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अपनी जीवित बेटी का एक पिता ने क्यो किया मृत्यु भोज का आयोजन?

मंदसौर। जिस पिता ने 19 साल तक अपनी बेटी पर आंच नहीं आने दी हो, उसकी हर बात मानी हो, उसके हर सुख का ध्यान रखा हो। एक दिन वो बेटी अपने ही पिता को पहचानने से इनकार कर दे तो पिता पर क्या गुजरेगी। पिछले दिनों मंदसौर थाने में यह घटनाक्रम हुआ था। क्योंकि बेटी ने घर से भागकर शादी कर ली थी और पिता बेटी को समझाने गए थे। इसके बाद गुस्साए पिता ने भी बेटी को मृत मानकर उसका मृत्यु भोज रखा।  हालांकि पंचों और गांववालों के दबाव में पिता ने मृत्युभोज भी निरस्त कर दिया था।

ऐसा ही एक मामला मंदसौर जिले में सामने आया है। एक बेटी ने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर अपने प्रेमी से घर से भागकर शादी कर ली। जब यह मामला थाने पहुंचा तो बेटी ने अपने पिता को ही पहचानने से इनकार कर दिया। पुलिस वालों से उसने कहा कि वो इस आदमी को नहीं जानती है।

मामले के मुताबिक कुचदौड़ गांव में 19 साल की एक बेटी अपने माता-पिता के साथ रहती थी। पास ही के गांव का एक युवक का उसके यहां आना-जाना था। दोनों प्यार करने लगे। एक दिन दोनों ने गुपचुप शादी कर ली। लड़की के माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर शादी करें।

 

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मैं नहीं जानती ये कौन हैं
बेटी ने घर से भागकर शादी कर ली। जब इस मामले की रिपोर्ट थाने में की गई। तो बेटी अपने पति के साथ थाने पहुंची। जहां पिता अपनी बेटी को इस मामले में समझाइश दे रहे थे तभी पुलिस वालों के सामने बेटी बोल पड़ी कि मैं नहीं जानती यह कौन हैं।

नाराज पिता ने दिया मृत्यु भोज
बेटी की इस हरकत पर पिता भी बेहद नाराज हो गए। उन्होंने भी बेटी से सभी रिश्ते तोड़ लिए। उन्होंने बेटी को मृत समझकर मृत्यु भोज करने की ठान ली। बकायदा पिता ने शोक संदेश छपवाकर रिश्तेदारों को मृत्यु भोज के लिए बुलाया।

बेटी ने नहीं जाना पिता का दर्द
बेटी के माता-पिता और उनके करीबी रिश्तेदारों में बेटी के व्यवहार पर दुख का माहौल है। परिवार से जुड़े लोग कह रहे हैं कि बेटी ने एक पिता का दर्द नहीं समझा। 19 साल की बेटी ने परिवार के विरुद्ध कक्षा 6 से साथ-साथ पढ़ने वाले युवक से कोर्ट मैरिज कर ली। लोग कहते हैं कि पिता और उनके परिजनों ने काफी समझाया, लेकिन बेटी ने एक न सुनी।

जब पुलिस थाने में थाना प्रभारी के सीमने बेटी ने पिता के लिए कह दिया कि मैं नहीं जानती कि ये कौन लोग हैं। इसके बाद माता-पिता के पैरो तले जमीन खिसक गई। वे दुखी हौकर घर लौट गए। जाते हुए पिता ने बेटी से इतना ही कहा कि बेटी, मैंने इसी दिन के लिए पढ़ाया था कि आज तू अपने माता-पिता को ही नहीं पहचान पाई।

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