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इतिहास को थामे ये 28 गुफायें – खेजड़िया भोप

सुवासरा से 18 km  घसोई तारनोद चापाखेड़ी होते हुए खेजड़िया भोप पहुंचा जा सकता है। यह गुफा धर्मराजेश्वर से दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है। यहां बौद्ध भिक्षुओं के निवास हेतु एक पहाड़ी को काटकर बनाई गई लगभग 28 गुफायें है। इसलिए इस स्थान की स्थानीय जन “ओरियां खालो खेजड़िया’ कहते है, जिसका अर्थ है – आवासीय स्थान वाली पहाड़ी इन गुफाओं पर क्रमांक अंकित है। गुफा क्रमांक 1 दो स्तंभों पर आधारित विहार-ग्रह है। गुफा क्र. 2 में स्तंभों का अभाव है। तथा छत उन्नत तरीके से बनाई गई। गुफा क्र. 3 से 9 तक समान्य विहार गुफा है। गुफा के बाहर खोले में एक बड़ा स्तूप बना हुआ है। जिसकी ऊँचाई 3.2 मी. है तथा इसे गुम्बदनुमा ढीन आकार बनाया गया है। इन गुफाओं का इतिहासकारों ने 9वीं -10वीं शताब्दी निर्धारित किया गया है।

13 से 20 तक की गुफाएं सामान्य विहार-ग्रह है। गुफा क्र. 23 व 24 में कक्ष में भीतर उन्नत पत्थर से चौकियां निर्मित है। जो संभवतभिक्षुओं द्वारा हेतु प्रयुक्त होती होगी अगली गुफाएं सामान्य विहार-ग्रह है। ये गुफाएं सादी है तथा इनमें कलात्मकता का अभाव है। तथा इसका तात्पर्य यह है कि सजावटी गुफाएं यहां नही है। पत्थर (पाषाण) की कोमल प्रकृति के कारण यहां क्षरण (धीरे—धीरे) खत्म होती जा रही है।पुरातत्वविद के अनुसार ये गुफाये 9 वी से 10 वी शताब्दी में बनाई गई होगी।   इन अनमोल गुफाओं को संरक्षण की अधिक आवश्यकता है। पर्यटन की दृष्टि से ये गुफाएं आकर्षण का केन्द्र बन सकती है।

अवलोकनकर्ता-  मनोज देसाई
सहाप्राध्यापक (कला विभाग)
सवितादेवी जायसवाल स्मृति महाविद्यालय

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