अश्लील व फूहड़ वीडियों भारतीय संस्कृति को कर रहे है दूषित-कमल कोठारी

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मन्दसौर। सामाजिक कार्यकर्ता कमल कोठारी ने कहा कि व्हाट्सएप, फेसबुक से सोशल मीडिया से जितनी हमारी जि़ंदगी आसान हुई हैं उतनी ही पेचीदा एवं संजीदगी भरी भी हो गई हैं इंटरनेट, व्हाट्सएप, फेसबुक की सुविधा से हमने आसमान की ऊँचाई को नापने तक का काम तो अवश्य कर लिया लेकिन समाज व परिवार की आपसी मिलनसारिता बात चीत को व्हाट्सएप, फेसबुक के सीमित दायरे में लाकर खड़ा कर दिया। परिवार मे हर व्यक्ति के पास मोबाईल सुविधा होने से आपसी बातचीत का सिलसिला भी खत्म हो गया। हर व्यक्ति मोबाइल पर अपनी ऊँगलियों से कुछ ना कुछ कर रहा होता हैं। परिवार में आपसी संवाद की भूमिका गौण होती जा रही है जिससे हर व्यक्ति मानसिक तनाव व अवसाद की और बढ़ता जा रहा हैं। मोबाइल संस्कृति ने हमसे हमारे संस्कार छीन लिए सिर्फ खबरों का आदान प्रदान करने की औपचारिकता का साधन भर मात्र है, डिजिटल मोबाइल क्रांति से समाज को देश को नहीं ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम बनाया गया हैं ताकि हर व्यक्ति अपने व्यवसाय की पूर्ण जानकारी के साथ सही तरीके से आदान प्रदान कर सके लेकिन सोशल मीडिया के भ्रामक और गलत खबरों से कही जगह हिंसात्मक रुख ले लिया। कर्नाटक, असम में सोशल मीडिया की गलत जानकारी की वजह से कई लोगों की जाने चली गई। खबरों को एड्टिींग करके फेसबुक, व्हाट्सएप पर प्रसारण करने की बात आम हो गई हैं। जिससे समाज मे वैमनस्य के भाव से कही गम्भीर घटनाओं को अंजाम दे दिया जाता हैं।

श्री कोठारी ने कहा कि अश्लीलता, फुल्हड़पन, पॉर्न वीडियो जैसी अश्लीलता, मोबाइल, फेसबुक, व्हाट्सएप पर परोसी जा रही हैं जिससे समाज मे अश्लीलता दुष्कर्म अपराध जैसे वातावरण निर्मित हो रहे हैं। जिससे हमारी भारतीय संस्कृति, सभ्यता दिनों दिन दूषित होती जा रही। श्री कोठारी ने सरकार से मांग की है कि जिस तरह 18 साल से कम उम्र के नाबालिग को वोट देने की पात्रता नहीं है उसी तरह 18 वर्ष के कम उम्र के बच्चो को मोबाइल रखने की पात्रता पर प्रतिबंध हो। सरकार अश्लील वीडियो पर भी प्रतिबंध लगावे।

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