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अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर क्यों लगी रहनी चाहिये?

अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूनियन हॉल में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर हटाने पर हुए विवाद में दो छात्रों की मृत्यु हो गई और कई घायल हो गए। समाचार मिलने के बाद से देश ये जानकर हैरान है कि भारत के विश्वविद्यालय में आजादी के इतने सालों बाद तक जिन्ना की तस्वीर लगी हुई थी? दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस विषय पर अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय का छात्र हिंसक प्रदर्शन पर उतर आया है। पाकिस्तान का राष्ट्र नायक भारत में किसी भी प्रकार का दर्जा कैसे पा सकता है। सब जानते हैं कि पाकिस्तान सिर्फ मोहम्मद अली जिन्ना की जिद पर ही बना था। मातृभूमि का विभाजन देश ने झेला और लाखों लोगों का रक्त उस समय की सांप्रदायिक हिंसा में बहा। करोंडो लोगों का पलायन हुआ जिसका दर्द आज भी भारतीय समाज में कहीं ना कहीं महसूस किया जा रहा है तो ऐसी समस्त घटनाओं के लिये जिम्मेदार जिन्ना की तस्वीर को देश के प्रमुख विश्वविद्यालय में स्वीकार करना जरा मुश्किल ही नहीं असंभव है। जिन्ना की तस्वीर हटाने का विरोध करने वालों से ये पूछा जाना चाहिये कि क्या पाकिस्तान के किसी भी विश्वविद्यालय में भारत के किसी भी राष्ट्र नायक की फोटो लगी है। यदि अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाए जाने की घटना को विश्वविद्यालय की परंपरा से जोड रहा है तो भारत के ऐसे कितने वरिष्ठ नागरिक हैं जिन्होने पाकिस्तान की धरती पर अपना अध्ययन किया है या वे किसी ना किसी तरह से वहॉं स्थित शिक्षण संस्थाओं से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुडे रहे होंगे तो क्या पाकिस्तान में उन सबको यह सम्मान प्राप्त है? यदि नही ंतो फिर अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र जिन्ना की तस्वीर लगाने की जिद क्यों कर रहे हैं? वैसे भी अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय अपनी स्थापनाकाल से ही विवाद में रहा है और विगत दशकों में ऐसी कई घटनाऐं देश में घटी हैं जिनमें अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों की संदिग्ध भूमिका महसूस की जाती रही है लेकिन केन्द्र में चाहे कांगेस और यूपीए की सरकार रही हो या उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और मायावती की सरकारें रहीं हो सभी ने मात्र वोटों की खातिर मुस्लिम तुष्टिकरण की खातिर अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पनपती विष बेल को सींचने में हमेशा से कोई कसर नहीं छोडी थी। विगत इतने वर्षों में किसी ने यह भी संज्ञान में लेने की कोशिश नहीं की कि विश्वविद्यालय के हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है और उसे हटाना चाहिये। पहली बार अलीगढ के भाजपा सांसद सतीश गौतम की पहल पर जिन्ना की तस्वीर के सम्बन्ध में पूछताछ हुई और कुछ तथ्य सामने आए। धन्यवाद देना चाहिये सांसद श्री गौतम को जिन्होने इस तस्वीर हटाओ अभियान की शुरूआत प्रश्न पूछ कर की। उनके प्रश्न में आज भारत के करोंडो लोगों का यह प्रश्न जुड गया कि भारत में जिन्ना की तस्वीर किसी भी संस्थान में कैसे लग सकती है? और क्यूं लगना चाहिये? देश के विभाजन के लिये दोषी जिन्ना की तस्वीर को हटाने का जो काम 16 अगस्त 1947 को हो जाना था वह आज तक नहीं हुआ और जब उस दिशा में कुछ करने का अवसर आया है तो ऐसी स्थिति में अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन संदेह के घेरे में है कि क्यों वे जिन्ना में अपने नायक की छवि को खोजना चाहते हैं? केन्द्र और राज्य सरकारों को इसी क्रम में देश के सभी विश्वविद्यालयों सहित अन्य सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक संस्थानों की भी जॉंच करा लेनी चाहिये कि कहीं और तो जिन्ना या उनके जैसों की तस्वीर नहीं लगी है? क्योंकि हमारे शिक्षा संस्थानों में और अन्य स्थानों पर हम भारत के राष्ट्र नायकों के बारे में शिक्षा देने के प्रयास में जुटे हैं तो अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भले ही सफाई के बहाने से जिन्ना की तस्वीर उतारी गई हो वह वापस ना लगे यही उचित होगा देश हित में होगा क्योंकि जिन्ना भारत में कभी नायक नहीं बन सकते।

– डॉ. क्षितिज पुरोहित

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