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अपना घर में बच्चों से कहा एडीजे श्री जे.सी.राठौर ने-विभिन्न विधाओं में श्रेष्ठता प्राप्त बच्चों को प्रदान किये उपहार

देश का एक अच्छा नागरिक बनने का लक्ष्य हो बच्चों का- गलत हरकत करने वालों की निडर, निर्भय होकर बच्चों को करना चाहिये शिकायत

मन्दसौर। 17 अप्रैल को जिला विधिक साक्षरता प्राधिकरण सचिव माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जे.सी. राठौर बच्चों के हित में अपना घर के बच्चों को विधिक नियमों का संज्ञान कराने उपस्थित हुए। जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री योगेश बंसल, महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्री आर.के. महाजन, समाजसेविका श्रीमती चित्रा मण्डलोई, समाजसेवी बंशीलाल टांक उपस्थित थे। श्री राठौर ने बच्चों को उनके हित में विधिक कानूनों से अवगत कराते हुए कहा कि बच्चों को स्कूल जाते समय और वापस स्कूल से आते समय उनके साथ जब भी कोई गलत हरकत, संकेत करने लगे, निडर तथा निर्भय होकर विरोध-प्रतिरोध करते हुए अपने शिक्षक को बताना चाहिये और शिक्षक को तत्काल थाने में रिपोर्ट करना चाहिये जिससे आरोपी को उचित दण्ड दिलवाया जा सके। आपने कहा कि बिना लर्निंग लायसेंस के 14 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों को वाहन नहीं चलाना चाहिये। अपना वाहन दूसरों को विक्रय करने के पश्चात् वाहन का रजिस्ट्रेशन व बीमा विक्रेता को ट्रांसफर कर देना चाहिये।

श्री राठौर ने बच्चों को संघर्षों से जूंझने व मुकाबला करने की प्रेरणा देते हुए खदान से निकले दो पत्थर जिसमें एक मंदिर में शिव के रूप में पूजा जाने लगा तथा दूसरे को मंदिर की सीढ़ी बनना पड़ा उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही खदान से पैदा जब सीढ़ी के पत्थर ने मंदिर में शिव रूप में पूजित पत्थर से पूछा की एक ही खदान से निकलने के बाद सहोदर होते हुए भी मुझे सबकी ठोकरों से गुजरना पड़ रहा है और तुम मंदिर में पूजित हो रहे हो ऐसा क्यों ? तब शिव बने पत्थर ने कहा कि हजारों थपेड़ों से गुजरने के बाद भी वह टूटा नहीं, मजबूत बना रहा, अपने संकल्प पर दृढ़ रहा इसलिये मंदिर में सबका पूजास्पद बना ओर तुम मामूली आघात में ही टूट गये इसलिये बाहर सीढि़यों के रूप में रहना पड़ा।

श्री राठौर ने अपना घर में अपना घर के नाम के अनुकूल ही पाकर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा यहां आकर उन्हें अपनत्व महसूस हुआ है। आपने वै अपने घर की सहायता के लिये सदैव तत्पर रहेंगे।

जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री बंसल ने कहा कि विधी-कानून की जानकारी सबको होना आवश्यक है। कानून की जानकारी-विधिक सेवा अधिनियम के तहत विधिक सहायता कोई प्राप्त करने से कोई भी व्यक्ति वंचित नहीं रह सकता। गरीबी के कारण उसमें आर्थिक अभाव आड़े  नहीं आयेगा। एस.सी./एस.टी. के अतिरिक्त सामान्य वर्ग का एक लाख तक की हैसियत वाला कोई अमीर भी यह सहायता ले सकता है। शिक्षा व अन्य विषयों से संबंधित और भी कई कानून बने है जिनका समय-समय पर उपयोग किया जाना चाहिये।  महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्री महाजन ने कहा कि कानून तो है परन्तु कौन से कानून का उपयोग कब, कैसे और कहां पर किया जाना है, इसकी जानकारी होना आवश्यक हैं। कानून हमेशा हमें निर्भयता प्रदान करने के लिये बनाया गया है।  लायनेस क्लब की श्रीमती चित्रा मण्डलोई ने कहा कि लायनेस क्लब परिवार परामर्शदाता सोसायटी मूलतः बच्चों/बच्चियों के लिये बनी है। परिवारों को विघटन से रोकने के लिये तथा प्रताडि़त महिलाओं के साथ ही कभी-कभी पुरूष भी जो प्रताडि़त होते रहते है उन सबके हित में यह संस्था बनी है। कैसी भी परेशानी अथवा समस्या हो इस संस्था से परामर्श करने के लिये सम्पर्क किया जा सकता है।

प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों का पुष्पहारों से बहुमान हुआ। अपना घर के संबंध में परिचय देते हुए अपना घर अध्यक्ष ब्रजेश जोशी ने कहा कि 18 वर्ष पूर्व अपना घर संस्थान जो बाल अनाथाश्रम के नाम से जाना जाता था वह पूर्ण रूपेण आज जनसहयोग से संचालित होकर अनाथ से सनाथ होकर अपना घर के नाम से सबका उपादेय-स्नेह पात्र-प्रेरणास्पद बना हुआ है।  अतिथियों द्वारा इस अवसर पर अपना घर की बालिका कंचन द्वारा परीक्षा में 93 प्रतिशत, सपना द्वारा 86 प्रतिशत अंक लाने, जुड़ो -कराटे तथा योग में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिये कंकू को एवं सोशल (बीएसडब्ल्यू) में 65 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर शिल्पा एवं ब्यूटी पार्लर में सुनिता को उपहार देकर पुरस्कृत किया गया।

उपस्थित रहे- लायनेस क्लब अध्यक्ष उषा चौधरी, अपना घर अधीक्षिका भारती शर्मा, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रीमती हेमलता सोनी, नर्स श्रीमती मेहनाज अंसारी, श्रीमती सरिता कचौली आदि। संचालन ब्रजेश जोशी ने किया एवं आभार संस्थापक अध्यक्ष राव विजयसिंह ने माना।

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