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आसान नहीं है Made in China का बायकॉट करना पर, भारत में 13 दिन में 20 प्रतिशत मांग घटी

उरी हमले के बाद देश में राष्ट्रवादी भावनाएं चरम पर है। ऐसे में दुश्मन के दोस्त को भी दुश्मन की तरह ही देखा जा रहा है। चीन परोक्ष रूप से पाकिस्तान को समर्थन देता रहा है, ऐसे में देशभर में इन दिनों चीनी सामान की खरीदी के खिलाफ माहौल बना हुआ है।

सोशल मीडिया पर तो इसके खिलाफ जमकर माहौल बना हुआ है, लेकिन इंडियास्पेंड एजेंसी के आकलन के मुताबिक भारत में चीनी सामान के विरोध को लेकर जो अभियान चलाया जा रहा है, वह सफल नहीं हो पाएगा।

एजेंसी के मुताबिक चीन भारत के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर्स में से एक है। वर्ष 2011-12 में भारत के कुल आयात में चीन का स्थान दसवां था, वहीं फिलहाल यह स्थान छठा अब हो गया है।

कुल मिलाकर भारतीय व्यापारी चीन से बड़े स्तर में सामान को आयात कर रहे हैं, जबकि चीन से होने वाले आयात का करीब आधा भी हम निर्यात नहीं कर पा रहे हैं। बीते दो साल में भारत में चीन उत्पादों की बिक्री 20 फीसदी बढ़ी है, वहीं बीते पांच साल की बात करें तो पांच फीसदी की दर से बढ़ी है। यह करीब 61 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।

भारत चीन से इलेक्ट्रानिक्स सामान, सेटअप बॉक्स, सेलफोन, लैपटॉप, सोलर सेल, की-बोर्ड, ईयरफोन, हेडफोन जैसी चीजों का आयात ज्यादा करता है। वहीं भारत 2011 तक चीन को करीब 86 हजार करोड़ रुपए का कुल निर्यात करता था, जो 2015-16 में घटकर 58 हजार करोड़ रुपए तक आ गया है।
भारत खास तौर पर कपास, तांबा, पेट्रोलियम, इंडस्ट्रियल मशीनरी जैसे सामान चीन को निर्यात करता है। कुछ मिलाकर फिलहाल भारत चीन को जितना सामान बेचता है, उससे छह गुना सामान खरीद लेता है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत चीन के लिए बहुत बड़ा बाजार है। ऐसे में चीनी सामान को बहिष्कार करने के मुहिम के सफल होने में संदेह नजर आ रहा है।

भारत में 13 दिन में चाइनीज प्रोडक्ट्स की मांग 20 प्रतिशत घटी
देश में चाइनीज आइटम पर असर देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर चीनी आइटम के बायकॉट की अपील का असर दिखने लगा है। त्योहारी सीजन के बावजूद पिछले 13 दिन में इन आइटम की मांग 20 प्रतिशत तक घट गई है। यह दावा कारोबारियों के प्रमुख संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने किया है। भारत और पाकिस्तान के आपसी तनाव के बीच चीन के भारत विरोधी रवैये के बाद सोशल मीडिया पर चाइना मेड सामान नहीं खरीदने की अपील की जा रही है।

कारोबारियों को लागत का डर
कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि दिवाली पर चाइनीज लाइटिंग जैसे सामान देशभर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं। करीब तीन महीने पहले भारतीय बाजार में चीनी आइटम आ जाते है। लेकिन कारोबारियों को डर है कि यदि चीन के सामान की खरीद में 10 से 15 प्रतिशत भी घटी, तो उनके लिए लागत निकालना और भी मुश्किल हो जाएगा। अनुमान है कि चीन से आयात होने वाले सामान में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। वहीं चीनी आइटम के बायकॉट के लिए सोशल मीडिया पर एक तरह का अभियान चल रहा है। वॉट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर पर जमकर विरोध हो रहा है। इसके विरोध में बाकायदा वॉट्सऐप ग्रुप देखे जा रहे हैं। कैट के सेक्रेटरी ने बताया कि चाइना मेड सामान होलसेल सेलर्स तक पहुंच चुका है। लेकिन रिटेल सेलर्स की ओर से आने वाली मांग में 20 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है। इन्हें डर है कि लोग वास्तव में यह माल खरीदेंगे या नहीं। उन्होंने कहा चीनी सामान के बायकॉट का असली असर नए साल और क्रिसमस पर दिखाई देगा। अगर दिवाली पर चीनी आइटम नहीं बिकता है, तो रिटेल कारोबारी नए साल और क्रिसमस के लिए चीन को आर्डर देने से बचेंगे।

दिल्ली में 150 करोड़ के ऑर्डर कैंसिल
दिल्ली ट्रेड फेडरेशन के प्रेसिडेंट देवराज बवेजा के अनुसार, बायकॉट की अपील के बाद यहां के काराबारियों ने चीनी सामान के 150 करोड़ रुपए के ज्यादा के ऑर्डर रद्द किए हैं।

दोनों देशों के व्यापार पर पड़ सकता है असर
भारत-चीन के बीच करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का कारोबार होता है। हम चीन से, एक्सपोर्ट के मुकाबले 6.66 गुना ज्यादा इम्पोर्ट करते हैं। 2015-16 में भारत ने चीन को करीब 60 हजार करोड़ रुपए के सामान इम्पोर्ट किया है।

बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा: चीन
वहीं चीन दावा कर रहा है कि भारत में जारी मुहिम का असर बिक्री पर देखने को नहीं मिला है। चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीनी प्रोडक्ट्स की अक्टूबर के पहले हफ्ते में रिकॉर्ड बिक्री हुई है। इसके अनुसार, चीन की मोबाइल फोन कंपनी शियोमी ने भारतीय बाजार में फ्लिपकार्ट, अमेजन इंडिया, स्नैपडील और टाटा क्लिक जैसी कंपनियों की मौजूदगी के बावजूद अक्टूबर के पहले हफ्ते में सिर्फ 3 दिन में 5 लाख फोन्स बेचे हैं।

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