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अवैध काॅलोनियों के नागरिकों की समस्या को समझे विधायक और सांसद, नहीं तो ये आंदोलन किसान से भारी न हो जाये

मन्दसौर। मन्दसौर नगरपालिका सीमा और उससे लगी हुई 40 से अधिक अवैध काॅलोनियां है, जो शासन, प्रशासन की मौन स्वीकृति से राजनीति से जुडे़ नेताओं द्वारा काटी गई थी, आज वह भयावह रूप धारण किये हुए है। यहां के नागरिकों का अन्दर ही अन्दर लावा फुट रहा है। समय रहते सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि नहीं सम्हले तो यह समस्या आंदोलन का एक बड़ा रूप धारण कर लेगी।
उपरोक्त आशय का प्रेसनोट जारी करते हुए जिला कांग्रेस महामंत्री सुशील संचेती ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व भारतीय जनता पार्टी अवैध काॅलोनियों में विकास की बात को लेकर सत्ता में काबिज हुई थी तब से लगातार तीनों बार विधायक भाजपा के बनते रहे है, यहां तक की मुख्यमंत्री ने स्वयं नगर पालिका चुनाव के दौरान गली-गली घुमकर जनता को आश्वासन दिया था कि अवैध काॅलोनियों के लिये शासन का खजाना खुला हैं, लेकिन कथनी और करनी में जुमले बाजी का अन्तर है।
श्री संचेती ने बताया कि नगर की 30 हजार से अधिक जनता अवैध काॅलोनियों में नारकिय जीवन जीने को मजबूर है। वहां विद्युत, पानी, सफाई व स्वास्थ्य पर अनावश्यक खर्च वहन करना पड़ रहा है। उपर से नगरपालिका समेकित कर व सम्पत्ति कर खुले भूखण्ड का तथाकथित टेक्स भी वसूल रही है। भारतीय जनता पार्टी 15 वर्षों से नागरिकों को गुमराह कर वोट लेती रही है, स्वयं मुख्यमंत्री एक बड़ी राशि प्रतिवर्ष मंदसौर नपा को देने की घोषणा कर गये थे। इन सभी बातों, घोषणाओं, वादों के कारण नागरिकों में काफी आक्रोश व्याप्त है जो कभी भी लावा बन सकता है। संचेती ने बताया कि वार्ड नं. 1 के उप चुनाव में विधायक, सांसद व नपाध्यक्ष ने प्रताप भवन में अवैध काॅलोनी गुलमोहर बैंक काॅलोनी, नाहर सय्यद मगरा वाली काॅलोनी, डायमण्ड किराने वाली गली के नागरिकों की बैठक बुलवाकर 40 लाख की राशि विकास कार्य हेतु बताया था। चुनाव चल रहे है इसलिये अनौपचारिक घोषणा की थी किन्तु बार-बार मांग करने के बाद भी राशि नहीं दी गई। इसी मुद्दे को नगरपालिका परिषद् के सम्मेलन में पार्षद रूपल संचेती द्वारा उठाया गया था व विधायक प्रतिनिधि से पूछा गया था तो उनका कहना था कि वे चुनावी बाते थी और माईक पर वर्णन देने से बचते रहे।

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