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आज होगा मुमुक्षु सुरभि संघवी का अभिनंदन और कल होगी दीक्षा

मंदसौर। मंदसौर नगर  को जिस ऐतिहासिक पलों का इंतजार था वह क्षण कल आने वाला है। पूरा मंदसौर नगर इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनेगा। तप ओर संयम महोत्सव के अंतर्गत होने वाला दो दिवसीय आयोजन आज से प्रारंभ होने जा रहा है। आज इंदौर निवासी मुमुक्षु सुरभि संघवी का अभिनंदन समारोह आयोजत होगा। श्री साधुमार्गी जैन संघ क अध्यक्ष ओमप्रकाश पोरवाल व  विकास चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि मंदसौर के इतिहास में यह स्वर्णीम अवसर आया है जब इतने साधु साध्वियों के सानिध्य में कोई आयोजन होने जा रहा हो। उन्होने बताया कि मुमुक्षु बहिन सुश्री सुरभि संघवी का अभिनंदन समारोह रखा गया है। वहीं कल दिनांक 18 अप्रैल को कालाखेत मैदान पर विशाल पाण्डाल में प्रातः 6.05 बजे आचार्य प्रवर श्री रामलालजी मसा मुमुक्ष बहिन सुश्री संघवी को दीक्षा ग्रहण करवायेगे। जिसके पश्चात् लगभग 100 वर्षीतप के तपस्वीयों का पारणा होगा। आयोजनों के बाद उपस्थित सभी महानुभावों व सकल जैन समााज की गौतम प्रसादी होगी।

धर्म हमारे अंदर अच्छाईयों को भरता है और बुराईयों को बाहर निकालकर फेंकता है – श्री रामलाल जी मसाधर्म जिनेश्वर की स्तुति करते हुए आचार्य श्री 1008 रामलाल जी मसा ने कहा कि स्मृति पटल पर धर्म – धर्म का नाम गूंज जाता है। धर्म जीवन है इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीें। मनुष्य संभाव जीवन है, जिसमें संभावनायें भरी हुई है। आत्मा से परमात्मा बनने की संभावना मनुष्य में ही है। भाव दृष्टि से मनुष्य मोक्ष के नजदीक है। हमने कितनी बार सिद्ध भगवान का स्पर्श किया पर सिद्ध ना बन सके। सिद्ध रूपी पारस पत्थर के स्पर्श से भी हमारी आत्मा सोना नहीं बन पाई। इसका कारण हमारें अंदर राग द्वेष की परत जमा होना है। धर्म की आराधना मोक्ष प्राप्ति की पहली आवश्यकता है। धर्म हमारे अंदर अच्छाईयों को भरता है और बुराईयों को बाहर निकालकर फेंकता है।  आपने कहा कि महात्मा गांधी का चश्मा करोड़ो में बिकता है तो यह गुणों का कारण है आपने गुणों को ग्रहण करने का फॅार्मला बताते हुए कहा कि आप किस भी व्यक्ति के संपर्क में आये उसका नाम लिखे  एवं उसके आगे उसका गुण।

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