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आचार्य चाणक्य जयन्ति समारोह सम्पन्न

शिक्षा का मुख्य उद्देश्य प्रतिभा को निखारना है, जो प्रथम पायदान से ही संभव है। यदि यहीं पर भटकाव हुआ तो प्रतिभा गोण हो जाती है, सपने बिखर जाते है। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ चाणक्य जैसे शिक्षकों की क्योंकि शिक्षक की गोद में निर्माण व प्रलय दोनों पलते है। प्राचीन समय में शिक्षा के साथ-साथ गुरू शिष्यों को राष्ट्रभक्ति की भी शिक्षा देते थे, लेकिन आज इसका अभाव हैं। परिणाम स्वरूप आज के छात्रों में राष्ट्र के प्रति श्रद्धा कम हो रही है जिसके कारण देश में कई विकृतियां आई है। इन विकृतियों को दूर करने के लिये शिक्षकों को शास्त्र के साथ शस्त्र की भी शिक्षा देना जरूरी है। प्राचीन भारत के कई राज्यों में महिलाओं को भी युद्ध की शिक्षा दी जाती थी ताकि समय आने पर सम्पूर्ण राज्य युद्ध में भाग ले सके। आज हम भी महिलाओं को आत्म रक्षा के गुण सिखा रहे है। आचार्य चाणक्य ने अपने सभी ग्रन्थों में साम, दाम, दण्ड और भेद को प्राथमिकता से दर्शाया है।
उक्त उद्बोधन सामाजिक समरसता मंच एवं म.प्र. शिक्षक संघ द्वारा नगरपालिका सभागार में आयोजित आचार्य चाणक्य जयन्ति समारोह में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री नन्ददास दण्डोतिया ने व्यक्त किये।
कार्यक्रम के आरंभ में पं. श्री सदाशिव त्रिपाठी, श्री नन्ददास दण्डोतिया एवं नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार द्वारा भारत माता एवं आचार्य चाणक्य के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नपाध्यक्ष श्री बंधवार ने कहा कि आचार्य चाणक्य का राजनीतिक चिन्तन आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने राजनीति को धर्म से मुक्त रखा। उनके विचारों से विदेशी दार्शनिक भी प्रभावित थे। चाणक्य ने राजनीति, धर्म, अर्थ के साथ-साथ सामाजिक समरसता की अवधारणा को बढ़ावा दिया है। ऐसे महापुरूषों एवं आचार्यों के जीवन कों पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ी को मार्गदर्शन मिल सके।
अतिथियों का स्वागत अखिलेश मेहता, पं. अरूण शर्मा, भारतसिंह मंगोलिया, श्यामसुंदर देखमुख, सागरमल मेहता आदि ने किया। अतिथि परिचय पार्षद श्रीमती संध्या अरूण शर्मा ने व देशभक्ति गीत श्री मन्नालाल दुबे ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर सर्वश्री गुरूचरण बग्गा, गोपालकृष्ण पाटील, दशरथसिंह झाला, सत्यनारायण सोमानी, सूरजमल गर्ग, विनोद मेहता, श्यामसुंदर चैधरी, प्रितेश चावला, ब्रजेश आर्य, रमेशचन्द्र चन्द्रे, रूपनारायण मोदी सहित बड़ी संख्या कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। राष्ट्र गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप भाटी ने किया एवं आभार नवीन त्रिवेदी ने माना।

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