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एक ऐसा मंदिर जहां माता को प्रसाद में मिठाई की जगह चप्पल चढ़ाई जाती हैं, जानिए कहां है ये मंदिर

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बेंगलुरु। भारत को यूं ही विविधताओं से भरा देश नहीं कहा जाता है। यहां अलग-अलग धर्म और रीति-रिवाजों को मानने वाले लोग रहते हैं। जब इतने धर्मों को मानने वाले लोग रहते हों तो जाहिर है कि वहां मान्यताएं भी अलग होंगी। ऐसे में अगर किसी धर्म स्थल की बात होती है तो हमारे दिमाग में श्रद्धा और आस्था का ही भाव आता है। आमतौर पर मंदिरों में प्रसाद के तौर पर मिठाई चढ़ाने की बात सामने आती है। हमारे देश के दक्षिणी राज्य कर्नाटक के गुलबर्ग जिले में एक ऐसा मंदिर मौजूद है जहां चढ़ावे के तौर पर मिठाई की जगह चप्पल चढ़ाया जाता है। क्या सोच में पड़ गए। अरे भई, ये सच है। आइए हम आपको इस मंदिर के बारे में बताते हैं। आमतौर पर किसी मंदिर में भगवान को प्रसाद या पैसा चढ़ाया जाता है। वहां भीतर प्रवेश से पहले चप्पले उतारना होती हैं; लेकिन यहां मामला बिल्कुल ही उलटा है।

कर्नाटक के गुलबर्ग जिले के गोला गांव स्थित लकम्मा देवी मंदिर में लोग चप्पलें चढ़ाते हैं। मंदिर के सामने एक नीम का पेड़ है जिसमें लोग चप्पल बांधते हैं और देवी से मुराद मांगते हैं। लकम्मा देवी का मंदिर कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंदा तहसील में है। यहां देवी को प्रसन्न करने के लिए चप्पलों की माला चढ़ाई जाती है। यही नहीं मन्नत के लिए भी मंदिर के बाहर लगे पेड़ पर चप्पल बांधी जाती है। एक स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक इस मंदिर की एक और खासियत है। यहां मंदिर का पुजारी हिंदू नहीं बल्कि मुसलमान होता है। इस मंदिर में दिवाली के बाद आने पंचमी पर विशेष मेला भी लगता है। यहां हर साल ‘फुटवियर फेस्टिवल’ मनाया जाता है। हर मंदिर के बाहर जहां प्रसाद की दुकान लगती हैं वहीं इस मंदिर के बाहर चप्पलों की दुकानें दिखाई देती हैं। माना जाता है कि पंचमी के दिन मंदिर वाले भक्त अगर माता से मन्नत मांगते समय पेड़ पर चप्पल बांधते हैं और जिन लोगों की मान्यताएं पूरी हो जाती है वह मंदिर में आकर देवी को चप्पलों की माला चढ़ाते हैं। यह है मान्यता गांववालों का कहना है कि एक बार देवी मां पहाड़ी पर टहल रही थी। उसी वक्त दुत्तारा गांव के देवता की नजर देवी पर पड़ी और उन्होंने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। देवी ने उससे बचने के लिए अपने सिर को जमीन में धंसा लिया। तब से लेकर आज तक माता की मूर्ति उसी तरह इस मंदिर में है और यहां लोग आज भी देवी के पीठ की पूजा करते हैं। लोगों का कहना है कि पहले मंदिर में बैलों की बलि दी जाती थी लेकिन जानवरों की बलि देने पर रोक लगने के बाद बलि देना बंद कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद देवी मां क्रोधित हो गई और उन्हें शांत किया गया। इसके बाद में बलि के बदले चप्पल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। फुटवियर फेस्टिवल भी होता है दिवाली के बाद पंचमी के दिन इस मंदिर में खास मेला लगता है। इस दिन मंदिर में फुटवियर फेस्टिवल का आयोजन होता है जिसमें देशभर से हजारों लोग पहुंचे और माता के दर्शन करने के साथ ही पेड़ पर चप्पलों को भी बांधा।

लोगों का ऐसा मानना है कि यहां चप्पल चढ़ाने से ईश्वर बुरी शक्तियों से उनकी रक्षा करते हैं। कई लोगों का तो ये भी मानना है कि यहां माता को चप्पल चढ़ाने से पैरों और घुटने का दर्द हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। आपको ये भी बता दें कि लकम्मा मंदिर आपसी भाईचारे और साम्प्रदायिक सद्भाव का अनूठा उदाहरण भी है। यही वजह है कि इस मंदिर में हिन्दु और मुस्लिम दोनों समुदायों के श्रद्धालु आते हैं। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि उनके द्वारा चढ़ाए गए चप्पलों को पहनकर माता रात भर घूमती हैं और उनकी रक्षा करती हैं। अगर आप भी अपनी परेशानियों से निजात पाना चाहते हैं तो कर्नाटक के इस मंदिर में एक बार जरूर आएं।

 

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