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अब नहीं लड सकता बदमाश लाला पठानों के खिलाफ लडाई!

मंदसौर। बदमाश लाला पठानों द्वारा एक करोड की फिरौती को लेकर अपनी लडाई रहे अजय सोनी ने व्‍यथीत होकर अब इस लडाई को नहीं लडने का मन बना लिया है। इस लडाई में न तो मुझे पुलिस प्रशासन का साथ मिला और न ही किसी जनप्रतिनिध से लेकर सत्‍तापक्ष सरकार का। लचर कानून व्‍यवस्‍था एवं न्‍याय व्‍यवस्‍था के कारण में काफी हताश एवं दुखी हू।

उक्‍त बात एक प्रेसवार्ता में डायमण्‍ड ज्‍वेलर्स के अजय सोनी ने कही। भयमुक्‍त सेवा संस्‍थान पर आयोजित इस प्रेसवार्ता में अजय सोनी ने बताया कि मैं और मेरा परिवार में बदमाश लाला पठानों से हार चुके है। बदमाश लाला पठानों के खिलाफ लडते लडते अब मेरी हिम्मत भी जवाब दे गई है। इस लडाई में हमारा साथ न तो पुलिस प्रशासन ने दिया नहीं सत्‍तापक्ष सरकार ने और नहीं किसी जनप्रतिनिधि ने दिया। अब मैं समझ चुका हूं कि भारत जैसे देश में इतना जल्‍दी न्‍याय नहीं मिलता है। इसलिए मैं मेरी लड़ाई यहीं खत्म करता हूं और अपराधिक लाला पठानों के सामने हार मानता हूं और मेरे और मेरे परिवार को बचाने के लिए अगर इनको कोई फिरौती भी देना पड़े तो मैं उसके लिए तैयार हूं।

प्रेसवार्ता में अजय सोनी ने आगे बताया कि 31 दिसम्बर को हमारे कालाखेत स्थित डायमण्ड ज्‍वेलर्स शोरूम पर गोली चलाकर हमसे आज़म लाला ने एक करोड़ की फिरौती माँगी थी, लेकिन हमने फिरौती देने की बजाए मुखर होकर अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया इससे बौखलाकर मुझ पर और मेरे भाई अनिल सोनी पर बदमाशों ने गोली चलाई जिसमें मुझे गोली लगी और मैं जीवनभर के लिए अपाहिज हो गया।  इसके बाद भी हमने बदमाश लाला पठानों के खिलाफ लड़ाई जारी रखी क्योंकि आज हम चुप होकर बैठ गए तो कल मन्दसौर के किसी और व्यापारी को शिकार बनाकर उससे लाला पठान फिरौती माँगेगे। पूर्व में भी मन्दसौर के कई व्यापारियों से लाला पठानों ने फिरौती वसूली कई लोगों की ज़मीनों पर कब्जे किये, स्मैक, डोडाचूरा, लूट, फिरौती इनके मुख्य काम है इनके आतंक के खिलाफ अगर मेरे भाई अनिल सोनी ने आवाज़ उठाई तो क्या गलत किया है ? अगर मन्दसौर को इन बदमाशो के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए लड़ाई छेड़ी तो क्या गलत किया है ? ऐसी स्थिति में पुलिस को हमारा साथ देना था मगर हम पर नीमच में गोली चलने के समय से ही एसपी मनोज कुमार सिंह का रवैया हमारे प्रति ठीक नहीं रहा आखिर क्यों ? एक जिम्मेदार अधिकारी होने के बाद भी एसपी साहब ने हमारा साथ देने की बजाए लाला पठानों के प्रति नरम रुख क्यों रखा ? क्या एक पुलिस अधिकारी…. होकर इस तरह पीड़ित के खिलाफ व्यवहार करना एसपी साहब को शोभा देता है ? जब एसपी साहब अपराधियों को गिरफ्तार करने गए थे तब भी एसपी साहब की खूब खातिरदारी बदमाशो ने की जिसका वीडियो हमने पूर्व जारी किया था। चुन्नू लाला ने मेरे भाई पर हमला किया था तब भी पुलिस ने चुन्नू को बचाने के लिए लिखा था कि चुन्नू लाला के हाथ में बंदूक जैसी चीज थी जबकि सीसीटीवी कैमरे में बंदूक हाथ मे दिख रही थी। मेरे भाई अनिल सोनी के मुँह पर वार किया जिससे नाक से खून बहने लगा पर पुलिस ने चुन्नू लाला के खिलाफ कार्यवाही न करते हुए मेरे भाई पर ही कार्यवाही कर दी। अजय सोनी ने आरोप लगाया कि चुन्नू लाला एक शातिर अपराधी है पर एसपी साहब की मेहरबानी से वो मन्दसौर में शान से रह रहा है और अपने अवैध धंधे कर रहा है। चुन्नू जो एक अपराधी है उस पर जिलाबदर की कार्रवाई नहीं कि गई और मेरे भाई अनिल सोनी पर जिलाबदर की कार्रवाई कर दी गयी क्यों ?  ये जिलाबदर की कार्रवाई एसपी मनोज कुमार सिंह ने बदला लेने के लिए करवाई है?  हमें पूरी आशंका है कि मेरे भाई अनिल सोनी को जिलाबदर कर बाहर भेजा गया है और उधर उसकी हत्या करवाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो एसपी मनोज कुमार सिंह और जो नाम हमने पूर्व में दे रखे है जिसने जान का खतरा है वो सब अनिल सोनी की मौत के जिम्मेदार रहेंगे। एक षड्यंत्र के तहत अनिल सोनी को जान से मारने की साजीश रची जा रही है जिसमे मुख्य रूप से एसपी साहब और लाला पठान आदि शामिल है। हम उन लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे है जो बहुत पॉवर फूल है जिसमे पुलिस अधिकारी, नेता और शातिर बदमाशो का पूरा ग्रुप है मेरा भाई अनिल सोनी आज अपनी जान जोखिम में डालकर इनसे लड़ रहा है क्योंकि हम कल रहे ना रहे पर हमारे मन्दसौर के लोगों को इतना तो एहसास होगा कि हमने उन्हें बदमाशो का शिकार बनने से बचाने का भरसक प्रयास किया। हम अपने शहर के लोगो के लिए लड़े। ये लड़ाई हम शुरू होने के पहले ही खत्म कर सकते थे हमे बस एक करोड़ रुपए ही तो देना थे पर हमने नहीं दिए क्योंकि हम भी दूसरों की तरह रुपए दे देते तो लाला पठानों का आतंक जारी रहता । हमने इस लड़ाई में एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाया है। फिर भी हम लड़ रहे है सिर्फ इसलिए की मन्दसौर में कोई और लाला पठानों के सामने नहीं झुके। एक साजिश के तहत इस लड़ाई को कुछ लोग हमारी व्यक्तिगत लड़ाई बता रहे है मगर आप समझ सकते है कि ये लड़ाई सिर्फ हमारी होती तो हम तो एक करोड़ देकर पीछा छुड़ा लेते लेकिन मेरे भाई अनिल सोनी का साफ कहना है कि हम तो नीमच में जब गोली चली थी उसी दिन गोली सही जगह लग जाती तो  मर गए होते परंतु हम बच गए इसीलिए बाकी बचे जीवन को मन्दसौर को भयमुक्त बनाने और लाला पठानों के आतंक से मुक्त करने में जीवन लगा दिया है।  आचार संहिता का लाभ उठाकर मेरे भाई अनिल सोनी पर जिलाबदर की कार्रवाई की गई है जबकि अनिल सोनी ने पूर्व में एसपी मनोज कुमार सिंह को एक शपथ पत्र दिया था जिसमे लिखा था की मेरे खिलाफ किसी भी न्यायालय में कोई प्रकरण नहीं चल रहा है ना ही मैं अपराधी हूँ । इसके बाद अनिल सोनी पर फर्जी केस किये और उन्हीं केस का हवाला देकर अनिल सोनी को जिलाबदर किया गया है। आज मेरे और मेरे परिवार की कभी भी हत्या करवाई जा सकती है हम इस शहर में बिलकुल अकेले पड़ गए है । हमारा कोई साथ नहीं दे रहा है प्रशासन नेता और गुंडे बदमाश यहाँ तक कि न्यायपालिका भी इनसे मिली हुई है तभी तो लाला पठानों को कभी सज़ा नहीं होती ? हम आज आपको एक वीडियो जारी कर रहे है जिसमे आप खुद देखे की न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन कैसे मिलकर अपराधियो का साथ देते है कुछ आडियो भी हम आपको दे रहे है। ये सब एक होकर हमें खत्म करना चाहते है । मैं अजय सोनी जो जीवनभर के लिए अपाहिज हो चुका हूँ अब इस लड़ाई को लड़ते लड़ते हार गया हूँ मैं हताश निराश होकर इस लड़ाई को यही खत्म करना चाहता हूँ हम अकेले उन लोगों से नहीं लड़ सकते है क्योंकि ये बहुत बड़े लोग है। चुनाव आयोग को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि जो एसपी सीएम की गुड लिस्ट में है वो जिले में कैसे निष्पक्ष चुनाव कराएँगे?

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