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आखिर शिवना कब होगी साफ़!

मंदसौर। शिवना नदी में वर्षों से मिलने वाले नालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। नगर पालिका और जिला प्रशासन इन्हें रोकने के बजाय कागजों पर योजना बना रहे हैं। नगर पालिका ने अभी तक नालों को रोकने के लिए दो करोड़ रुपए फूंक दिए, पर गंदा पानी कम होने के बजाय और ज्यादा मिल रहा है। अब स्थिति यह हो गई है कि पशुपतिनाथ मंदिर से लेकर मुक्तिधाम तक शिवना में 15 से 20 नाले मिल रहे हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शिवना की उपेक्षा से आहत होकर न्यायालय की शरण ली है। वहां से जारी हुए नोटिसों का जवाब में नपा अभी भी जो सीवरेज प्लान स्वीकृत नहीं हुआ है, उसके ही भरोसे बैठी है।

शोर्या दल की पैरालीगल वालिंटियर माधुरी सोलंकी ने लोक उपयोगी सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालत में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहां एक वाद दायर किया है। इसमें कहा गया कि शिवना की साफ-सफाई एवं उसमें हो रही गंदगी के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिवना का पानी प्रदूषित हो रहा है जबकि इसी पानी पर शहरवासी आश्रित हैं। शिवना नदी में अपशिष्ट एवं शहर की सीवरेज लाइन सहित अन्य जगह से गंदा पानी प्रवाहित किया जा रहा है। जल प्रदूषण के साथ ही आसपास का वातावरण प्रदूषित होकर कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या भी हो रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कर्तव्य है कि वह फैक्टरी से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ को नदी में मिलने से नियंत्रित करें। ग्राम अलावदाखेड़ी के समीप लगभग आने वाले ईंट भट्टों के कारण भी गंदगी एवं नदी में अपशिष्ट पदार्थ डालने से गंभीर समस्या हो रही है।

नपा भी पूरे शहर का गंदा पानी डाल रही

याचिका में बताया गया कि नगर पालिका द्वारा संपूर्ण शहर का गंदा पानी भी सीधे शिवना नदी में छोड़ा जा रहा है। यह नाली के माध्यम से शिवना नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे भी जल प्रदूषित हो रहा है। अभी भी शहर में 15-20 नालों से शहर का गंदा पानी शिवना में ही छोड़ा जा रहा है। शिवना शुद्घिकरण नहीं होने के चलते नदी का पानी अभी से काला होने लगा है।

 

दस साल बाद भी नहीं हुआ शुद्घिकरण

शिवना शुद्घिकरण के लिए वर्ष 2008 प्रयास चल रहा है, लेकिन कोई भी ठोस योजना नहीं होने का ही नतीजा है कि 10 साल बाद भी शिवना शुुद्घ नहीं हो पाई। 2008 में 45 लाख रुपए खर्च कर इसके प्रयास शुरू हुए। तीन जगह कुएं खोदकर काम अधूरा छोड़ दिया गया। तीन-चार सालों से नपा द्वारा शिवना शुद्घिकरण के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। सीवर लाइन प्रोजेक्ट में शुद्घिकरण को शामिल किया गया है। इसे धरातल पर आने में अभी और समय लग जाएगा। इसके अलावा मई 2018 में तत्कालीन सीएम शिवराजसिंह चौहान के मंदिर आगमन के समय लगभग 12 करोड़ रुपए का शिवना शुद्घिकरण प्रोजेक्ट सौंपा था, पर अभी तक इस मद में एक रुपया नहीं आया। अब सरकार बदलने के बाद नए प्रस्ताव बनाने पर ही विचार होगा। इधर दिन-प्रतिदिन शिवना प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है।

जिस नदी का पानी हम पीते हैं और उसकी यह दुर्दशा देखकर मुझसे रहा नहीं गया। सारे अधिकारी बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं, पर हकीकत में काम कुछ नहीं हो रहा है। इसी कारण से मेने यह याचिका दायर की है। इसे लेकर सभी विभागों को नोटिस भी जारी हुए थे और अब सभी विभागों के लोग इसी तरह रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं कि शुद्घिकरण का कार्य जारी है, पर मौके पर कुछ दिख नहीं रहा है। – माधुरी सोलंकी, सामाजिक कार्यकर्ता व पैरालीगल वालिंटियर

 

योजना तैयार है

– शिवना शुद्घिकरण को सीवर प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इसके अलावा 12 करोड़ रुपए की एक अलग योजना बनाकर भी भोपाल भेजी गई है। वहां से राशि मिलते ही शिवना शुद्घिकरण प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा। अभी हम नदी किनारे एक नाला बना रहे हैं जिससे गंदा पानी मंदिर के पास छोटी पुलिया से लगभग सौ मीटर आगे जाकर नदी में मिलेगा। -सविता प्रधान, सीएमओ

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