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अपनी नाजायज मांगो को लेकर दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे बैंककर्मी ग्राहकों से अभद्र व्यवहार के लिए प्रसिद्ध सरकारी बैंककर्मी

मन्दसौर। अपनी नाजायज मांगों को लेकर सरकारी बैंककर्मी दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहें। इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की सभी बैंके बंद रही जिससे कामकाज पूरी तरह ठप्प रहा।  बैंक यूनियन के शीर्ष संगठन युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आव्हान पर घोषित 2 दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन भी बैंक कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर रहे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के पिछले एक वर्ष से लगातार भारतीय बैंक संघ के साथ मिटिंग करने के बाद भी केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि संस्था के रूप में आईबीए ने अपनी हठधर्मिता का परिचय देते हुए केन्द्र सरकार के इशारे पर मात्र 2 प्रतिशत वेतन वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जिसके विरोध में 2 दिवसीय हड़ताल की गई। हड़ताल का नोटिस 1 माह पूर्व दे दिया गया था किन्तु भारतीय बैंक संघ ने समाधान निकालकर इसे रोकने की कोई पहल नहीं की फलस्वरूप हड़ताल पर जाने को बैंक कर्मी मजबूर हुए। शासन की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चलाने में बैंकों का अहम रोल रहा है जैसे जन-धन, अटल पेंशन योजना, सुकन्या योजना, गोल्ड बॉण्ड आदि चलाने में बैंकों  पर भरोसा जताया गया और बैंक कर्मियों ने इन योजनाओं को दिन रात एक करके सफल बनाया है। जिस पर हमारी केन्द्र सरकार गर्व महसूस करती है किन्तु वेतन वृद्धि के नाम पर 2 प्रतिशत का शर्मनाक प्रस्ताव दिया है। जिसे सुनकर केवल शर्म ही महसूस होती है। जो बैंक कर्मियों का अपमान भी है।

गत सात वर्षांे में 4 लाख 95 हजार करोड़ के लोन खराब ऋण में डाले गये है। वहीं गत 4 वर्षों में 3 लाख 15 हजार 465 करोड़ रू. के लोन खराब हुए है। सन् 2016-17 में बैंकों का ग्रास प्राफिट लगभग 1 लाख 59 हजार करोड़ हुआ है फिर भी बैंकों को घाटे में बताकर वेतन वृद्धि के नाम पर आनाकानी की जा रही है। बड़े-बड़े उद्योगपतियों के बढ़ते एन.पी.ए. के बारे में बैंक उच्च प्रबंधन व शासन की नीतियां जिम्मेदार है। उनके लिये बढ़ते प्रावधान का खामियाजा बैंक कर्मी क्यों भुगते ? बैंक यूनियन हमेशा से खराब ऋणों की सख्ती से वसूली व दृढ़ कानून की पैरवी करती रही है जिससे बैंक की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हो सके। बैंक कर्मियों की वेतन वृद्धि की मांग न्यायोचित है जिसे सरकार को तुरंत मान लेना चाहिए।

उक्त आशय के उद्गार बैंक कर्मियों के नेता श्री महेश मिश्रा, श्री निवास मोड़, संजय सेठिया, अनिल जैन, शिवरमन पाटीदार, रमेशचन्द्र जैन, सुभाष भण्डारी, डी.सी. सांखला, नगेन्द्र श्रीवास्तव, सुरेन्द्र संघवी, जिनेन्द्र राठौर, कन्हैयालाल पारूण्डलिया ने कहे। इस अवसर पर रमेश देवड़ा सहित सैकड़ों मल्हारगढ़, पिपलिया, दलौदा, सीतामऊ के भारी संख्या में बैंक कर्मियों ने भाग लेकर प्रदर्शन किया। सभा का संचालन जिनेन्द्र राठौर तथा आभार राजेन्द्र शिव चाष्टा ने माना।

आधी कीमत में ज्यादा काम कर रहे निजी बैंककर्मीसरकारी बैककर्मी टाइम से बैक आए या नहीं आए लेकिन समय से पूर्व वे अपनी सीट जरूर छोड़ देते है। अच्छी खासी मोटी तन्ख्वाह के बावजूद बैंककर्मी अपनी वेतनवृद्धि की बात कर रहे है। जबकि निजी बैंको में उनसे आधी तन्ख्वाह पर कर्मचारी उनसे अधिक कार्य कर रहे है। अब समझा जा सकता है कि बैंककर्मियों की हडताल कितनी जायज है।

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