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एकांकी मार्ग है जर्जर, रोड़ के दोनों तरफ है अतिक्रमण स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, विद्यालय के वाहन चल रहे है गैस से

सीतामऊ निप्र। शुक्रवार को महानगर इंदौर की दिल दहला देने वाली घटना की दहलीज पर या नगर भी गुजर रहा है एकांकी मार्ग की जर्जर सड़क पर बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन के दबाव के बीच स्कूली वाहन गुजरते हैं तो उनमे सवार मासूम बच्चों की जान जोखिम का खतरा हर पल बना रहता है।

नगर के अधिकांश मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्था मंदसौर व सुवासरा रोड पर संचालित हो रही है जिनमें से शिशु से लेकर उमावि तक की कक्षाऐ लगती है तथा नगर के अधिकांश नागरिको के बच्चे इन संस्थाओं में अध्ययनरत है। उक्त सभी संस्थाए नगर से एक से तीन किमी दूरी पर संचलित हो रही है। फलस्वरूप इन संस्थाओं के संचालको ने वाहनो की व्यवस्था की है।जिनके माध्यम से अध्ययनरत छात्र छात्राए व छोटे बच्चे उक्त संस्थाओं में आ जा रहे है।

सड़क की दुर्दशा हो चुकी है तार तार
नगर के जिस मार्ग से स्कूली वाहन गुजर रहे है उस पर एक नजर डालते ही रूह कांप उठती है। यहाँ का मुख्य मार्ग एकांकी स्वरुप में विद्यमान है तथा इस मार्ग के दोनों साइड पर दुकाने में कतारबद्ध बनी हुई है जहाँ ग्राहकी का दबाव बना रहता है । इसी मार्ग पर दो व चार पहिया वाहनों के आवागमन का दबाव बना रहता है। नगरवासी पैदल भी आवागमन करते रहते है एवं आवारा मवेशी भी स्वतंत्र विचरण करते रहते है इस अति व्यस्ततम मार्ग की सड़क की दुर्दशा चरण सीमा पार कर चुकी है पेयजल सप्लाई हेतु पाइप लाइन बिछाने है तो पूरी सड़क को दो से तीन बार खुद आ गया। वही मोबाइल केबल का जाल बिछाने हेतु इस सड़क को छलनी किया गया इस कारण मार्ग की सड़क अस्तित्व हीन होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी है इसी मार्ग पर सुबह वा दिन के सत्र में स्कूली वाहनों के काफिले के आवागमन का दौर जारी रहने से नगर में कई बार जाम की स्थिति निर्मित हो जाती हैं तथा छुटपुट विवाद भी होते रहते हैं हालात इतने दयनीय हो चुके हैं कि बच्चों के माता पिता होने वाहनों में छोड़ने जाते हैं तो उन्हें हर पल उनकी सलामती की चिंता सताती रहती हैं बच्चे जब घर लौट आते हैं तब उन्हें शगुन मिल पाता है।

प्रशासन बना मूकदर्शक- नगर के मुख्य मार्ग की दुर्दशा तथा वाहनों के आवागमन के बढ़ते दबाव के मुद्दे नजर नगर वासी लंबे समय से वन बाय वन ट्राफिक व्यवस्था संचालित करने की मांग कर रहे हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन इस मामले में बेहद लापरवाह व निष्क्रिय बना हुआ है तथा जनहित मांग की अनदेखी करता रहा है। प्रशासन द्वारा सडक की भी सुध नही ली जा रही है। किसी योजना के क्रियान्वयन के नाम पर नगर वासियों व बच्चों की जान जोखिम को नजरअंदाज किया जाना न्यायोचित नही है। मुख्य मार्ग की सड़क का प्राथमिकता कर आधार पर पुनः निर्माण होना चाहिए।

नियमो के पालन में सख्ती आवश्यक- स्थानीय निवासी रामेश्वर जामलिया का कहना है कि इंदौर की घटना से सबक की आवश्यकता है नगर के कई स्कूली वाहनों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है कई वाहन गैस से चल रहे हैं जिससे बच्चों की जान जोखिम का खतरा बना रहता है वाहन चालकों के पास लाइसेंस व अन्य नियमों के पालन में शक्ति होना चाहिए देखने में आता है कि वाहनों को क्लीनर व अन्य व्यक्ति चला रहे हैं यह भी गंभीर मंथन का विषय है।

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