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अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ के दर्शन कर अभिभूत हुए ओकार चैतन्यजी महाराज

मन्दसौर। श्री चैतन्य आश्रम मेनपुरिया में गुरू पूर्णिमा महोत्सव के तहत आयोजित भागवत सप्ताह कथा के विद्वान सन्त ओंकार चेतनजी महाराज (मार्कण्डेय सन्यास आश्रम ओंकारेश्वर) 21 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ के प्रथम बार दर्शन कर बहुत अभिभूत हुए। मन्दिर के पुजारी कैलाश भट्ट से मंदिर इतिहास एवं श्री विग्रह के प्रतिष्ठापना के साथ ही प्रत्येक मुख के संबंध में जानकारी की इच्छा प्रकट करने पर श्री भट्ट ने विस्तार से स्वामीजी को संज्ञान कराया। स्वामीजी ने कहा कि औंकारेश्वर महाकाल उज्जैन की तरह ही भगवान श्री पशुपतिनाथ श्री विग्रह के अनन्तकाल तक आने वाली पीढ़ीयां व दर्शनार्थी दर्शन करते रहे और मूर्ती के किसी भी श्री अंग का कोई क्षरण न हो इस दृष्टि से यदि कोई नई व्यवस्था की जाती है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। स्वामीजी ने स्वयं भगवान श्री पशुपतिनाथ का अभिषेक बाहर रेलिंग से ही किया। स्वामीजी ने पशुपतिनाथ मंदिर कार्यालय के साथ ही पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला का भी अवलोकन किया। स्वामीजी के आगमन के समय पाठशाला के बटूकों द्वारा सस्वर स्वाध्याय को देखकर बड़े प्रसन्न हुए। आपने पाठशाला के आचार्य विष्णुप्रसाद ज्ञानी से पाठशाला में पढ़ाये जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी प्राप्त की। जानकारी प्राप्त कर आपने पाठशाला में पाठ्यक्रम आदि से संतुष्ट होकर देववाणी संस्कृत के प्रचार प्रसार हेतु उत्तम शिक्षण की सराहना करते हुए आचार्य श्री विष्णु प्रसाद ज्ञानी को आशीर्वाद दिया।

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