानी रोकने के लिए गड्ढों की खुदाई भी शुरु नहीं की है।

जिला प्रशासन व जल संसाधन विभाग ने भी सौंपा प्रतिवेदन

शनिवार को इसी कोर्ट में जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम कार्यालय ने व जलसंसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने उपस्थित होकर अलावदाखेड़ी के पास बने स्टॉपडेम से गंदा पानी खाली कराने को लेकर एक प्रतिवेदन सौंपा है। हालांकि यह पता नहीं चल पाया कि इसमें क्या लिखा गया है।

इन क्षेत्रों से मिल रहा है शिवना में गंदा पानी

शिवना नदी में प्रतापगढ़ पुलिया के नीचे बुगलिया खाल, खानपुरा के पीछे, नीलगर मोहल्ला, पशुपतिनाथ मंदिर के पास नई पुल, छोटी पुलिया, कलेक्टोरेट मार्ग, मुक्तिधाम के समीप से आ रहे नालों से हजारों गैलन गंदा पानी रोज शिवना नदी में मिल रहा है। शिवना नदी की दुर्दशा से परेशान होकर शोर्या दल की पैरालीगल वालेंटियर माधुरी सोलंकी ने लोक उपयोगी सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालत में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहां एक वाद दायर किया था। कोर्ट के निर्देश पर 25 जनवरी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने नदी के पानी के सेंपल लिए थे। इसके बाद कोर्ट में रिपोर्ट दी थी।

वर्तमान में ऐसा है शिवना का पानी

शहर के 90 प्रश से अधिक घरों से निकल रहा गंदा पानी सात स्थानों से शिवना नदी में सीधे डाला जा रहा है। नदी का पानी दूषित होने की शिकायतों के बाद कोर्ट ने पानी की जांच के निर्देश दिए थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने जनवरी में लगभग पांच जगह से नदी में मिल रहे नाले के पानी के सेंपल लेकर जांच की। लैब में हुई जांच में शिवना के पानी में ठोस घुलनशील तत्व (टीडीएस) 2000 से अधिक पाए गए है जबकि इनकी संख्या 500 होना चाहिए। नाईट्रेट 112 पाया गया है जबकि पेयजल में यह शून्य होना चाहिए। पेयजल में गदलापन की लिमिट पांच मैग्निशियन है जबकि यह 9.9 है। शिवना नदी के पानी में बैक्टीरिया इतने अधिक है कि लैब में इनकी संख्या काउंट ही नहीं हो पाई थी। जबकि शुद्घ पानी में बैक्टिरिया अनुपस्थित होना चाहिए।

योजना तैयार कर रहे

शिवना शुद्घिकरण के लिए नपा लगातार प्रयास कर रही है। हमने शिवना किनारे गड्ढे करने के लिए जगह भी देख रहे हैं। शिवना को साफ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। -केजी उपाध्याय, स्वास्थ्य अधिकारी, नपा

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