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अमृत वर्षा : बूंदों से फसलों को राहत, झमाझम का इंतजार

मंदसौर। पिछले एक पखवाड़े से बेरूखी दिखा रहा मानसून अब फिर लौट आया है। मौसम विभाग की घोषणा के अनुरूप बुधवार से मंदसौर जिले में भी बारिश हुई है। हालांकि जिलेभर में बुधवार को रिमझिम बारिश ही हुई। खेतों में बारिश के इंतजार में वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी फसलों को बूंदों से राहत मिली है। कि सानों की चिंता भी थोड़ी बहुत कम हुई है। अभी भी जिले में तेज बारिश का इंतजार है।

बुधवार सुबह से ही जिलेभर में बारिश का दौर जारी रहा। मंदसौर नगर में अलसुबह बूंदाबांदी हुई, दोपहर एवं शाम को भी रिमझिम बारिश चलती रही। जिले में 24 जुलाई के पहले से ही बारिश थमी हुई थी। इसके लिए कि सान, व्यापारी सहित सभी वर्ग प्रार्थना एवं दुआएं कर रहे थे। बुधवार सुबह बादलों और बूंदों को देख हर मन खुश हुआ। कि सानों के अनुसार रिमझिम से फसलों को नई जान मिल गई है। बारिश के इंतजार में फसले सूखने लगी थी। हालात यह हो गए थे कि कि सानों को खरीफ की फसलों को बचाने के लिए सिंचाई करना पड़ रही थी।

बढ़वार तेजी से होगी

कृषि वैज्ञानिक जीएन पांडेय ने बताया कि फसलों को लिए यह बूंदाबांदी अमृत के समान है। जिले की फसलें अभी तक बेहतर स्थिति में ही थी। अब पानी मिलने से बढ़वार तेजी से होगी। रिमझिम के बीच ही भानपुरा एवं पिपलियामंडी में करीब 15 मिनट तक झमाझम बारिश भी हुई। जबकि जिले के अन्य इलाकों में रिममझिम बारिश ही सुबह से होती रही। मल्हारगढ़, सीतामऊ व आसपास क्षेत्रों में भी हल्की बारिश हुई। एक साथ पूरे जिले में बूंदें बरसने से राहत है। अब सभी को तेज बारिश का इंतजार है। जिले के लगभग भी जल स्रोत भी अभी खाली ही है। जिले में बुधवार सुबह 8 बजे तक 368 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है।

 

नारायणगढ़

बुधवार दोपहर बाद नारायणगढ़ नगर में एवं आसपास के इलाके में कभी धीमी कभी तेज बारिश हुई। करीब 20 दिनों बारिश नहीं होने के कारण खेतों में सोयाबीन, उड़द, मक्का आदि फसलें सूखने लगी थीं। बुधवार को हुई वर्षा से फसलों को नया जीवनदान मिला है।

पिपलियामंडी

बुधवार को हल्की बूंदाबांदी से क्षेत्र के कि सानों में राहत मिलती नजर आई। फसलें मुरझाने लगी थीं। एक पखवाड़े बाद हुई बारिश ने फसलों में जान डाल दी है। बुधवार सुबह 7 बजे हल्की बूंदाबांदी हुई। करीब एक घंटे से अधिक रिमझिम बारिश होती रही। इससे सड़कों पर पानी बहने लगा। खेतो में मुरझाई फसलें भी बारिश से खिल गईं। शाम 4 बजे करीब 15 मिनट तक झमाझम बारिश हुई।

8 घंटे रिमझिम, कि सान खुश

सुवासरा। पिछले 15 दिनों से बेरुखी दिखा रहा मानसून अब लौट आया है। बुधवार को नगर व आसपास के इलाकों में रिमझिम बारिश हुई। लगातार 8 घंटे रिमझिम बारिश होने से फसलों के साथ ही कि सानों के चेहरे भी खिल गए। ग्राम कु रावन के कि सान बालाराम पंवार ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसलों पर इल्ली का प्रकोप बढ़ रहा था। गत वर्ष 8 अगस्त तक सुवासरा में 21 इंच वर्षा दर्ज हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष अभी 18 इंच बारिश हुई है।

शामगढ़

एक पखवाड़े के बाद शामगढ़ में बुधवार को सुबह से रिमझिम व दोपहर में करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। बारिश से कि सान, व्यापारी सहित सभी वर्गों की चिंताएं कुछ कम हुई हैं। खरीफ की फसलों में भी जान आ गई है। बारिश के लिए क्षेत्र में एक सप्ताह से उजमनी के साथ ही टोटके भी टोटके कि सानों द्वारा किए जा रहे थे।

बोलिया

बोलिया एवं आसपास के क्षेत्र में बुधवार को सुबह 6 बजे से श्रावण मास की पहली रिमझिम बारिश हुई। दोपहर 1 बजे करीब 15 मिनिट तेज बारिश हुई, जिससे गांव की सड़कों से पानी बह निकला। 15 दिन से बारिश नहीं होने के कारण की हालत देख परेशान हो रहे कि सानों को भी अब राहत मिली है।

गरोठ

गरोठ क्षेत्र में बुधवार सुबह रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ, दिनभर रुक-रुककर बारिश जारी रही। क्षेत्र में श्रावण माह से पूर्व से ही बरसात नहीं हो रही थी। इसके कारण खेतों में खड़ी फसले पानी के लिए तरस रही थी। कि सानों ने बताया कि वर्षा की खेंच के कारण खेतों में खड़ी फसलों के साथ-साथ सब्जियों की फसल इल्लियों के प्रकोप रोकने के लिए सिंचाई करना पड़ रही थी।

15 दिन बाद राहत भरी बरसात

भानपुरा। भानपुरा सहित आसपास अंचल में 15 दिनों से बरसात नहीं होने से फसलें मुरझाने लगी थीं। बारिश के लिए प्रार्थना व दुआएं भी की गईं। बुधवार सुबह 6 बजे से हल्की बूंदाबांदी के साथ शुरू हुई बरसात दिनभर में कभी तेज तो कभी रिमझिम के दौर के साथ शाम तक जारी रही। यह बारिश फसलों के लिए अमृत समान है। बरसात से कि सानों के चेहरे खिल गए वहीं कि सानों ने भी राहत की सांस ली।

लसुड़ियाईला में मनाई उजमनी

लसुुड़ियाईला। ग्राम लसुड़ियाईला में बारिश की कामना को लेकर गांववासियों ने उजमनी मनाई। बुधवार सुबह गांववासियों ने खेतों एवं जंगल में जाकर दाल, बाटी, चूरमा बनाया और भगवान इंद्रदेव को भोग लगाया, हवन भी कि या गया। उजमनी के दौरान ही सुबह रिमझिम और दोपहर में हल्की बारिश होने से गांववासियों के चेहरे पर खुशी झलक उठी।

-यह बारिश फसलों की लिए अमृत के समान ही है। फसलों को पानी सख्त जरूरत थी। इल्ली व कीट से बचाने के लिए कि सान लगातार दवाई छिड़काव भी कर रहे थे, जिसके कारण फसलों को कोई दिक्कत नहीं हो पाई। अब इस बारिश से फसलों में नई जान आ गई है। अभी सोयाबीन पर फूल आने का समय है। ऐसे में अगर अधिक बारिश होती है तो कि सान खेतों में पानी न भरा रहने दें, निकासी की व्यवस्था जरुर करें।

-जीएन पांडेय, कृषि वैज्ञानिक, मंदसौर

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