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असुरक्षा, भय अथवा रक्षा का सीधा सम्बन्ध मनुष्य के मन मस्तिष्क से है – बी. के. सुरेन्द्र

मंदसौर निप्र। वर्तमान समय में सम्पूर्ण मनुष्य सभ्यता का अस्तित्व खतरे में है जिसका कारण है विज्ञान का दुरूपयोग। सारी वैश्विक व्यवस्थाओं का संचालन करने वाले शक्तिशाली राष्ट्र प्रमुख की मनोस्थिति ही सारे विश्व की रक्षा के लिए उत्तरदायी है, परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों केप्रमुख मेें से किसी भी एक से क्रोध अथवा अहंकार के वशपरमाणु शक्ति का दुरूपयोग किया गया तो प्रतिक्रिया स्वरूपसभी शक्तिशाली राष्ट्र भी उसका प्रति उत्तर देने में सक्षम हैं। औरयही प्रतिक्रिया सारे विश्व का अस्तित्व मिटा सकती है। यदि सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द, सहनशीलता, पवित्रता, संतुष्टता आदि दिव्य गुणों से सम्पन्न मनुष्य का मनोमस्तिष्क यदि बन जाए तो सारा विश्व स्वर्ग बन सकता है और यह कार्य सहज राजयोग मेडिटेशन द्वारा ही संभव है। ब्रह्माकुमारी संस्थान के विश्व व्यापी सेवाकेन्द्र लगातार इसीदिशा में प्रयत्नशील हैं।

उपरोक्त विचार अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी संस्थान के एरिया डायरेक्टर बी.के.सुरेन्द्र भाई ने मल्हारगढ़ में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में उपस्थितविशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

इसअवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने अपने उद्बोधन में राजयोग मेडिटेशन की प्रक्रिया एवं विधि पर विस्तृत प्रकाश डाला साथ ही रनिंग कमेंट्री के द्वारा उपस्थित जनसमुदाय को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करवाकर गहन सुख शांति कीअनुभूति करवाई। म.प्र. सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के चेयरमेन मदनलाल राठौर ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की महत्वपूर्ण विश्वकल्याणकारी गतिविधियों से सभी को अवगत करवाया एवं प्रेरित किया कि इन राजयोग तपस्विनी ब्रह्माकुमारी बहनों की नि स्वार्थ सेवाओं का लाभ लेकर सभी को अपने नगर एवं परिवार की सुख शांति एवं समृद्धि के लिए इनसे ज्ञान एवं मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।

कार्यक्रम की शुरूआत नगर के अनेक महत्वपूर्ण एवं विशिष्ठ व्यक्तियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वल्लन कार्यक्रम से हुआ, ब्रह्माकुमारी संस्थान के मल्हारगढ़ केन्द्र की संचालिका बी.के.शीतल बहन ने केन्द्र की सेवा गतिविधियों की जानकारी दीएवं स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्माकुमारी श्रुति बहन द्वारा किया गया । अंत में कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी भाई बहनों को पवित्र रक्षाबंधन बांधकर प्रसाद खिलाया गया। इस कार्यक्रम की यह विशेषता रही कि यह अपेक्षा से अधिक जन उपस्थिति के कारण आयोजकों को दोबार बैठक व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।

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