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अब कचरे से भी होगी मंदसौर नगर पालिका की आय

केंद्र सरकार द्वारा जनवरी माह में स्वच्छता के लिए सर्वे किया जाना है। सर्वे के दौरान शहर से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था होने पर सरकार द्वारा शहर को विशेष पैकेज दिया जाएगा। ऐसे में नपा ने सर्वे में श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने के लिए कचरा प्रबंधन की पूरी तैयारी कर ली गई है। नपा द्वारा प्रतिदिन शहर से 45 से 50 टन कचरा एकत्र कर गुराड़िया देदा में बने ट्रेचिंग ग्राउंड पर डाला जा रहा है। अभी अलग-अलग कचरा एकत्र करने की व्यवस्था नहीं होने से पॉलीथिन, गीला व सूखा कचरा एक साथ ही ग्राउंड पर डाला जा रहा है। वहां करीब दस कर्मचारियों द्वारा कचरे से पॉलीथिन को अलग करने का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद कचरे में से खाद् बनने लायक कचरे को अलग किया जा रहा है। ग्राउंड पर ही पोकलेन मशीन के माध्यम से जैविक खाद बनाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोदने का कार्य भी अंतिम चरण में चल रहा है। इन गड्ढों में फूड कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी।

प्रतिदिन निकल रही तीन टन पॉलीथिन
नपा कर्मचारियों द्वारा गत तीन दिन से कचरे से पॉलीथिन व ऐसे कचरे को अलग करने का कार्य किया जा रहा है जिससे खाद् नहीं बन सकती है। वहीं खाद बनने लायक कचरे को अगल कर गड्ढो में डाला जाएगा। नपा अधिकारी के अनुसार प्रतिदिन 50 टन कचरे में से करीब तीन टन पॉलीथिन का कचरा निकल रहा है।

परिवहन खर्च भी निकलेगा
नपा कर्मचारियों द्वारा ट्रेचिंग ग्रउंड पर ही पॉलीथिन का अलग ढेर लगाया जा रहा है, जिसे बाद में नीमच जिले में खोर स्थित सीमेंट फैक्ट्री में विक्रय किया जाएगा। नपा स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार अभी फैक्ट्री में 7 से 8 रुपए किलो के मान से जलाने के लिए पॉलीथिन का क्रय किया जा रहा है। इससे पॉलीथिन के कचरे का निपटारा भी होगा व परिवहन का खर्च भी निकल जाएगा।

कचरे से बनाएंगे खाद
ट्रेचिंग ग्राउंड पर पोकलेन मशीन के माध्यम से करीब 8 फीट गहरे, 20 फीट चौड़े गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं। इनमें पंद्रह फीट तक कचरा डालने के बाद चार से पांच फीट जगह छोड़ी जाएगी। उसके बाद वापस पंद्रह फीट कचरा डाला जाएगा। कचरे में हवा व नमी बनाने के लिए गड्ढे के मध्य जगह छोड़ी जाएगी। इसके बाद कचरे में गोबर डालकर पानी छोड़ा जाएगा। करीब दो से तीन माह में इन गड्ढों में जैविक खाद बनकर तैयार होगी, जिसे किसानों को बेचा जाएगा।

पॉलीथिन का करेंगे विक्रय
कचरे से खाद बनाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। दो से तीन माह में खाद तैयार होगी, जिसे बाद में किसानों को विक्रय किया जाएगा। कचरे से पॉलीथिन को अलग किया जा रहा है, जिसे खोर की सीमेंट फैक्ट्री में विक्रय किया जाएगा। वहीं ऐसा कचरा जिससे खाद नहीं बनेगी, उसे अलग गड्ढों में डाला जाएगा। इसे बाद में रिसायकल करने का प्रयास करेंगे। -केजी उपाध्याय, स्वास्थ्य अधिकारी, नपा

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