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एक बार धर्म आ गया तो मन प्रसन्न, प्रफुल्लित और आनंद विभोर हो उठता है – आचार्य श्री रामलाल जी मसा

मंदसौर। आगम ज्ञाता, व्यसन मुक्ति के प्रणेता, दीक्षा दानेश्वरी, जन जन की आस्था के केन्द्र आचार्य भगवन्त 1008 श्री रामलाल जी मसा का प्रवेश शनिवार को नई आबादी स्थित समता भवन में हुआ। प्रवेश पश्चात् मसा के प्रवचन संजय गांधी उद्यान में हुए। जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने सहभागिता की। साधु साध्वी मंडल के श्री जयेश मुनिजी, श्री धर्मेश मुनि जी, महासति श्री चंचक कंवरजी,श्री इन्दुबालाजी, श्री यशस्वी श्री जी, श्री शांता कंवर श्रीजी मसा आदि ने भी अपने गुरू के गुण गाये एवं भावना प्रकट की। प्रवचन के पूर्व समता बालिका मंडल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

आचार्य श्री रामलाल जी मसा ने कहा कि धर्म की महिमा सर्वत्र होती है। हमें अवश्यमेव चिंतन करना है कि धर्म जीवन के लिये क्यों जरूरी है। धर्म शांति देने वाला होता है, मन की उहापोह को समाप्त करके समाधि देने वाला होता है। आपने कहा धर्म कभी उद्धवेदी नहीं होता, परेशानियॉ तो मन की आकांक्षाओं के कारण आती है। धर्म तो तृप्ति देने वाला है, एक बार धर्म आ गया तो मन प्रसन्न, प्रफुल्लित और आनंद विभोर हो उठता है। हमने धर्म के सही स्वरूप को अभी तक जाना नहीं है। उन्होने कहा कि आचार्य नानेश फरमाया करते थे कि धर्म रोकडि़यॉ धंधा है, तत्काल लाभ देने वाला है। जब मन चंचल बना रहता है, तब धर्म ही निर्णय लेने की स्थिति में लाता है। आपने कहा कि सामायिक का अर्थ हमारे अंदर स्थिरता लाना है। आपने कहा कि धर्म हमारे भीतर आयेगा तो निश्चय ही बदलाव आयेगा।

आज से कालाखेत मैदान पर होगे प्रवचन
आचार्य श्री रामलाल जी मसा के प्रवचन आज से बालागंज स्कूल कालाखेत मैदान पर प्रातः 8.30 बजे से होगे। संघ के विकास चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर में होने वाले ऐतिहासिक आयोजन के लिये 100 से अधिक साधु साध्वियॉ मंदसौर नगर में पधार चुके है।

पाण्डाल बनकर तैयार
नगर में होने वाले दो दिवसीय ऐतिहासिक आयोजन के कालाखेत मैंदान पर विशाल पाण्डाल बनकर तैयार हो गया और बाकी तैयारियॉ भी अंतिम चरणों में चल रही है। आयोजक मंडल और संघ ने नगर व आस पास की सभी धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में आयोजन में पधारने का निवेदन किया है।

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